नोटबंदी में पुराने नोट लेने से किया था इनकार, एक्सिस बैंक पर लगा 3.19 करोड़ का जुर्माना
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने नोटबंदी के दौरान पुराने नोट जमा करने से इनकार करने के मामले में एक्सिस बैंक को बड़ा झटका दिया है। आयोग ने बैंक को दिल्ली की एक लॉजिस्टिक्स कंपनी को 3.19 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है।

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने नोटबंदी के दौरान पुराने नोट जमा करने से इनकार करने के मामले में एक्सिस बैंक को बड़ा झटका दिया है। आयोग ने बैंक को दिल्ली की एक लॉजिस्टिक्स कंपनी को 3.19 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है। आयोग ने माना कि बैंक ने सेवा में कमी की है।
इस पीठ ने दिया आदेश,
यह आदेश आयोग के पीठासीन सदस्य एवीएम जे. राजेंद्र और न्यायिक सदस्य अनूप कुमार मेंदिरत्ता की पीठ ने 10 मार्च को दिया। आयोग प्रोक्योर लॉजिस्टिक्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की उस अपील पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें कंपनी ने एक्सिस बैंक पर नोटबंदी के दौरान पुराने नोट जमा करने से इनकार करने का आरोप लगाया था।
कंपनी को नोट जमा करने से किया था इंकार
कंपनी का कहना था कि 8 नवंबर 2016 को केंद्र सरकार द्वारा नोटबंदी की घोषणा के बाद सरकार ने सीमित समय के लिए पुराने नोट बैंक खातों में जमा करने की अनुमति दी थी। लेकिन इस दौरान एक्सिस बैंक ने कई बार अनुरोध करने के बावजूद कंपनी को अपने KYC अनुपालन वाले खाते में नोट जमा करने की अनुमति नहीं दी।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बैंक ने बार-बार अनुरोध के बावजूद कंपनी को उसके खाते में नोट जमा करने से रोका और यह सिलसिला तब तक जारी रखा, जब तक कि नोट जमा करने की तय समय-सीमा समाप्त नहीं हो गई। इसके कारण कंपनी को सीधे तौर पर नुकसान उठाना पड़ा, क्योंकि उसके पास मौजूद नोट समय-सीमा खत्म होने के बाद बेकार हो गए।
आयोग ने यह भी कहा कि यदि बैंक को किसी लेन-देन पर शक था, तो वह उसे संबंधित प्राधिकरण को रिपोर्ट कर सकता था। लेकिन कानून के तहत बैंक को यह अधिकार नहीं था कि वह केवाईसी अनुपालन वाले खाते में नोट जमा करने से एकतरफा इनकार कर दे।
लेन-देन की मनाई है, तो ठोस वजह हो
आदेश में कहा गया कि बैंकिंग प्रणाली में जमा स्वीकार करना एक मूलभूत सेवा है और बैंक को नियमानुसार कार्य करना चाहिए। यदि किसी लेन-देन को अस्वीकार करना हो, तो उसके लिए ठोस कारण होने चाहिए और उन्हें संबंधित नियमों के अनुसार स्पष्ट किया जाना चाहिए।
आयोग ने एक्सिस बैंक को निर्देश दिया कि वह प्रोक्योर लॉजिस्टिक्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को 3.19 करोड़ रुपये का भुगतान करे। साथ ही 30 दिसंबर 2016 से भुगतान की तारीख तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा।
आयोग ने कहा कि यह राशि दो महीने के भीतर चुकानी होगी। यदि तय समय के भीतर भुगतान नहीं किया गया, तो देरी की अवधि के लिए बैंक को 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना पड़ेगा।




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