more than 5000 illegal buildings constructed in gurugram by violation of rules गुरुग्राम में नियम का उल्लंघन कर बना डालीं 5000 से अधिक इमारतें; 3 फीट की गलियों में 7-7 मंजिला मकान, Ncr Hindi News - Hindustan
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गुरुग्राम में नियम का उल्लंघन कर बना डालीं 5000 से अधिक इमारतें; 3 फीट की गलियों में 7-7 मंजिला मकान

गुरुग्राम शहर में भवन निर्माण के नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। भू-माफियाओं और निर्माणकर्ताओं ने प्रशासन की नाक के नीचे पांच हजार से अधिक अवैध इमारतें खड़ी कर दी हैं। हैरानी की बात यह है कि महज तीन-तीन फीट चौड़ी तंग गलियों में छह से सात मंजिला ऊंची इमारतें बना दी गई हैं।  

Mon, 23 March 2026 09:40 AMPraveen Sharma हिन्दुस्तान, गुरुग्राम
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गुरुग्राम में नियम का उल्लंघन कर बना डालीं 5000 से अधिक इमारतें; 3 फीट की गलियों में 7-7 मंजिला मकान

गुरुग्राम शहर में भवन निर्माण के नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। भू-माफियाओं और निर्माणकर्ताओं ने प्रशासन की नाक के नीचे पांच हजार से अधिक अवैध इमारतें खड़ी कर दी हैं। हैरानी की बात यह है कि महज तीन-तीन फीट चौड़ी तंग गलियों में छह से सात मंजिला ऊंची इमारतें बना दी गई हैं। आग लगने की स्थिति में इन इमारतों में बचाव कार्य में मुश्किल आ सकती है।

शहर के पॉश इलाकों से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति सबसे अधिक भयानक है। गांव सिकंदरपुर, चक्करपुर, नाथूपुर, उल्लावास, रामगढ़, और बादशाहपुर सहित दर्जनों गांवों में इस तरह की अवैध इमारतों की बाढ़ आ गई है। इन गांवों की गलियां इतनी तंग हैं कि दो लोगों का एक साथ निकलना भी मुश्किल होता है। ऐसे में यदि किसी इमारत में आग लगने जैसी कोई आपातकालीन घटना हो जाए, तो वहां आग बुझाने वाले भारी वाहन तो दूर, बचाव दल का दुपहिया दस्ता (मोटरसाइकिल) भी प्रवेश नहीं कर सकेगा। इन संकरी और घुमावदार गलियों में बनी छह से सात मंजिला इमारतों में सुरक्षा का कोई भी उपाय मौजूद नहीं है। आपात स्थिति में यहां से लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना पूरी तरह से असंभव है। इन इमारतों में रहने वाले हजारों लोग पूरी तरह से राम भरोसे अपना जीवन जी रहे हैं।

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नहीं हुई कोई कार्रवाई

शहर में इतनी बड़ी संख्या में अवैध इमारतों का निर्माण रातों-रात नहीं हुआ है, लेकिन जिम्मेदार विभागों ने इस पूरी प्रक्रिया के दौरान अपनी आंखें मूंदे रखीं। नगर निगम और दमकल विभाग की तरफ से इन जानलेवा और अवैध इमारतों के खिलाफ आज तक कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। नियमों के अनुसार, बिना अनुमति बनी इन इमारतों को सील करने या गिराने का स्पष्ट प्रावधान है, लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत या घोर लापरवाही के कारण इन्हें खुलेआम पनपने दिया गया। दमकल विभाग ने भी कभी इन तंग गलियों का निरीक्षण कर सुरक्षा मानकों की जांच करने की जहमत नहीं उठाई। प्रशासन की इस खतरनाक चुप्पी के कारण निर्माणकर्ताओं के हौसले बुलंद हैं।

एक साल से निगम का पोर्टल भी ठप

शहर में अवैध निर्माण होने का सबसे मुख्य कारण यह है कि नगर निगम गुरुग्राम में भवनों के जल्दी से नक्शे पास नहीं होते हैं। निगम रिकॉर्ड के अनुसार, सालाना 500 नक्शे ही मुश्किल से पास होते हैं। बीते करीब एक साल से निगम का पोर्टल भी काम नहीं कर रहा। लोगों को सरल पोर्टल से आवेदन करना पड़ रहा है। इस कारण शहर के लोग निगम से भवनों के नक्शे पास कराने के लिए आवेदन तक नहीं कर पा रहे।

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निगम क्षेत्र में ये हैं मकान बनाने के नियम

नगर निगम सीमा के भीतर किसी भी तरह का निर्माण करने से पहले विभाग से भवन का नक्शा स्वीकृत करवाना पूरी तरह अनिवार्य है। मकान की ऊंचाई और मंजिलों की संख्या खाली भूखंड (प्लॉट) के आकार और उसके सामने वाली सड़क की चौड़ाई के आधार पर तय की जाती है। तीन फीट जैसी तंग गलियों में बहुमंजिला इमारत बनाने की सख्त मनाही है। इसके अलावा, भवन निर्माण के दौरान हवा, रोशनी और आग से बचाव के लिए जरूरी सुरक्षा मानकों का पूरा पालन करना होता है।

कागजों तक सीमित इनफोर्समेंट टीमें

नगर निगम ने शहर में अवैध निर्माणों की रोकथाम और उन पर निगरानी रखने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों के अनुसार विशेष इनफोर्समेंट टीमों का गठन किया हुआ है। इनफोर्समेंट टीमों की मुख्य जिम्मेदारी है कि वह अपने क्षेत्र में हो रहे किसी भी अवैध निर्माण को शुरुआत में ही रोकें। लेकिन शहर में खड़ी पांच हजार से अधिक अवैध इमारतें इनफोर्समेंट टीम की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान लगाती हैं और साबित करती हैं कि यह टीम सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं।

प्रदीप दहिया, निगम आयुक्त, गुरुग्राम, ''अवैध निर्माणों की तोड़फोड़ के साथ सील करने की भी कार्रवाई की जाती है। इसमें अगर कहीं लापरवाही बरती जा रही है तो संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।''

गुलशन कालरा,, उपनिदेशक, तकनीकी, दमकल विभाग, गुरुग्राम, ''मिलेनियम सिटी में बिना फायर एनओसी चल रहे सभी संस्थानों, होटलों, अस्पतालों सभी को नोटिस दिए जा रहे हैं। विभाग द्वारा लगातार इन पर कार्रवाई की जा रही है।''

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