Kejriwal and Sisodia discharged or acquitted in delhi liquor scam case, know difference between two शराब घोटाला केस में केजरीवाल और सिसोदिया बरी हुए या आरोपमुक्त, जानें दोनों में क्या अंतर, Ncr Hindi News - Hindustan
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शराब घोटाला केस में केजरीवाल और सिसोदिया बरी हुए या आरोपमुक्त, जानें दोनों में क्या अंतर

दिल्ली की कथित आबकारी नीति घोटाले का केस अदालत में ढह गया। राउज एवेन्यू कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को अदालत ने आरोपमुक्त कर दिया है। हालांकि कोर्ट के फैसले के बाद लोगों के मन में आरोपियों को आरोपमुक्त होने और बरी किए जाने के विषय में कन्फ्यूजन है।

Sat, 28 Feb 2026 06:45 AMPraveen Sharma हिन्दुस्तान, नई दिल्ली, हेमलता कौशिक
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शराब घोटाला केस में केजरीवाल और सिसोदिया बरी हुए या आरोपमुक्त, जानें दोनों में क्या अंतर

दिल्ली की कथित आबकारी नीति घोटाले का केस अदालत में ढह गया। राउज एवेन्यू कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को अदालत ने आरोपमुक्त कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा, मामला ठोस सबूतों पर नहीं, अनुमान और अटकलों पर टिका था। अब सवाल यह है कि अगर सबूत पुख्ता नहीं थे तो गिरफ्तारी ही क्यों हुई? अदालत की सख्त टिप्पणियों ने सिर्फ एक केस खत्म नहीं किया, बल्कि जांच की पूरी प्रक्रिया पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। हालांकि कोर्ट के फैसले के बाद लोगों के मन में आरोपियों को आरोपमुक्त होने और बरी किए जाने के विषय में कन्फ्यूजन है।

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आरोपमुक्त और बरी होने में अंतर

आरोपमुक्त होना वह प्रक्रिया है जब दर्ज एफआईआर की जांच के बाद दायर आरोपपत्र पर अदालत अभियोजन व बचाव पक्ष इस तथ्य पर बहस करते हैं कि यह मामला मुकदमा चलाने लायक है या नहीं। यदि प्राथमिक स्तर पर ही अदालत मान लेती है कि इस मामले में जांच एजेंसी के पास मुकदमा चलाने लायक साक्ष्य व गवाह नहीं है तो आरोपियों को मुकदमा चलने से पहले ही आरोपमुक्त कर दिया जाता है। जबकि बरी होने की प्रक्रिया मुकदमे का अंतिम चरण होता है। आरोप तय होने के बाद जांच एजेंसी अदालत के समक्ष गवाहों के बयान दर्ज कराती है और मुकदमे से संबंधित दस्तावेज पेश करती है। यदि गवाहों व साक्ष्यों से अपराध साबित होता है तो आरोपी को दोषी करार दिया जाता है अन्यथा उसे संबंधित मामले में बरी कर दिया जाता है।

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इन सभी 23 लोगों को मिली राहत

● कुलदीप सिंह

● नरेंद्र सिंह

● विजय नायर

● अभिषेक बोइनपल्ली

● अरुण रामचंद्र पिल्लई

● मूथा गौतम

● समीर महेंद्रू

● मनीष सिसोदिया

● अमनदीप सिंह ढल्ल

● अर्जुन पांडेय

● बुच्चिबाबू गोरंटला

● राजेश जोशी

● दामोदर प्रसाद शर्मा

● प्रिंस कुमार

● अरविंद कुमार सिंह

● चनप्रीत सिंह रायट

● कविता कल्वकुंतला (के. कविता)

● अरविंद केजरीवाल

● दुर्गेश पाठक

● अमित अरोड़ा

● विनोद चौहान

● आशीष चंद माथुर

● शरथ चंद्र रेड्डी

सिसोदिया 530, केजरीवाल 156 दिन जेल में रहे

कथित शराब घोटाला केस में सीबीआई ने दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को 26 फरवरी, 2023 को गिरफ्तार किया। बाद में ईडी ने 9 मार्च 2023 को हिरासत में लिया। सिसोदिया लगभग 530 दिनों तक जेल में रहे। वहीं, दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल को 26 जून, 2024 को सीबीआई ने औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया था, जब वह पहले से ही ईडी की हिरासत में थे। वह कुल लगभग 156 दिन जेल में रहे। केजरीवाल 13 सितंबर 2024 को हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद रिहा हुए।

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नई शराब नीति क्या थी?

