5 जून तक खाली होगा 113 वर्ष पुराना जिम खाना क्लब
दिल्ली के 113 वर्ष पुराने मशहूर जिम खाना क्लब को 5 जून तक अपनी 27.3 एकड़ जमीन खाली करनी होगी। सरकार का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय हित और रणनीतिक बुनियादी ढांचे की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। क्लब का संचालन केंद्र सरकार के अधीन है और इसे पहले ही निलंबित किया जा चुका है।

नई दिल्ली, वरिष्ठ संवाददाता दिल्ली के 113 वर्ष पुराने मशहूर जिम खाना क्लब को जल्द ही यह जगह खाली करनी होगी। केंद्र सरकार ने क्लब को निर्देश दिए हैं कि आगामी 5 जून तक वह सफदरजंग रोड स्थित अपनी 27.3 एकड़ जमीन को खाली कर दें। सरकार ने यह कार्रवाई मूल लीज समझौते के तहत अपने ''''पुनः प्रवेश और पुनः आरंभ'''' अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए की है। सरकार का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय हित और रणनीतिक बुनियादी ढांचे की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
भूमि एवं विकास कार्यालय का आदेश
आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय की ओर से भूमि एवं विकास कार्यालय (एल एंड डीओ) ने इसे लेकर आदेश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि दिल्ली जिमखाना क्लब जिस इलाके में स्थित है, वह राष्ट्रीय राजधानी का बेहद संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र माना जाता है। यह क्लब सफदरजंग रोड पर स्थित है और इसके ठीक पीछे प्रधानमंत्री आवास मौजूद है। ऐसे में सुरक्षा और प्रशासनिक दृष्टि से इस इलाके का महत्व काफी ज्यादा है। अधिकारियों ने बताया कि इस जमीन की जरूरत अब रक्षा ढांचे को मजबूत करने, शासन से जुड़ी सुविधाओं और आसपास मौजूद सरकारी परिसरों के विस्तार जैसे कार्यों के लिए महसूस की जा रही है।
क्लब का संचालन और प्रबंधन
दिल्ली जिमखाना क्लब का संचालन और प्रबंधन वर्तमान में केंद्र सरकार के कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के अधीन आता है। वित्तीय गड़बड़ियों और अनियमितताओं के आरोपों के बाद, राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण ने इसके बोर्ड को निलंबित कर दिया था। इसके बाद से यह सीधे सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासक के माध्यम से संचालित होता है।
लीज की शर्तों का हवाला दिया गया
केंद्र सरकार ने अपने आदेश में कहा कि यह जमीन मूल रूप से ‘इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड’ को पट्टे पर दी गई थी। जिसे बाद में ‘दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड’ नाम दिया गया। इस जमीन का उपयोग सामाजिक और खेल गतिविधियों के लिए किया जाना था। सरकार ने लीज डीड के खंड-4 का हवाला देते हुए कहा कि अगर किसी सार्वजनिक उद्देश्य के लिए इस संपत्ति की आवश्यकता पड़ती है, तो सरकार के पास इसे वापस लेने का पूरा अधिकार सुरक्षित है। इन्हीं प्रावधानों के तहत भारत के राष्ट्रपति ने एल एंड डीओ के माध्यम से लीज समाप्त करने और संपत्ति पर तत्काल पुनः प्रवेश का आदेश जारी किया है।
पूरी संपत्ति सरकार के अधीन होगी
आदेश में कहा गया है कि 27.3 एकड़ में फैली पूरी संपत्ति, जिसमें क्लब भवन, लॉन, खेल सुविधाएं, ढांचे और अन्य फिटिंग्स शामिल हैं। अब पूरी तरह भारत सरकार के अधीन आ जाएगी। क्लब प्रबंधन को आगामी 5 जून तक शांतिपूर्ण तरीके से कब्जा सौंपने को कहा गया है। सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर तय समय तक कब्जा नहीं सौंपा गया तो कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सौ वर्षों से अधिक समय का इतिहास रहा है
दिल्ली का जिमखाना क्लब 3 जुलाई 1913 को ''''इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब'''' के रूप में स्थापित हुआ था। विशेषज्ञों के अनुसार यह क्लब प्रतिष्ठित और पारंपरिक वीआईपी क्लब के तौर पर मशहूर रहा है। इसके पहले अध्यक्ष सर स्पेंसर हारकोर्ट बटलर (तत्कालीन आगरा और अवध के संयुक्त प्रांत के गवर्नर) थे। देश की आजादी के बाद इसका नाम बदलकर ''''दिल्ली जिमखाना क्लब'''' कर दिया गया। यह क्लब लंबे समय से देश के बड़े नौकरशाहों, राजनयिकों, सैन्य अधिकारियों और उद्योगपतियों का प्रमुख सामाजिक केंद्र रहा है।
ये हैं क्लब की खासियत
- नई दिल्ली के केंद्र में स्थित दिल्ली जिमखाना क्लब अपनी औपनिवेशिक विरासत, बेहतरीन खेल सुविधाओं और विशिष्ट सामाजिक माहौल के लिए प्रसिद्ध है।
- यहां विंबलडन के मानकों के समान 20 से अधिक शानदार ग्रास (घास वाले) टेनिस कोर्ट मौजूद हैं, जो इसे देश के बेहतरीन टेनिस केंद्रों में से एक हैं।
- इस क्लब में अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्विमिंग पूल, स्क्वैश और बैडमिंटन कोर्ट, बिलियर्ड्स रूम, कार्ड रूम, जिम आदि सुविधाएं हैं।
स्थायी सदस्यता पाने के लिए लंबा इंतजार
प्राप्त जानकारी के अनुसार दिल्ली जिमखाना क्लब जैसे प्रतिष्ठित क्लबों की स्थायी सदस्यता पाने के लिए आम नागरिकों के लिए काफी लंबा इंतजार (सालों तक) होता है। स्थायी सदस्यता के लिए सरकारी श्रेणी में सामान्य फीस चार लाख रुपये से अधिक और गैर-सरकारी श्रेणी में 18 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है।
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