Arvind Kejriwal and Other AAP Leaders Troubles Over Justice Swarana Kanta Sharma Contempt Case what High Court says जज स्वर्ण कांता शर्मा के 'अपमान' पर केजरीवाल संग संजय सिंह की भी मुश्किलें, HC में क्या हुआ, Ncr Hindi News - Hindustan
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जज स्वर्ण कांता शर्मा के 'अपमान' पर केजरीवाल संग संजय सिंह की भी मुश्किलें, HC में क्या हुआ

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के ‘अपमान’ मामले में केजरीवाल और अन्य आप नेताओं की मुश्किल बढ़ने वाली हैं। आज हाई कोर्ट की डबल बेंच ने मामले में एमिकस क्यूरी की नियुक्ति समेत आरोपियों से 4 हफ्ते में जवाब मांगा है।

Wed, 20 May 2026 08:36 AMGaurav Kala लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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जज स्वर्ण कांता शर्मा के 'अपमान' पर केजरीवाल संग संजय सिंह की भी मुश्किलें, HC में क्या हुआ

दिल्ली हाई कोर्ट की डबल बेंच ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह समेत अन्य नेताओं को अदालत की स्वत: संज्ञान अवमानना याचिका में नोटिस जारी किया। इन नेताओं पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ कथित तौर पर “मानहानिकारक और अपमानजनक” टिप्पणियां करने का आरोप है।

जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की पीठ ने कहा कि यह कार्यवाही 14 मई के उस आदेश के आधार पर शुरू की गई है, जिसमें जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत ने माना कि सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इन्होंने अदालत का अपमान किया। कोर्ट ने कहा कि जस्टिस शर्मा की एकल पीठ ने सोशल मीडिया पोस्ट, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और प्रकाशित सामग्री का संज्ञान लिया है। साथ ही रजिस्ट्री को निर्देश दिए गए हैं कि इन सभी रिकॉर्ड की प्रतियां सुरक्षित रखी जाएं और अदालत के समक्ष पेश की जाएं।

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एमिकस क्यूरी की नियुक्ति होगी

बार एंड बेंच में छपी खबर के मुताबिक, पीठ ने कथित अवमाननाकर्ताओं को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी कहा कि मामले में उसकी सहायता के लिए एक एमिकस क्यूरी नियुक्त किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई अब 4 अगस्त को होगी। इस दौरान अदालत में आरोपियों की ओर से कोई वकील पेश नहीं हुआ।

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केजरीवाल और अन्य आप नेताओं का जस्टिस शर्मा की अदालत का बहिष्कार

दरअसल, इससे पहले अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से खुद को आबकारी नीति मामले की सुनवाई से अलग करने की मांग की थी। हालांकि, जस्टिस शर्मा ने 20 अप्रैल को उनकी किसी और बेंच में केस ट्रांसफर करने की मांग खारिज कर दी थी। अपने आदेश में जस्टिस शर्मा ने कहा था कि किसी राजनेता को न्यायपालिका के खिलाफ अविश्वास का माहौल बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने यह भी कहा था कि जज को मामले से हटाने की मांग न्यायपालिका को कटघरे में खड़ा करने जैसी है।

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हाई कोर्ट ने आज क्या कहा

कोर्ट के अनुसार, जस्टिस शर्मा के आदेश से पहले और बाद में सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ कई पोस्ट डाली गईं, जिसके बाद उन्होंने अवमानना कार्यवाही शुरू करने का फैसला लिया। अपने विस्तृत आदेश में जस्टिस शर्मा ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक द्वारा लिखे गए उन पत्रों का भी जिक्र किया, जिनमें उन्होंने अदालत की कार्यवाही के बहिष्कार की बात कही थी। साथ ही केजरीवाल द्वारा जारी उस वीडियो का भी उल्लेख किया गया, जिसमें उन्होंने जस्टिस शर्मा की अदालत में पेश न होने के कारण बताए थे।

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