‘एक-दो दिन से कोई फर्क नही… केजरीवाल-सिसोदिया को नए नोटिस भेजो’; CBI से बोला दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस मनोज जैन की बेंच ने आज से शराब नीति केस की सुनवाई कर दी है। हालांकि, अरविंद केजरीवाल और 'आप' नेताओं की तरफ से आज भी कोई कोर्ट में पेश नहीं हुआ। इस पर बेंच ने CBI को इन्हें केस ट्रांसफर होने की जानकारी देने को कहा है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने आज आम आदमी पार्टी (AAP) मुखिया अरविंद केजरीवाल और अन्य नेताओं मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक को CBI की याचिका के संबंध में नए नोटिस जारी करने का आदेश किया है। सीबीआई ने शराब नीति केस में निचली अदालत द्वारा आरोपियों को आरोपमुक्त किए जाने को चुनौती दी है। इस केस को पिछले सप्ताह दूसरी बेंच को ट्रांसफर कर दिया गया था। इस मामले की अगली सुनवाई 25 मई को तय की गई है।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस मनोज जैन ने आज सुनवाई के दौरान इस बात पर गौर किया कि तीन प्रतिवादी केजरीवाल, सिसोदिया और पाठक आज भी कोर्ट में पेश नहीं हुए थे। कोर्ट को बताया गया कि तीनों प्रतिवादी पिछली तारीखों पर भी कोर्ट में पेश नहीं हुए थे।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के सामने पेश नहीं हो रहे थे 'आप' नेता
जस्टिस जैन ने इस पर CBI से कहा है कि वह अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक को शराब नीति केस के उनके पास ट्रांसफर होने की जानकारी दे। अब अगर वे पेश होना चाहते हैं, तो हो सकते हैं।
केजरीवाल, सिसोदिया और पाठक जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के सामने चल रही सुनवाई का बहिष्कार कर रहे थे।
बेंच ने कहा, “हम समझते हैं कि यह केस ट्रांसफर होकर आया है। यह केस पहले से ही अखबारों की सुर्खियों में है, इसलिए हम मानकर चलते हैं कि उन्हें पता है कि केस ट्रांसफर हो गया है। लेकिन फिर भी, हम उन्हें एक नया नोटिस भेजेंगे। एक-दो दिन आगे-पीछे होने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा, और जब वे यहां आ जाएंगे, तभी हमें पता चल पाएगा कि वे मौजूदा आवंटन से संतुष्ट हैं या नहीं। सबसे अच्छी स्थिति तो यही होगी कि सभी लोग यहां मौजूद हों और सभी की बात सुनी जाए।”
25 मई को होगी अगली सुनवाई
कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादी सुनवाई की अगली तारीख से पहले कोई भी जवाब दाखिल कर सकते हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया कि जिन प्रतिवादियों की ओर से कोई वकील पेश नहीं हो रहा है, उन्हें नोटिस तामील कराया जाए। मामले की अगली सुनवाई 25 मई को तय की गई है।
सॉलिसिटर जनरल मेहता ने सुनवाई के दौरान कहा कि CBI की याचिका पर नोटिस 9 मार्च को जारी किया गया था और सभी को तामील कराया गया था।
उन्होंने कहा, “उन्हें इस बात की जानकारी है। इसके बाद कई आदेश पारित किए गए। अभी मैं मामले के गुण-दोष पर नहीं जा रहा हूं। यह एक ऐसा मामला है जहां गंभीर आरोपों के कारण चार्जशीट दायर की गई थी। प्रतिवादियों ने डिस्चार्ज के लिए आवेदन दायर किए... आरोप तय करते समय, सभी ने डिस्चार्ज की गुहार लगाई थी, कोई विशिष्ट आवेदन नहीं था। डिस्चार्ज का आदेश कानून की कसौटी पर खरा नहीं उतर सकता।”
उन्होंने दलील दी कि यह मामला दिल्ली में हुए एक ‘घोटाले’ से जुड़ा है और इस पर जल्द से जल्द फैसला होना चाहिए।
एक प्रतिवादी के वकील का क्या तर्क
इस बीच, प्रतिवादियों में से एक की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट शदान फरासात ने कहा कि सीबीआई की याचिका की स्वीकार्यता के खिलाफ कुछ आवेदन हैं, जिन पर पहले फैसला किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मेरा तर्क यह है कि जिन वकीलों ने पुनर्विचार याचिका दायर की है, वे एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर या अन्य सरकारी वकील नहीं हैं। वो निजी वकील हैं। मैं अपने आवेदन पर बहस करूंगा।
कोर्ट ने इस स्टेज पर यह नोट किया कि इस मामले में कुछ प्रतिवादियों की तरफ से अभी तक जवाब दाखिल नहीं किए गए हैं। इस बीच SG मेहता ने कहा कि वह इस बात पर जोर दे रहे थे कि प्रतिवादी अपने जवाब दाखिल करें, लेकिन कई आदेशों के बावजूद, जिनमें उन्हें आखिरी मौका दिया गया था, चार प्रतिवादियों ने जवाब दाखिल नहीं किया है।
कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि मामले की सुनवाई की वैधता के खिलाफ दायर आवेदनों पर कोई असर डाले बिना, जवाब दाखिल किए जाने चाहिए। यह घटनाक्रम तब सामने आया जब जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा, जो पहले इस मामले की सुनवाई कर रही थीं, उन्होंने इसे दूसरी बेंच को ट्रांसफर कर दिया।




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