नोएडा एयरपोर्ट ने बदल दी ग्रामीणों की जिंदगी, जहां साइकिल से चलते थे लोग आज घर के बाहर खड़ी हैं SUV
गांव के ही रहने वाले एक शख्स ने बताया कि दयानातपुर अब सिर्फ नक्शे पर मौजूद एक गांव भर नहीं रह गया है, बल्कि यह बड़े निवेश का एक प्रमुख केंद्र बन गया है, जिसमें कई होटल प्रोजेक्ट्स भी शामिल हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते शनिवार को नोएडा में बने अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट का उद्घाटन किया था। इस दौरान उन्होंने इस एयरपोर्ट के लिए अपनी जमीन देने वाले किसानों को विशेष रूप से धन्यवाद कहा था। करीब 5 हजार एकड़ जमीन पर बने इस हवाई अड्डे के लिए बड़े पैमाने पर ग्रामीणों से जमीनों का अधिग्रहण किया गया था। हालांकि जमीन देने वाले ग्रामीणों की किस्मत भी इस एयरपोर्ट ने पूरी तरह से पलट दी है। दरअसल इसके लिए जिन-जिन किसानों ने अपनी जमीनें दी हैं, अब वो साधारण किसान ना रहकर गांव के बड़े आसामी बन चुके हैं, और एक जमाने में जिन घरों के आगे गाय-भैंसे बंधा करती थीं, अब वहां पर महंगी-महंगी SUV से लेकर कारें नजर आ रही हैं। कई लोगों ने बड़े गर्व के साथ बताया कि उनके बैंक अकाउंट में 1-1 करोड़ रुपए रखे हुए हैं और जिससे कि हर महीने उन्हें 60 हजार रुपए का तो केवल ब्याज मिल जाता है। जिससे उनका जीवन बहुत अच्छे से गुजर रहा है।
NDTV की एक रिपोर्ट के अनुसार इस एयरपोर्ट ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऐसे ही एक छोटे से गांव दयानतपुर को भी पूरी तरह से बदलकर रख दिया है। इस एयरपोर्ट के बनने के बाद गांव में रहने वाले लोगों के रहन-सहन और जीवन में आमूलचूल परिवर्तन हो चुका है। ग्रामीणों के जीवन में आया बदलाव सिर्फ उनके रहन-सहन में ही नहीं आया है, बल्कि कई लोग तो इसकी वजह से गांव छोड़कर शहर में भी बस चुके हैं। हालांकि गांव में उनका घर अब भी है, लेकिन अब वो वहां रहते नहीं हैं।
ग्रामीणों का खुद का कहना है कि एयरपोर्ट के लिए गांव की लगभग 700 हेक्टेयर जमीन ली गई थी, जिसे देने के बदले उन्हें करोड़ों रुपए का मुआवजा मिला। उन्होंने बताया कि कुछ हजार की आबादी वाले इस गांव में ज्यादातर परिवारों को उनकी जमीन के हिसाब से अलग-अलग मुआवजा मिला। हालांकि किसी भी परिवार के हिस्से 1 करोड़ रुपए से कम रकम नहीं आई। ऐसे में इतनी रकम ने उनका जीवन पूरी तरह से बदलकर रख दिया।
गांव में रहने वाले ललित शर्मा नाम के ऐसे ही एक शख्स ने बताया कि उनकी 40 बीघा जमीन के बदले उन्हें 5 करोड़ रुपए का मुआवजा मिला था। इन पैसों से उन्होंने अपने बाड़े में, जिसका इस्तेमाल वो पहले गाय-भैंस बांधने व चारा रखने के लिए करते थे, वहां पर एक लॉन, एक झूला और चार कमरों वाला एक बंगला बनवा लिया है, जिसके सभी कमरों में एयर कंडिशनर भी लगे हुए हैं। इसके अलावा जहां पर वह मवेशी बंधते थे, अब वहां एक काली SUV खड़ी होती है। हालांकि उनका परिवार अब यहां नहीं रहता है, बल्कि इस जगह का उपयोग वे सिर्फ बैठक के लिए करते हैं।
ललित ने बताया कि 'कुछ साल पहले तक लोग जमीन के बदले मुआवजे की रकम से कारें और घर खरीद लेते थे, और बाद में उन्हें गार्ड की नौकरी करनी पड़ती थी। लेकिन हमने ऐसा नहीं किया और पैसे को सही जगह लगाया।' उन्होंने बताया कि 'मैंने जमीन के बदले मिले उन पैसों से बुलंदशहर में खेती की जमीन खरीद ली, और साथ ही कंस्ट्रक्शन का काम शुरू भी कर दिया। वहीं एयरपोर्ट बनने की वजह से मेरा काम लगातार बढ़ रहा है।'
उधर ललित के चाचा रघुनंदन ने गांव में आए बदलाव के बारे में बताते हुए कहा कि, 'पहले गांव के कुछ लोग टैक्सी चलाते थे। लेकिन अब उनके पास कई-कई गाड़ियां हैं। वहीं एक जमाना था जब गांव के लोग साइकिल खरीदने से पहले भी दो बार सोचते थे। लेकिन अब यहां हर घर के बाहर दो-दो कारें खड़ी रहती हैं।' उन्होंने बताया कि उनका बेटा अब ग्रेटर नोएडा में जाकर बस गया है। उसने वहाँ अपना घर बना लिया है और अपना बिजनेस भी कर रहा है।
गांव में रहने वाले और साइकिल पर चलने वाले योगेश्वर नाम के बुजुर्ग शख्स ने बताया कि, 'मुझे इस साइकिल से मत आंकिए। मेरे बैंक खाते में 1 करोड़ रुपए जमा हैं और मुझे हर महीने 60,000 रुपए ब्याज के तौर पर मिलते हैं। जिंदगी बढ़िया चल रही है।' हालांकि गांव में रहने वाले कई लोगों ने बताया कि अचानक पैसा आने से ग्रामीणों की सोच भी बदल गई है, एक वक्त पर गांव में 250 लोग रहते थे, लेकिन अनाप-शनाप पैसा आने के बाद कई लोगों के परिवार अब नोएडा, ग्रेटर नोएडा और फ़रीदाबाद में जाकर बस गए हैं। उन्होंने कहा कि नए घर तो बन रहे हैं, लेकिन पुराने घरों पर ताले लटके हैं।
गांव के ही एक ब्रह्मदत्त नाम के शख्स ने बताया कि दयानातपुर अब सिर्फ नक्शे पर मौजूद एक गांव भर नहीं रह गया है, बल्कि यह बड़े निवेश का एक प्रमुख केंद्र बन गया है, जिसमें कई होटल प्रोजेक्ट्स भी शामिल हैं। वहीं एक अन्य शख्स ने आसपास के इलाकों में 5-स्टार और 7-स्टार होटल बनने की जानकारी भी दी। साथ ही कहा कि अगर ऐसा होता है तो गांव के कई लोगों के बच्चे जो कि दिल्ली के होटलों में काम करते हैं उनको यहीं गांव के आसपास ही रोजगार मिल जाएगा।




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