दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का असर: रियल एस्टेट मार्केट में उछाल, प्रॉपर्टी की कीमतें 25% तक बढ़ने के आसार
दिल्ली से देहरादून पहुंचने में लगने वाले समय के 6 घंटे से घटकर 3 घंटे होने से लोग अब अपना 'सेकेंड होम' उत्तराखंड में तलाश रहे हैं, जिससे कि वहां के रियल एस्टेट की मांग में तेजी आ चुकी है, खासकर 'सेकंड होम' और लाइफस्टाइल प्रॉपर्टीज के लिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर बहुप्रतीक्षित दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे का लोकार्पण करेंगे। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी उपस्थित रहेंगे। करीब 210 किलोमीटर लंबा छह लेन का यह एक्सप्रेस-वे दिल्ली और देहरादून के बीच लगने वाले यात्रा समय को घटाकर लगभग ढाई से तीन घंटे कर देगा। इस परियोजना का शिलान्यास भी पीएम मोदी ने 4 दिसंबर 2021 को किया था।
एक्सप्रेसवे के चालू होने से दिल्ली और देहरादून के बीच की दूरी 240 किमी से घटकर 210 किमी रह जाएगी। जिसके चलते सफर में लगने वाला समय भी पहले के मुकाबले 6 घंटे से घटकर मात्र 2.5 से 3 घंटे रह जाएगा। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे न केवल दो शहरों के बीच की दूरी कम करने जा रहा है, बल्कि यह उत्तर भारत के रियल एस्टेट परिदृश्य को भी पूरी तरह बदलने के लिए तैयार है। बेहतर कनेक्टिविटी और यात्रा के समय में भारी कमी के चलते इस कॉरिडोर के किनारे प्रॉपर्टी की कीमतों, आवास की मांग और व्यावसायिक गतिविधियों में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है।
अगले दो साल में 25% तक दाम बढ़ने की संभावना
न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के अनुसार अगले 18-24 महीनों में इस कॉरिडोर के आसपास संपत्तियों के दाम 15% से 25% तक बढ़ सकते हैं। दरअसल ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि अब लोग वीकेंड में शहर की भीड़भाड़ से दूर किसी शांत, सुंदर, सुरम्य स्थान पर प्रकृति के पास जाकर रहना चाहते हैं। इसी वजह से जैसे-जैसे कनेक्टिविटी बेहतर हो रही है, गाज़ियाबाद, बागपत, मुज़फ़्फ़रनगर और सहारनपुर के रियल एस्टेट बाजारों में मांग और निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ती जा रही है। दिल्ली और गाजियाबाद के बाहरी इलाकों में, खासकर उन इलाकों में जहां पहले ट्रैफिक की समस्या थी, कनेक्टिविटी बेहतर होने से अब वहां रहने की स्थिति बेहतर हो रही है और कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
दूरी कम होने से करीब लगने लगा देहरादून
दिल्ली से देहरादून पहुंचने में लगने वाले समय के 6 घंटे से घटकर 3 घंटे होने से लोग अब अपना 'सेकेंड होम' उत्तराखंड में तलाश रहे हैं, जिससे कि वहां के रियल एस्टेट की मांग में तेजी आ चुकी है, खासकर 'सेकंड होम' और लाइफस्टाइल प्रॉपर्टीज के लिए। डेटा से पता चलता है कि सेकंड होम की मांग में 43% की बढ़ोतरी हुई है, जो NCR के उन खरीदारों की बढ़ती दिलचस्पी को दिखाता है जो ज्यादा शांत, प्रदूषण रहित और प्रकृति के करीब माहौल और बेहतर जीवन स्तर चाहते हैं।
'सेकंड होम' का नया हब बनकर उभरा देहरादून
विशेषज्ञों का कहना है कि देहरादून शहर अब केवल एक टूरिस्ट डेस्टिनेशन से आगे बढ़कर एक अहम रियल एस्टेट हब बनता जा रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी और एयरपोर्ट के विस्तार तथा प्रस्तावित मेट्रो सिस्टम जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार इस बदलाव को और तेज कर रहे हैं। साथ ही हवाई अड्डे के विस्तार और प्रस्तावित मेट्रो सिस्टम ने निवेशकों के उत्साह को और बढ़ा दिया है। जिसके चलते देहरादून अब केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि रणनीतिक रियल एस्टेट हब के रूप में उभर रहा है। दिल्ली-NCR के खरीदार प्रदूषण मुक्त वातावरण और बेहतर जीवनशैली के लिए यहां 'सेकंड होम' (दूसरा घर) तलाश रहे हैं।
एक्सप्रेस वे के आसपास और बढ़ेंगी आवासों की मांग
इसके अलावा एक्सप्रेसवे के बनने से यहां केवल घर ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक केंद्र भी विकसित होंगे। इस दौरान रास्ते में नए रेस्टोरेंट, मॉल, अस्पताल, ऑफिस स्पेस और आईटी पार्क बनने की संभावना है। वहीं बागपत में इंडस्ट्रियल पार्क और गाजियाबाद में लॉजिस्टिक्स हब से बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होगा, जिससे आवासीय मांग और बढ़ेगी। इस एक्सप्रेस वे के बनने से दिल्ली-NCR के इलाकों लोनी, मंडोला, नरेला, बवाना, साहिबाबाद, शाहदरा, सोनिया विहार और ट्रोनिका सिटी जैसे इलाकों में कीमतों में भारी उछाल की उम्मीद है।
निवेश के विभिन्न विकल्प
एक्सपर्ट्स के अनुसार इस कॉरिडोर पर हर बजट के खरीदारों के लिए विभिन्न विकल्प मौजूद हैं:
फार्मलैंड प्लॉट: 12,000 से 20,000 रुपए प्रति वर्ग गज।
बिल्डर फ्लोर: 35 से 60 लाख रुपए।
लक्जरी विला: 80 लाख से 1.5 करोड़ रुपए।
हॉलिडे होम्स: 30 से 70 लाख रुपए।
स्टूडियो अपार्टमेंट: 20 से 35 लाख रुपए।




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