रेप केस में आठ दिन में बदली जांच की कहानी, कोर्ट ने पुलिस से तलब की रिपोर्ट
दिल्ली के रोहिणी जिला कोर्ट ने एक दुष्कर्म (पॉक्सो) से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की दो अलग-अलग रिपोर्टों में सामने आए विरोधाभास पर सख्त रुख अपनाया है।

दिल्ली के रोहिणी जिला कोर्ट ने एक दुष्कर्म (पॉक्सो) से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की दो अलग-अलग रिपोर्टों में सामने आए विरोधाभास पर सख्त रुख अपनाया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) रजनी रंगा की अदालत ने जांच की स्थिति को लेकर स्पष्टता न होने पर दिल्ली पुलिस आयुक्त से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
यह मामला मंगोलपुरी थाने में 13 अगस्त 2025 में दर्ज मुकदमे से जुड़ा है। पीड़िता की पैरवी कर रहीं अधिवक्ता अदिति सिंह ने बताया कि मामले की जांच की स्थिति को लेकर बीती 19 फरवरी को बाहरी जिले के अतिरिक्त डीसीपी-II की ओर से अदालत में प्रस्तुत रिपोर्ट में कहा गया था कि जांच पूरी हो चुकी है और अभियोजन पक्ष की आपत्तियों का निस्तारण कर अंतिम रिपोर्ट शीघ्र दाखिल कर दी जाएगी।
8 दिन में बदल दी कहानी
रिपोर्ट में यह संकेत दिया गया था कि आरोपपत्र दाखिल करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। हालांकि, महज आठ दिन बाद 27 फरवरी को सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से एक नई स्थिति रिपोर्ट पेश की गई, जिस पर संयुक्त पुलिस आयुक्त के हस्ताक्षर थे। इस रिपोर्ट में पूर्व दावे से उलट कहा गया कि जांच अभी लंबित है। पीड़िता की नानी के बयान दर्ज किए जाने हैं, चिकित्सा दस्तावेजों पर एक्सपर्ट्स राय लेनी है और स्वतंत्र गवाहों की तलाश जारी है।
अदालत ने इस विरोधाभास पर सख्ती दिखाते हुए पूछा कि जब 19 फरवरी को जांच पूरी होने का दावा किया गया था, तो आठ दिन बाद उसे अधूरा कैसे बताया जा सकता है। अदालत ने कहा कि इस प्रकार के विरोधाभासी रुख से जांच की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगता है और इससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि कानून के प्रावधानों के तहत निर्धारित अवधि में जांच रिपोर्ट दाखिल की जानी चाहिए, जबकि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज हुए छह महीने से अधिक समय बीत चुका है और जांच को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। बचाव पक्ष की ओर से जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई। मामले की अगली सुनवाई 13 मार्च को निर्धारित की गई है।




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