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नोएडा में 5 साल में तैयार हो गईं 500 से अधिक अवैध इमारतें, चुपचाप देखते रहे अफसर

Noida News : नोएडा शहर में बीते कुछ सालों में तेजी से अवैध इमारतें खड़ी हो गईं हैं। प्राधिकरण की सांठगांठ से अवैध इमारतों का दायरा बढ़ता रहा है। शिकायत के बावजूद प्राधिकरण कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। ऐसे में सरकारी जमीन प्राधिकरण के हाथों से निकलती जा रही है।

Sun, 5 April 2026 08:14 AMPraveen Sharma हिन्दुस्तान, नोएडा, विक्रम शर्मा
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नोएडा में 5 साल में तैयार हो गईं 500 से अधिक अवैध इमारतें, चुपचाप देखते रहे अफसर

Noida News : नोएडा शहर में बीते कुछ सालों में तेजी से अवैध इमारतें खड़ी हो गईं हैं। प्राधिकरण की सांठगांठ से अवैध इमारतों का दायरा बढ़ता रहा है। शिकायत के बावजूद प्राधिकरण कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। ऐसे में सरकारी जमीन प्राधिकरण के हाथों से निकलती जा रही है। अनुमान के तौर पर बीते पांच-छह साल में शहर में करीब 500 अवैध इमारतें बनकर तैयार हो चुकी हैं। अवैध निर्माण पर कार्रवाई के मामले में प्राधिकरण के अधिकारी चुप्पी साधे हुए बैठे हैं।

बरौला, भंगेल, सलारपुर, हाजीपुर, सफार्बाद, सोरखा, गढ़ी चौखंडी, मामूरा, नंगली वाजितपुर, कामबख्शपुर समेत कई गांवों में सरकारी मुआवजा उठी जमीन पर अवैध रूप से इमारतों का निर्माण चल रह है। इसके अलावा जो जमीन किसानों की है, वहां पर भी बिना नक्शे पास कराए निर्माण हो रहा है। पिछले चार-पांच सालों में शहर में काफी संख्या में जमीनों पर कब्जा हुआ है। ऐसे में प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

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प्राधिकरण की भारी भरकम सिविल व भूलेख विभाग की टीम अवैध निर्माण को रोकने में असफल साबित हो रही है। लोगों का कहना है कि बिना प्राधिकरण की सांठगांठ के अवैध निर्माण संभव नहीं है। निर्माण पूरा हो जाने के बाद जब लोग रहना शुरू कर देते हैं तब गरीब आदमी के आशियाने को उजाड़ने के लिए प्राधिकरण का बुल्डोजर पहुंचता है। अवैध निर्माण पर कार्रवाई नहीं करने के मामले में प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि पुलिस प्रशासन से बातचीत चल रही है। जल्द ही योजना बनाकर कार्रवाई की जाएगी।

सलारपुर में अवैध निर्माण रोकने पर सवाल

शहर के बीचों-बीच स्थित सलारपुर और हाजीपुर में पिछले कुछ सालों में अवैध रूप से इमारतें खड़ी कर फ्लैट बनाकर बेचे जा रहे हैं। ये 6 से 8 मंजिल की इमारतें बनाई गई हैं। अब भी कुछ निर्माण रातों-रात चल रहे हैं। वन से थ्री बीएचके फ्लैट बनाए जा रहे हैं। अवैध निर्माण के मामले में अकेले सलारपुर में 24 खसरा नंबरों पर 39 डेवलपरों को प्राधिकरण ने नोटिस भी जारी किया था। इन इमारतों का निर्माण रुकवाने के लिए प्राधिकरण के आला अधिकारियों ने 150 अधिकारियों-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। हर दिन के हिसाब से ड्यूटी लगाई गई थी। इसके बावजूद एक भी दिन इमारतों में काम नहीं रुका। ऐसे में 150 अधिकारियों-कर्मचारियों की टीम पर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस समय अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई थीं, उस समय वह निर्माणाधीन थीं, जो लगभग बनकर तैयार हो चुकी हैं। सील लगी इमारतों में भी निर्माण चल रहा है।

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नोटिस की खानापूर्ति

अवैध इमारतों में कई बड़े नामी शोरुम बरौला, हाजीपुर खुल चुके हैं। इन शोरूम को प्राधिकरण ने नोटिस जारी कर अवैध इमारतों में नहीं खोलने का निर्णय लिया था। प्राधिकरण की यह प्रक्रिया खानापूर्ति बनकर रह गई है।

मामले कोर्ट में चल रहे

गांवों में किसानों व प्राधिकरण के बीच 100 से 200 गज के मामले कोर्ट में चल रहे हैं, लेकिन मौके पर लोगों ने केस की आड़ में 500 से 2 हजार गज जमीन पर कब्जा कर रखा है। प्राधिकरण इस जमीन पर कार्रवाई नहीं कर रहा है।

दो साल पहले एजेंसी का चयन

बरौला में हनुमान मूर्ति के पास काफी संख्या में अवैध इमारतें बन चुकी हैं। इन इमारतों पर दो साल पहले ये अवैध इमारते हैं, यह पुतवाया गया था। शाम होते-होते भूमाफियाओं ने उनको मिटवा दिया। उसी दौरान 12 इमारतों को चिन्हित करते हुए उनको तोड़ने के लिए प्राधिकरण के वर्क सर्किल-3 ने एक एजेंसी का चयन किया था। इसके बावजूद आज तक एक भी इमारत नहीं गिरी है। यही नहीं उस घटनाक्रम के बाद बड़े नामी शोरूम भी खुल चुके हैं।

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अरबों की जमीन पर कब्जा

सीएजी ने भी वर्ष 2021 तक नोएडा में सरकारी जमीन पर हो रखे कब्जे की जांच की थी। सीएजी रिपोर्ट के तहत ही नोएडा में 45 लाख 26 हजार 464 वर्ग मीटर जमीन पर अतिक्रमण है। इसकी अनुमानित कीमत एक खरब, 63 अरब 85 करोड़ 79 लाख 96 हजार आठ सौ रुपये है। खास बात यह है कि सीएजी की यह कब्जे की रिपोर्ट अधिकारियों के सर्वे पर कागजी रिकॉर्ड के तौर पर है।

बाकी जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब

हाल ही में तीन दिन पहले अवैध निर्माण पर कार्रवाई नहीं करने पर प्राधिकरण के वर्क सर्किल-10 के वरिष्ठ प्रबंधक केवी सिंह को हटाकर डोरी लाल को जिम्मा दिया गया है। खास बात यह है कि शहर में बाकी कई जगह भी अवैध निर्माण तेजी से चल रहा है, उन क्षेत्र के अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी ये सवाल सोशल मीडिया पर पूछे जा रहे हैं।

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