JEIH condemned the US-Israel attack on Iran, told- what should India do जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने की ईरान पर US-इजराइल हमले की निंदा, बताया- भारत को क्या करना चाहिए?, Ncr Hindi News - Hindustan
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जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने की ईरान पर US-इजराइल हमले की निंदा, बताया- भारत को क्या करना चाहिए?

मुस्लिम देशों से भी अपील करते हुए उन्होंने कहा कि वे इस संकट को बड़े टकराव में बदलने से रोकने के लिए एकता, समझदारी और जिम्मेदारी से काम करें। उन्होंने कहा कि इस इलाके में हमेशा रहने वाली शांति सैन्य दबाव के बजाय इंसाफ, आपसी सम्मान और ईमानदार कूटनीतिक प्रयासों से ही आएगी।

Sun, 1 March 2026 01:38 AMSourabh Jain लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने की ईरान पर US-इजराइल हमले की निंदा, बताया- भारत को क्या करना चाहिए?

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने ईरान पर अमेरिका और इजराइल के संयुक्त सैन्य हमले की कड़ी निंदा की है और इसे एक गंभीर और खतरनाक पहल बताया है। उन्होंने कहा है कि इससे पूरे पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता को खतरा पैदा हो गया है। मीडिया को जारी एक बयान में जमाअत के अध्यक्ष ने ईरानी क्षेत्र पर अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त सैन्य हमले को उसकी सम्प्रभुता का गंभीर उल्लंघन बताया और इसे एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध के लिए लापरवाह कदम माना। उन्होंने कहा कि इस स्थिति में भारत को स्वतंत्र एवं सैद्धांतिक स्टैंड अपनाना चाहिए। वहीं मुस्लिम राष्ट्रों को इसे बड़े टकराव में बदलने से रोकने के लिए कोशिशें करना चाहिए।

आगे उन्होंने कहा, 'ऐसे समय में जब क्षेत्र पहले से ही बहुत ज़्यादा अस्थिरता और इंसानी मुश्किलों से गुजर रहा है, ऐसे में इस जोखिम भरे सैन्य कदम से सिर्फ़ तनाव बढ़ेगा और आम लोगों की तकलीफ भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि न्यूक्लियर प्रोग्राम या सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं पर झगड़े, मिसाइलों और जंगी जहाजों की बजाय बातचीत और कूटनीति से हल होने चाहिए। उन्होंने कहा कि हमले का रास्ता अंतरराष्ट्रीय कानून को कमजोर करता है और शांति बनाए रखने के लिए जिम्मेदार ग्लोबल संस्थाओं की अथॉरिटी को कमजोर करता है।

‘कार्रवाई से बड़े पैमाने पर संघर्ष भड़कने का खतरा’

सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने कहा कि इस इलाके में इजराइल की बार-बार की सैन्य कार्रवाई, जो अब ईरान पर सीधे हमले तक बढ़ गई है, टकराव के एक ऐसे पैटर्न को प्रदर्शित करती है जो पश्चिम एशिया को अस्थिर करता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने बातचीत को बढ़ावा देने के बजाय सैन्य कार्रवाई का समर्थन करना चुना, जिससे बड़े पैमाने पर संघर्ष भड़कने का खतरा है और इसके अप्रत्याशित नतीजे भी निकलेंगे। उन्होंने तेहरान और दूसरे इलाकों में धमाकों, आम लोगों की जिंदगी में रुकावटों और बदले की कार्रवाई की संभावना पर गहरी चिंता जताई, जिससे कई देशों में लाखों लोगों को खतरा हो सकता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस इलाके में युद्धों की वजह से पहले भी बड़े पैमाने पर आम लोगों की मौत हुई है, लोग बेघर हुए हैं, आर्थिक दिक्कतें आई हैं और लंबे समय तक अस्थिरता रही है।

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी।

बताया भारत को कौन सा रुख अपनाना चाहिए?

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील करते हुए कहा कि वे सभी पक्षों पर तुरंत तनाव कम करने और आपसी तालमेल बनाने के लिए दबाव डालें। साथ ही कहा कि भारत को स्वतंत्र एवं सैद्धांतिक स्टैंड अपनाना चाहिए, जो गुटनिरपेक्षता, सम्प्रभुता और विवादों को शांति से सुलझाने के अपने पुराने प्रतिबद्धता पर आधारित हो। उन्होंने भारत सरकार से सभी वैश्विक मंच पर संयम, सीजफायर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान के लिए आवाज उठाने को कहा।

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मुस्लिम देशों को दी इस बात की सलाह

वहीं मुस्लिम देशों से भी अपील करते हुए उन्होंने कहा कि वे इस संकट को बड़े टकराव में बदलने से रोकने के लिए एकता, समझदारी और जिम्मेदारी से काम करें। जंग, कब्जे और नाइंसाफी के खिलाफ जमाअत-ए-इस्लामी हिंद की अपरिवर्तनीय स्थिति को दोहराते हुए, उन्होंने कहा कि इस इलाके में हमेशा रहने वाली शांति सैन्य दबाव के बजाय इंसाफ, आपसी सम्मान और ईमानदार कूटनीतिक प्रयासों से ही आएगी।

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