महिला आरक्षण 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में एक : मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक पर खड़ा है। उन्होंने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन की प्रक्रिया शुरू की है, जिससे 2029 तक महिलाओं के लिए आरक्षण लागू होगा। यह निर्णय महिलाओं के सशक्तीकरण और सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

नई दिल्ली, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि भारत 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक निर्णय लेने की दहलीज पर खड़ा है। उन्होंने कहा कि संसद उस समय नया इतिहास रचेगी जब 2029 से महिला आरक्षण अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए इस सप्ताह इसमें संशोधन किया जाएगा। मोदी ने संसद के तीन दिवसीय सत्र से पहले यहां आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में कहा कि इस कानून के लागू होने से अतीत की परिकल्पनाएं साकार होंगी और भविष्य के संकल्प पूरे होंगे। यह ऐसे भारत का संकल्प है जो समतावादी हो, जिसमें सामाजिक न्याय केवल नारा न होकर हमारी कार्य संस्कृति और निर्णय प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा हो।
उन्होंने कहा कि जब 2023 में यह कानून पेश किया गया था तब इसे सभी दलों की सर्वसम्मति से पारित किया गया था और इसे 2029 तक लागू करने की विशेष रूप से विपक्ष की ओर से सामूहिक मांग उठी थी।बता दें कि संसद का बजट सत्र बढ़ा दिया गया है। 16 से 18 अप्रैल तक तीन दिवसीय बैठक बुलाई गई है, जिसमें ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन पेश किए जाएंगे ताकि इसे 2029 में लागू किया जा सके।प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्यों की विधानसभाओं से लेकर देश की संसद तक, दशकों के इंतजार को समाप्त करने का समय 16, 17 और 18 अप्रैल है, जब संशोधनों पर विचार करने और उन्हें पारित करने के लिए विस्तारित बजट सत्र निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि 2023 में नई संसद में हमने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के रूप में पहला कदम उठाया था। हमारे राष्ट्र की विकास यात्रा में इन महत्वपूर्ण पड़ावों के बीच भारत 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक निर्णय लेने की दहलीज पर खड़ा है। मोदी ने कहा कि मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कहता हूं कि यह फैसला हमारे समय के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक होगा। यह फैसला महिला सशक्तीकरण को समर्पित होगा और नारी शक्ति एवं नारी सम्मान के प्रति सच्चे आदर का प्रतीक होगा। उन्होंने भरोसा जताया कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के लागू होने से पंचायत से संसद तक महिलाओं का सफर आसान होगा और उनके लिए नए अवसर खुलेंगे।संसद ने सितंबर 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया था जिसे आमतौर पर महिला आरक्षण कानून के नाम से जाना जाता है। यह विधायी निकायों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अधिनियम में लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीट आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। महिला आरक्षण कानून में प्रस्तावित संशोधन पारित होने के बाद लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़कर 816 हो जाएगी, जिनमें से 273 सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान 2023 में संविधान संशोधन के जरिए किया गया था।गौरतलब है कि मौजूदा कानून के तहत महिलाओं के लिए आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं हो पाता, क्योंकि इसे 2027 की जनगणना के बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने से जोड़ा गया था। इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने के लिए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में बदलाव जरूरी है। इसी वजह से सरकार ने कानून में संशोधन पारित कराने के लिए बजट सत्र की अवधि का विस्तार किया गया है।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




साइन इन