कुत्तों को सड़कों से हटाना अमानवीय और क्रूर, शेल्टर होम में रखना प्रैक्टिकल नहीं- PETA
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर, पेटा इंडिया एडवोकेसी एसोसिएट, शौर्य अग्रवाल ने बयान दिया है। उन्होंने कहा, यह आदेश अव्यावहारिक है, इसमें लॉजिक नहीं है। इसके अलावा उन्होंने पशु जन्म नियंत्रण नियमों के हिसाब से इसे अवैध भी बताया है।

दिल्ली-एनसीआर के सभी आवारा कुत्तों को 8 हफ़्तों के भीतर शेल्टर घरों में भेजने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर, पेटा इंडिया एडवोकेसी एसोसिएट, शौर्य अग्रवाल ने बयान दिया है। उन्होंने कहा, यह आदेश अव्यावहारिक है, इसमें लॉजिक नहीं है। इसके अलावा उन्होंने पशु जन्म नियंत्रण नियमों के हिसाब से इसे अवैध भी बताया है।
कुत्तों को शेल्टर घरों में रखना प्रैक्टिकल नहीं
शौर्य अग्रवाल ने बताया कि दिल्ली सरकार के पास इन नसबंदी कार्यक्रमों और एबीसी नियमों को लागू करने के लिए 24 साल का समय था। दिल्ली में 10 लाख कुत्ते हैं और उनमें से केवल आधे की ही नसबंदी की गई है। इन कुत्तों को शेल्टर घरों में रखना प्रैक्टिकल नहीं है। यह बहुत मुश्किल है। इससे सिर्फ अराजकता और समस्याएँ पैदा होंगी।
कुत्तों को हटाना अमानवीय और क्रूरता
कुत्तों को हटाना अमानवीय है। उन्होंने इसे अपने आप में क्रूरता बताया है। शौर्य के मुताबिक जब कुत्तों को शेल्टर घरों में रखा जाएगा, तो वहां की स्थिति भी काफी खराब होने वाली है। हम अपने सभी कानूनी रास्ते तलाश रहे हैं। हम पहले भी दिल्ली सरकार से मिले हैं और उनसे एबीसी नियमों और शहर में नसबंदी कार्यक्रमों को ठीक से लागू करने का आग्रह किया है।
शेल्टर होम और कुत्तों के लिए क्या निर्देश?
आपको बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को जल्द से जल्द सड़कों से उठाकर शेल्टर घरों में रखने का आदेश दिया है। इसके पीछे की वजह आवारा कुत्तों के काटने से, विशेष रूप से बच्चों में होने वाली रेबीज की समस्या के कारण पैदा हुई अत्यंत गंभीर स्थिति है।
देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा कि समय के साथ कुत्तों के लिए शेल्टर घरों की संख्या बढ़ानी होगी। अदालत ने दिल्ली के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे छह से आठ सप्ताह के भीतर लगभग 5000 कुत्तों के लिए शेल्टर होम बनाएं।




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