kejriwal non appearance in delhi high court ex parte decision supreme court option जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में नहीं पहुंचे अरविंद केजरीवाल तो क्या होगा केस पर असर?, Ncr Hindi News - Hindustan
More

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में नहीं पहुंचे अरविंद केजरीवाल तो क्या होगा केस पर असर?

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य की गैरहाजिरी उन पर भारी पड़ सकती है? क्या हाईकोर्ट एकतरफा फैसला दे सकता है? और ऐसे हालात में उनके पास क्या विकल्प बचता है? जानिए इस मामले में क्या कहते हैं कानून विशेषज्ञ…

Thu, 30 April 2026 12:20 PMRatan Gupta हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
share
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में नहीं पहुंचे अरविंद केजरीवाल तो क्या होगा केस पर असर?

आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के बाद पार्टी नेता दुर्गेश पाठक ने भी दिल्ली उच्च न्यायालय में आबकारी 'घोटाला' मामले की सुनवाई में न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा के सामने पेश होने से इनकार कर दिया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य की गैरहाजिरी उन पर भारी पड़ सकती है? क्या हाईकोर्ट एकतरफा फैसला दे सकता है? और ऐसे हालात में उनके पास क्या विकल्प बचता है? जानिए इस मामले में क्या कहते हैं कानून विशेषज्ञ…

जमानती वारंट के जरिए केजरीवाल की पेशी अनिवार्य हो सकती है

हाईकोर्ट के सीनियर ए़डवोकेट सिद्धार्थ लूथरा ने बताया- केजरीवाल के पेश ना होने पर समन जारी किए जा सकते हैं। इसके बाद जमानती वारंट के जरिए उनकी पेशी को अनिवार्य किया जा सकता है। अगर वह फिर भी पेश न होने का फैसला करते हैं, तो पीठ एक एमिकस या लीगल एड पैनल से किसी वकील को नियुक्त कर सकता है, जो आकर अरविंद केजरीवाल का प्रतिनिधित्व करे।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:केजरीवाल के केस से क्यों नहीं हटीं जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा? जानिए 9 बड़े कारण

सरकारी वकील को खड़ा कर HC द्वारा एकतरफा निर्णय लिया जा सकता

वहीं, एडवोकेट उपेन्द्र सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट में पेश ना होने का निर्णय बहुत गंभीर नहीं है। पीठ इस मामले में समन और जमानती वारंट जारी कर सकती है। पीठ के पास अपनी कई निजी शक्तियां हैं। हालांकि, यह सभी शक्तियां सिर्फ फैसले तक प्रभाव डालेंगी। जैसे कि सरकारी वकील को खड़ा कर केजरीवाल और अन्य आरोपियों का पक्ष सुन निर्णय लिया जा सकता। वहीं, केजरीवाल के पास भी उच्चतम न्यायालय जाने का रास्ता था।

केजरीवाल के पास सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता अभी भी बचा है

उच्चतम न्यायालय जाने वाली बात पर हाईकोर्ट के एडवोकेट प्रशांत मनचंदा ने बताया कि अरविंद केजरीवाल के लिए उच्चतम न्यायालय में उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देना ही सही उपाय होगा। केजरीवाल के उपस्थित न होने पर अवमानना की कोई बात नहीं है। इस मामले में पीठ के समक्ष एक तरफा फैसला देने का अधिकार है। पीठ सीबीआई की दलील सुनने के बाद एक तरफा निर्णय ले सकती है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:जस्टिस शर्मा ने अपने बच्चों के जिक्र पर केजरीवाल को फटकारा, जानिए क्या कहा?

केजरीवाल सुनवाई में शामिल न होने के पीछे क्या तर्क दे रहे हैं

केजरीवाल ने न्यायमूर्ति शर्मा पर हितों के टकराव का आरोप लगाते हुए घोषणा की है कि वह आबकारी मामले की सुनवाई में व्यक्तिगत स्तर पर या किसी वकील के माध्यम से हिस्सा नहीं लेंगे। पाठक, सिसोदिया और केजरीवाल केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से दायर उस पुनर्विचार याचिका में पक्षकार हैं, जिसमें आबकारी नीति मामले में उन्हें आरोपमुक्त किए जाने के फैसले को चुनौती गई है।

केजरीवाल ने न्याय न मिलने की तरफ किया इशारा

इसके बाद केजरीवाल ने चार पन्नों के एक पत्र में ''न्याय नहीं मिलने'' की ओर इशारा करते हुए कहा कि इस मामले को लेकर उनकी ''गंभीर'' चिंताएं हैं। उन्होंने कहा, "अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनते हुए, गांधी जी के सिद्धांतो को मानते हुए और सत्याग्रह की भावना के साथ, मैंने फ़ैसला किया है कि मैं इस मामले में उनके सामने पेश नहीं होऊंगा और कोई दलील भी नहीं रखूंगा।"

लेटेस्ट Hindi News , Delhi News , Ghaziabad News , Noida News , Gurgaon News और Faridabad News सहित पूरी NCR News पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।