17 नवंबर 2021 को नीति लागू की। 32 जोन बनाए गए और हर जोन में ज्यादा से ज्यादा 27 दुकानें खुलनी थीं। दुकानों को प्राइवेट कर दिया गया। इसके पहले 60 प्रतिशत दुकानें सरकारी और 40 प्रतिशत प्राइवेट थीं। सरकार ने तर्क दिया था कि इससे 3,500 करोड़ रुपये का फायदा होगा। सरकार ने लाइसेंस की फीस भी कई गुना बढ़ा दी। जिस लाइसेंस के लिए पहले 25 लाख देना पड़ता था, नई नीति में पांच करोड़ रुपये चुकाने पड़े।

आरोप क्यों लगे?

नीति से जनता और सरकार दोनों को नुकसान होने का आरोप लगे। आरोप था कि सरकार ने जानबूझकर बड़े शराब कारोबारियों को फायदा पहुंचाने के लिए लाइसेंस शुल्क बढ़ाया था। इससे छोटे ठेकेदारों की दुकानें बंद हो गईं और बाजार में केवल बड़े शराब माफिया को लाइसेंस मिला।

राजस्व में कमी होने का आरोप

आरोप शराब की बिक्री को लेकर भी था। एक बोतल पर रिटेल कारोबारी को 33.35 रुपये का मुनाफा होता था, जबकि 223.89 रुपये उत्पाद कर और 106 रुपये वैट के रूप में सरकार को मिलता था। एक बोतल पर सरकार को 329.89 रुपये का फायदा मिलता था। नई नीति से इसी मुनाफे में खेल होने दावा किया गया। रिटेल का मुनाफा 33.35 रुपये से बढ़कर सीधे 363.27 रुपये पहुंच गया। सरकार को मिलने वाला फायदा घट गया।

बताया फायदे का सौदा था?

तब की केजरीवाल सरकार का तर्क था कि लाइसेंस फीस बढ़ाने से दिल्ली सरकार को एकमुश्त राजस्व की कमाई हुई। इससे सरकार ने जो उत्पाद शुल्क और वैट घटाया उसकी भरपाई हो गई। इससे राजस्व बढ़ा।

जांच कैसे शुरू हुई?

इस शराब नीति के कार्यान्वयन में कथित अनियमितता की शिकायतें आईं, जिसके बाद उपराज्यपाल ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। इसके साथ ही दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 सवालों के घेरे में आ गई।

कब-क्या हुआ

17 नवंबर 2021 : दिल्ली सरकार ने नई आबकारी नीति लागू की।

8 जुलाई 2022 : मुख्य सचिव ने आबकारी नीति में उल्लंघन की रिपोर्ट दी।

22 जुलाई 2022 : उपराज्यपाल ने नियमों के उल्लंघन की सीबीआई जांच की सिफारिश की।

19 अगस्त 2022 : सीबीआई ने तत्कालीन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत तीन के घर पर छापे मारे।

22 अगस्त 2022 : प्रवर्तन निदेशालय ने आबकारी नीति पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया।

सितंबर 2022 : आम आदमी पार्टी के संचार प्रमुख विजय नायर को सीबीआई ने गिरफ्तार किया।

मार्च 2023 : ईडी ने आप नेता मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया।

अक्टूबर 2023 : आप नेता संजय सिंह को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया।

अक्टूबर 2023 : ईडी ने अरविंद केजरीवाल को पहला समन भेजा।

16 मार्च 2024 : भारत राष्ट्र समिति की नेता के कविता को ईडी ने गिरफ्तार किया।

21 मार्च 2024 : केजरीवाल नौवीं बार ईडी के समन में शामिल नहीं हुए। ईडी ने उन्हें गिरफ्तार किया।

10 मई 2024 : सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को अंतरिम जमानत दी। फिर उन्होंने लोकसभा चुनाव में प्रचार किया।

2 जून 2024 : आदेश के अनुसार केजरीवाल ने तिहाड़ में सरेंडर किया।

20 जून 2024 : अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में केजरीवाल को नियमित जमानत दी।

26 जून 2024 : केजरीवाल को सीबीआई ने गिरफ्तार किया।

22 जनवरी 2026 : दिल्ली की अदालत ने उन्हें ईडी के दो मामलों में बरी कर दिया।

27 फरवरी 2026 : दिल्ली की अदालत ने केजरीवाल को क्लीन चिट दे दी।

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