जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने केजरीवाल को दिया बड़ा झटका, पहले खूब सुनाया फिर कहा- नहीं हटूंगी
अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से अपील की थी कि वह कथित शराब घोटाले से जुड़े केस से खुद को अलग कर लें। केजरीवाल समेत 23 को कथित शराब घोटाले में आरोपमुक्त किए जाने के फैसले को सीबीआई ने हाई कोर्ट में चुनौती दी है।

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल को हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य की याचिका को खारिज करते हुए साफ किया है कि कथित शराब घोटाले से जुड़े केस की सुनवाई वह जारी रखेंगी। केजरीवाल और अन्य ने उनसे उस केस से खुद को अलग करने की मांग की थी जिसमें सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल समेत 23 को आरोपमुक्त कर दिया था।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा, ‘मैं सुनवाई से हटने संबंधी याचिकाओं से प्रभावित हुए बिना केजरीवाल और अन्य लोगों की रिहाई के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर फैसला करूंगी।’ जज ने कहा कि आसान तरीका यह होता कि याचिका पर फैसला लिए बिना ही हट जातीं, लेकिन उन्होंने मामले पर फैसला करने का फैसला किया, क्योंकि इसमें इंस्टीट्यूशन का बड़ा सवाल शामिल था। न्यायमूर्ति ने कहा कि बहस के दौरान लिए गए उलटे-सीधे स्टैंड की वजह से काम और मुश्किल हो गया था, जबकि यह कहा गया था कि जज की ईमानदारी पर कोई शक नहीं है, फिर भी किसी असली भेदभाव के बजाय भेदभाव की कथित आशंका के आधार पर मामला ट्रांसफर करने का आग्रह किया गया। जज ने आगे कहा कि ऐसी दलील असल में न्यायिक संस्था को ही जांच के दायरे में लाती है।
केजरीवाल के आरोपों पर चुन-चुनकर दिया जवाब
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने अरविंद केजरीवाल की ओर से लगाए गए सभी आरोपों, सवालों और शंकाओं का बारी-बारी से जवाब दिया। अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रम में शामिल होने, गृहमंत्री अमित शाह की ओर से दिए गए बयान और बच्चों को लेकर लगाए गए हितों के टकराव के आरोपों पर जस्टिस शर्मा ने विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने बताया कि किस तरह केजरीवाल ने बिना सबूतों और तथ्यों के सिर्फ आशंकाएं जाहिर कीं और न्यायपालिका पर सवाल उठाए।
जस्टिस शर्मा ने कहा किन्यायालय ने किसी भी दबाव से प्रभावित हुए बिना इस मामले का निर्णय किया है। उन्होंने कहा, 'अगर मैं बिना आवेदन को सुने ही अपनी ड्यूटी सरेंडर कर देती तो यह रास्ता आसान होता क्योंकि कोई मुझे या मेरी फैमिली को कुछ नहीं कहता। लेकिन इंस्टीट्यूशन के फायदे में नहीं है कि मैं बिना निर्णय किए ड्यूटी सरेंडर कर देती।' उन्होंने कहा, 'यह न्यायालय जानता है कि न्यायाधीश का पद संयम और मौन की मांग करता है, लेकिन मौन से स्वयं संस्था को क्षति नहीं पहुंचनी चाहिए। प्रत्येक आरोप न्यायपालिका की सामूहिक संस्था पर प्रश्नचिह्न लगाता है।'
जज ने कहा- केजरीवाल के आरोपों में सबूत नहीं
शर्मा ने केजरीवाल के आरोपों में सबूतों के अभाव बताते हुए कहा, 'स्वयं को मामले से अलग रखने की मांग वाली फाइल सबूतों के साथ नहीं, बल्कि मेरी निष्पक्षता और तटस्थता पर लगाए गए आरोपों और संदेहों के साथ प्रस्तुत की गई है।' अदालत ने कहा, 'जब वादी मुझे जज करेगा और जब मैं उसे जज करूंगी, उसके अलग मानक नहीं हो सकते हैं। कोई वादी बिना सबूत के जज को भी जज नहीं कर सकता।'
क्या अब वादी की परीक्षा से गुजरना होगा?
जस्टिस ने अपने करियर का हवाला देते हुए पूछा कि क्या अब वादी की परीक्षा से भी गुजरना होगा? उन्होंने कहा, 'मेरे जज बनने और हाई कोर्ट में न्यायाधीश बनने से पहले हर तरह की परीक्षा पास की है। मेरा करियर 30 वर्षों से अधिक का है, जिसमें मुझे कानूनी और नैतिक दोनों ही दृष्टियों से परखा गया है। लेकिन क्या अब न्यायाधीशों को वादी की ओर से निर्धारित अतिरिक्त परीक्षाओं से भी गुजरना पड़ सकता है?
केजरीवाल ने खूब की कोशिश
इससे पहले अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को लेटर लिखकर मांग की थी कि इस केस को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से लेकर किसी और बेंच को ट्रांसफर कर दिया जाए। चीफ जस्टिस ने इस मांग को खारिज कर दिया तो केजरीवाल ने एक तरफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो दूसरी तरफ हाई कोर्ट में याचिका दायर करके जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से अपील की कि वह खुद को इस मामले से अलग कर लें।
कथित शराब घोटाले में ट्रायल कोर्ट ने 27 फरवरी को पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उनके डिप्टी रहे मनीष सिसोदिया, पार्टी नेता विजय नायर समेत सभी 23 लोगों को आरोप मुक्त कर दिया और केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई को जमकर फटकार लगाई। सीबीआई पर कई तीखी टिप्पणियां करते हुए अदालत ने जांच अधिकारी के खिलाफ ही जांच का आदेश दे दिया था। सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी, जहां यह मुद्दा जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच के सामने सूचीबद्ध हुआ। पहली सुनवाई में जस्टिस शर्मा ने सीबीआई को आंशिक राहत देते हुए टिप्पणियों पर रोक लगा दी थी।
अरविंद केजरीवाल ने जज पर क्या लगाए आरोप?
कथित शराब घोटाले में कई महीने जेल में बिता चुके अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को लेकर कई सवाल खड़े करते हुए कहा कि उन्हें उनसे न्याय की उम्मीद नहीं है। जस्टिस शर्मा पर आरएसएस से जुड़े संगठन के आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने का आरोप लगाया तो यह भी दावा किया कि जस्टिस के बच्चे केंद्र सरकार के वकीलों के पैनल में हैं और इसलिए यह हितों के टकराव का मामला बनता है। केजरीवाल ने कई दलीलों के साथ जस्टिस से मांग की कि वह खुद को मामले से अलग कर लें।
जज के सामने तीन बार पेशी, एक दिन तो एक घंटे से ज्यादा बहस
अपनी मांग को लेकर केजरीवाल तीन बार जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में पेश हुए। उन्होंने अपने केस की खुद पैरवी की और एक मंझे हुए वकील की तरह अपनी दलीलें रखते नजर आए। पहली सुनवाई के दौरान तो उन्होंने लगातार एक घंटे से अधिक समय तक जिरह की। बाद में खुद जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने उनकी तारीफ करते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अच्छे वकील भी बन सकते हैं। हालांकि, केजरीवाल ने कहा कि वह जो कर रहे हैं उसमें खुश हैं।




साइन इन