दिल्ली-मेरठ के बाद कौन से नए रूट, किराया और पार्किंग; नमो भारत पर हर सवाल का जवाब
दिल्ली से मेरठ तक घंटों का सफर मिनटों में करने का सपना अब साकार हो गया। फरीदाबाद-नोएडा-गुरुग्राम कॉरिडोर, गाजियाबाद-जेवर, दिल्ली-बड़ौत और गाजियाबाद-हापुड़ कॉरिडोर के निर्माण की प्रक्रिया चल रही है।

दिल्ली से मेरठ तक घंटों का सफर मिनटों में करने का सपना अब साकार हो गया। इस कॉरिडोर पर देश में पहली बार मेट्रो और नमो भारत ट्रेन को एक ही ट्रैक पर दौड़ाने का प्रयोग भी हुआ। फरीदाबाद-नोएडा-गुरुग्राम कॉरिडोर, गाजियाबाद-जेवर, दिल्ली-बड़ौत और गाजियाबाद-हापुड़ कॉरिडोर के निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। इन सभी मुद्दों को लेकर हिन्दुस्तान के मेट्रो एडिटर गौरव त्यागी और वरिष्ठ संवाददाता राजीव शर्मा ने एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक शलभ गोयल से विस्तृत चर्चा की।
● नमो भारत के पूरे कॉरिडोर पर ट्रेनों का संचालन शुरू हो चुका है, यात्रियों का कैसा रिस्पांस है और क्या चुनौतियां हैं?
22 फरवरी से पहले नमो भारत की राइडरशिप करीब 60 हजार थी। अब यह संख्या एक लाख के पास पहुंच गई है। चुनौती की बात करें तो जनता से जो सराहना इस प्रोजेक्ट को मिली है, उसे बरकरार रखना, ट्रेनों को सुरक्षित और सही समय पर चलाना और स्टेशनों को साफ-सुथरा रखना एक चुनौती के तौर पर देख रहे हैं।
● मेरठ में कई स्टेशनों पर पार्किंग की सुविधा क्यों नहीं नहीं है?
एनसीआरटीसी के पास अपनी कोई जमीन नहीं है। पार्किंग के लिए राज्य सरकारों से जमीन ली गई है। जहां जमीन की उपलब्धता है, वहां पार्किंग की सुविधा विकसित कर दी गई है।
● ट्रेनों के परिचालन का समय जल्दी किया जा सकता है?
ये ट्रेनें 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलानी है। जब ट्रेनें यार्ड में पहुंचती हैं तो उनका बारीकी से निरीक्षण और मेंटिनेंस किया जाता है। अगर परिचालन का समय बढ़ाएंगे तो ट्रेनों के मेंटिनेंस का समय कम हो जाएगा। मांग के अनुरूप ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी को बढ़ाया जा सकता है।
● शुरुआत में योजना बनाई गई थी कि नमो भारत को कार्गों ट्रेनों के रूप में भी परिचालित किया जाएगा। क्या इस दिशा में काम किया जा रहा है?
सभी चीजें मार्केट पर निर्भर होती है। हमारी पहली प्राथमिकता यात्रियों के लिए बेहतर सर्विस देना है। इसके बाद अगर ऑफ पीक आवर्स में ट्रेनों में कुछ जगह बचेगी तो लॉजिस्टिक एजेंसी से जरूर वार्ता करेंगे।
● सोलर एनर्जी को लेकर क्या लक्ष्य तय किए गए हैं?
एनसीआरटीसी का प्रयास है कि पूरे कॉरिडोर पर बिजली की जितनी जरूरत है, उसका 60 फीसदी हिस्सा सोलर एनर्जी से पूरा किया जाए। पहली बार भारत में किसी भी आरआरटीएस में 110 मेगावाट का लैंड आधारित सोलर प्लांट लगाने जा रहे हैं। यह प्लांट उत्तर प्रदेश में लगेगा। इससे सरकार का नवीनीकरण ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाने का उद्देश्य पूरा होगा। आरआरटीएस प्रोजेक्ट संचालन में 33 फीसदी खर्चा बिजली खपत का है।
● दिल्ली-बावल और दिल्ली-करनाल के अगले प्रोजेक्ट पर कब काम शुरू होगा?
