Insurance claim must be approved for murder while robbery, Delhi High Court order लूट के इरादे से हुई हत्या पर भी देनी होगी बीमा की रकम; दिल्ली हाईकोर्ट से इंश्योरेंस कंपनी को झटका, Ncr Hindi News - Hindustan
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लूट के इरादे से हुई हत्या पर भी देनी होगी बीमा की रकम; दिल्ली हाईकोर्ट से इंश्योरेंस कंपनी को झटका

दिल्ली हाईकोर्ट ने गाड़ी चलाते हुई एक ड्राइवर की हत्या के मामले में इंश्योरेंस कंपनी को बीमा की रकम देने का आदेश दिया है। बेंच ने स्पष्ट रूप से कहा कि बीमा कंपनी का तर्क बेबुनियाद है। वाहन चलाते हुए हत्यारों का शिकार बने चालक के परिवार को भगवान भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।

Fri, 29 May 2026 09:52 AMPraveen Sharma हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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लूट के इरादे से हुई हत्या पर भी देनी होगी बीमा की रकम; दिल्ली हाईकोर्ट से इंश्योरेंस कंपनी को झटका

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि बीमा कंपनी को सिर्फ सड़क दुर्घटना के मामले में ही नहीं, बल्कि ड्यूटी पर वाहन चलाते हुए हुई हत्या के मामले में भी मुआवजा देना होगा। हाईकोर्ट ने यह फैसला एक ट्रक ड्राइवर की ड्यूटी के दौरान हुई हत्या पर बीमा कंपनी को मुआवजा देने का आदेश देते हुए सुनाया है।

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जस्टिस मनोज कुमार ओहरी की बेंच ने अपने आदेश में कहा कि वाहन चलाने के दौरान हत्या के मामले में यह स्पष्टीकरण जरूरी है कि हत्या निजी कारणों या रंजिश की वजह से तो नहीं हुई। यदि मामला निजी पाया जाता है तो वह बीमा कंपनी के मुआवजा योजना के दायरे में नहीं आता, लेकिन अगर यह हत्या वाहन चलाते हुए ऐसे अज्ञात लोगों ने की है, जो लूटपाट या अन्य किसी इरादे से हमला करते हैं तो बीमा कंपनी को पीड़ित परिवार को मुआवजा देना होगा। हालांकि, बीमा कंपनी का कहना था कि उनके प्रावधान के अनुसार, सिर्फ सड़क दुर्घटना में दूसरे वाहन की लापरवाही से हुई हादसे में जान गंवाने वाले या जख्मी होने वाले वाहन के चालक और सवारों को ही मुआवजा दिया जाता है। लेकिन हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी के इस सिद्धांत को सिरे से खारिज कर दिया। बेंच ने स्पष्ट रूप से कहा कि बीमा कंपनी का तर्क बेबुनियाद है। वाहन चलाते हुए हत्यारों का शिकार बने चालक के परिवार को भगवान भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।

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ट्रक पर ड्यूटी के दौरान चालक का कत्ल हुआ था

मृतक एक निजी कंपनी में ड्राइवर के तौर पर काम करता था। वह एक वैलिड इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत बीमित ट्रक चला रहा था। जिस रात यह घटना हुई, उस रात ड्यूटी पर रहते हुए कथित तौर पर कुछ अज्ञात लोगों ने उस पर हमला कर दिया था। मौजूदा मामले में बेंच को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि मृतक को किसी निजी रंजिश या मकसद के चलते जान-बूझकर निशाना बनाया गया था। बेंच ने कहा कि ऐसा कोई भी विश्वसनीय सबूत न होने पर, जिससे यह साबित हो सके कि मृतक की मौत महज एक हत्या थी, इस घटना को सही तौर पर एक दुर्घटना-जनित हत्या माना जा रहा है।

पीड़ित के पक्ष में कर्मचारी मुआवजा अधिनियम

बेंच ने कर्मचाारी मुआवजा अधिनियम, 1923 का हवाला देते हुए कहा कि इसके तहत हत्या व आकस्मिक हत्या के अंतर को समझाया। बेंच ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को जान से मारने का मुख्य इरादा किसी खास व्यक्ति को ही मारना हो तो वह हत्या माना जाएगा।

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