noida engineer death car remains lost in water four days after accident नोएडा: चौथे दिन भी पानी में गुम इंजीनियर की कार, निकालने को लेकर क्या तैयारी?, Ncr Hindi News - Hindustan
More

नोएडा: चौथे दिन भी पानी में गुम इंजीनियर की कार, निकालने को लेकर क्या तैयारी?

नोएडा में निर्माणाधीन मॉल के गहरे गड्ढे में गिरी इंजीनियर युवराज की कार चौथे दिन भी नहीं निकाली जा सकी है। बचाव दलों द्वारा कार निकालने से मना करने के बाद अब पुलिस सोनार तकनीक और लखनऊ के विशेषज्ञों की मदद लेगी।

Tue, 20 Jan 2026 04:05 PMKrishna Bihari Singh लाइव हिन्दुस्तान, निशांत कौशिक, नोएडा
share
नोएडा: चौथे दिन भी पानी में गुम इंजीनियर की कार, निकालने को लेकर क्या तैयारी?

नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता का शव बचाव दल ने घटना के करीब साढ़े चार घंटे बाद बरामद कर लिया था, लेकिन उनकी कार तीन दिन बाद यानी चौथे दिन भी गड्ढे में भरे पानी से निकाली नहीं जा सकी। कार कहां फंसी है, किस हाल में है, इसकी कोई जानकारी जांच टीम को नहीं है। अब पुलिस कार को निकालने के लिए सोनार तकनीक का सहारा लेगी।

हमारा काम जिंदगी बचाना, कार निकालना नहीं : विभाग

हादसे के तीन बाद भी युवराज की कार अब भी गड्ढे में फंसी है। मामले में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, दमकल ने पानी में डूबी कार को निकालने से मना कर दिया। सभी विभागों का कहना है कि उनका काम व्यक्ति को बचाना है, डूबी हुई कार को निकालना नहीं। इसकी जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस की है।

पानी से भरे गड्ढे में डूबी है कार

इंजीनियर युवराज की कार 16 जनवरी की रात करीब 12 बजे नाले की दीवार तोड़ते हुए एक निर्माणाधीन मॉल के करीब 50 फीट गहरे गड्ढे में जा गिरी। पुलिस, दमकल विभाग और एनडीआरएफ की टीम ने जब तक युवराज को निकाला, उनकी मौत हो चुकी थी। हालांकि, कार अब भी उसी पानी से भरे गड्ढे में डूबी है।

सोनार तकनीक का सहारा लेगी पुलिस

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गंदा पानी, गड्ढे में सरिये लगे बीम, बड़ी घास और दलदली जमीन जैसी चुनौतियों को देखते हुए अब कार को तलाशने के लिए सोनार तकनीक का सहारा लेने का निर्णय लिया गया है। यह तकनीक अभी पुलिस के पास नहीं है।

गड्ढे से पानी निकलवाने के भी निर्देश

पुलिस के एक उच्च अधिकारी ने बताया कि इसके लिए लखनऊ मुख्यालय में बात की गई है और वहां से विशेषज्ञ बुलाए जा रहे। इसके अलावा नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों को पम्प सैट लगाकर गड्ढे का पानी निकलवाने के लिए भी कहा गया है।

बीम में लगे सरियों के बीच उतरना चुनौती

इस हादसे में पुलिसकर्मियों और अग्निशमन विभाग के कर्मियों के पानी से भरे गड्ढे में न उतरने को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। उच्च अधिकारियों का कहना है कि पानी में पुलिसकर्मियों के साथ गोताखोरों को भी बुलाकर उतारा गया, लेकिन गंदे पानी और कई अर्धनिर्मित बीम में निकले सरियों के बीच ज्यादा आगे जाना बड़ी चुनौती थी।

जमीन भी दलदली

उच्च अधिकारियों का कहना है कि वहां पानी में उगी बड़ी-बड़ी घास के कारण भी नीचे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। सरिये जानलेवा हो सकते थे और जमीन भी दलदली है। इन सब चुनौतियों के बीच राहत और बचाव अभियान चलाया गया। पुलिस पहले ही जिले में चार जल चौकी स्थापित करने का प्रस्ताव शासन को भेज चुकी है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:दिल्ली में 40 की स्पीड से चलेंगी तेज हवाएं, गरज-चमक के साथ बारिश येलो अलर्ट
ये भी पढ़ें:दिल्ली मेट्रो स्टेशन में शख्स ने की पेशाब; वायरल हुआ VIDEO, क्या बोले लोग?
ये भी पढ़ें:भोजशाला में बसंत पंचमी पर तैयारी; हिंदू-मुस्लिम पक्ष से बात, किसने क्या कहा?

इस तरह काम करती है यह तकनीक

साउंड नेविगेशन एंड रेंजिंग सिस्टम (सोनार) पानी में ध्वनि तरंगें भेजता है। जब ये तरंगें किसी वस्तु से टकराकर लौटती हैं (प्रतिध्वनि), तो सोनार उनकी दूरी, दिशा और गति का पता लगाता है। पानी में डूबी वस्तुओं का पता लगाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

लेटेस्ट Hindi News , Delhi News , Ghaziabad News , Noida News , Gurgaon News और Faridabad News सहित पूरी NCR News पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।