अगले प्रोजेक्ट को लेकर उच्चस्तर पर वार्ता चल रही है। मंत्रालय भी प्रयासरत है कि जल्दी से काम हो। सर्वे किया जा रहा है कि कौन सी ऐसी बाधाएं हैं जिन्हें हटाया जाए।
● गाजियाबाद-जेवर कॉरिडोर को लेकर क्या तैयारियां हैं?
गाजियाबाद-जेवर कॉरिडोर की डीपीआर मंत्रालय में सबमिट कर दी गई है। उत्तर प्रदेश सरकार इस पर भी सहमति दे चुकी है।
● सेकेंड फेज में दिल्ली-बड़ौत, गाजियाबाद-हापुड़ समेत कई प्रोजेक्ट प्रस्तावित थे, क्या उन्हें ड्रॉप कर दिया गया है?
नहीं, किसी भी कॉरिडोर को ड्रॉप नहीं किया गया है। एनसीआरपीबी ने जब इन सभी कॉरिडोर पर चर्चा की थी, तब यही बात हुई थी कि कुल आठ कॉरिडोर में से पहले चरण में तीन कॉरिडोर पर काम किया जाएगा। इनमें दिल्ली-मेरठ, दिल्ली-बावल और दिल्ली-करनाल शामिल हैं। फेज-2 में पांच कॉरिडोर थे। अभी फेज-1 का एक कॉरिडोर ही पूरा हुआ है। इसके अलावा फरीदाबाद-नोएडा-गुरुग्राम कॉरिडोर और गाजियाबाद-जेवर कॉरिडोर एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की उस रिपोर्ट में शामिल नहीं थे, लेकिन जनता और राज्य सरकारों की मांग पर इन प्रोजेक्ट को भी फेज-1 में शामिल कर लिया गया है।
● क्या देश के अन्य हिस्सों में भी नमो भारत ट्रेनें चलाई जाएंगी?
मैं आश्वस्त हूं कि अगर इकॉनोमिक सर्वे में यह आ गया है तो ऐसे कॉरिडोर देश के अन्य राज्यों में भी बनेंगे। हाल ही में उत्तराखंड सरकार ने भी पूछा है कि क्या मेरठ कॉरिडोर को उत्तराखंड तक विस्तार दिया जा सकता है, लेकिन अभी ठोस निर्णय नहीं लिए गए हैं।
● मेरठ में एक ही ट्रैक पर नमो भारत और मेट्रो को चलाया गया। इसमें क्या दिक्कतें सामने आईं?
शुरुआत में लगता था कि एक ही ट्रैक पर दोनों ट्रेनें कैसे चलेंगी, लेकिन यह संभव हो पाया है आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम की वजह से। हमारा सिस्टम मॉडर्न है। इससे कम्यूनिकेशन बेहद तेज है।
● अंडरग्राउंड स्टेशनों में मोबाइल कनेक्टिविटी की समस्या है, इसका कारण और समाधान क्या है?
जो एनसीआरटीसी के टेलिकॉम सर्विस प्रोवाइडर हैं, उनकी अपनी कुछ दिक्कतें हैं। वे सर्विस प्रोवाइडर प्रयास कर रहे हैं कि इसका जल्द समाधान किया जाए। यह समस्या सिर्फ नमो भारत कॉरिडोर पर नहीं बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी आ रही है। इसे जल्द ही सुलझा लिया जाएगा।
● क्या मेट्रो की तरह नमो भारत में भी नॉन पीक आवर्स में फ्लेक्सिबल किराया लागू किया जा सकता है?
अभी हमारा सिस्टम बिल्कुल नया है। इस बारे में सोचा तो नहीं है, लेकिन डीएमआरसी ने अगर ऐसा किया है तो उसे देखेंगे।
● दिल्ली-यूपी में पार्किंग शुल्क की दरें अलग-अलग क्यों हैं?
जमीन के रेट कहां पर कितने हैं, ये उस पर निर्भर करता है। अलग-अलग राज्यों में जो जमीन मिलती है, उसकी दरों में फर्क होता है।




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