नारी शक्ति वंदन अधिनियम : निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी : रहाटकर
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के महत्व पर प्रकाश डाला। यह कानून महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करने के लिए मानसिकता में बदलाव लाने का प्रयास है। यह भारत के लोकतंत्र को अधिक संवेदनशील और समावेशी बनाकर महिलाओं की भागीदारी को सुनिश्चित करता है।

नई दिल्ली, एजेंसी। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने सोमवार को कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम उस मानसिकता में बदलाव लाने का एक प्रयास है जिसने महिलाओं को वर्षों तक निर्णय लेने की प्रक्रिया से दूर रखा है। रहाटकर ने विज्ञान भवन में नारी शक्ति वंदन सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि यह कानून संख्यात्मक प्रतिनिधित्व से भी आगे जाता है तथा शासन और नीति निर्माण में महिलाओं की अधिक भागीदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह कानून भारत के लोकतंत्र को अधिक संवेदनशील और समावेशी बनाकर उसे मजबूत करता है और नेतृत्व की भूमिकाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
एनसीडब्ल्यू अध्यक्ष ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महज लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में आरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस मानसिकता में बदलाव लाने का प्रयास है जिसने वर्षों से महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया से दूर रखा है। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो भारत के लोकतंत्र को संख्या बल से कहीं आगे, अधिक संवेदनशीलता की ओर अग्रसर करता है।
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