दिल्ली में 45 दिन में घर का मालिकाना हक मिलेगा, ऑनलाइन आवेदन की पूरी प्रक्रिया जान लें
राजधानी दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने का लाभ लाखों परिवारों को मिलेगा। सरकार के इस कदम से कॉलोनियों के विकास में आ रही अड़चने दूर होंगी। जमीनों और इमारतों की खरीद फरोख्त में भी पारदर्शिता रहेगी। इस प्रक्रिया के तहत 45 दिनों के अंदर लोगों को मालिकाना हक मिलेगा।

राजधानी दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने का लाभ लाखों परिवारों को मिलेगा। सरकार के इस कदम से कॉलोनियों के विकास में आ रही अड़चने दूर होने के साथ ही कागजी प्रक्रिया पूरी तरह से वैध होंगी। जमीनों और इमारतों की खरीद फरोख्त में भी पारदर्शिता रहेगी। इस प्रक्रिया के तहत 45 दिनों के अंदर लोगों को मालिकाना हक मिलेगा।
ऋण लेकर विकसित कर सकेंगे
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि यह निर्णय न केवल कानूनी मान्यता देता है, बल्कि इन कॉलोनियों में रहने वाले नागरिकों को आत्मसम्मान और विकास की नई राह भी प्रदान करता है। कॉलोनियों के नियमितीकरण से लोग अपनी संपत्तियों के आधार पर ऋण लेकर उन्हें विकसित कर सकेंगे।
1511 कॉलोनियों का नियमितीकरण
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में कुल 1731 अनधिकृत कॉलोनियों में से 1511 कॉलोनियों का नियमितीकरण ‘जैसा है, जहां है’ के आधार पर किया जाएगा। इस प्रक्रिया में लेआउट प्लान की स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी और सभी भूखंडों और भवनों का उपयोग आवासीय माना जाएगा। लगभग 45 लाख लाभार्थी इस पूरी योजना से लाभान्वित होंगे। नियमितीकरण की पूरी प्रक्रिया अब डीडीए के बजाय सीधे दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग को सौंप दी गई है।
पूर्व सरकारों ने नहीं दिया ध्यान
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया, जिसके परिणामस्वरूप ऐसी परिस्थितियां बनी हैं कि इन क्षेत्रों को हटाकर पुनर्वास करना भी व्यावहारिक नहीं रह गया है।
इस तरह होंगे कार्य
●7 दिन में सर्वे रिपोर्ट जारी होगी
●45 दिनों के भीतर मालिकाना हक मिलेगा
●पहले डीडीए सर्वे करता था
●अब पटवारी नायब तहसीलदार करेंगे
●अधिकृत प्रमाण पत्र निगम की ओर से जारी किए जाएंगे
●घर का निर्माण अब निगम की प्रक्रिया के तहत किए जाएंगे
ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया
●mcdonline.nic.in/swagam पर लॉग इन करना होगा।
●अनधिकृत कॉलोनी (पात्र 1511 कॉलोनियों में से) का नाम चुनें; वार्ड और जोन स्वतः भर जाएंगे।
●इसके बाद, क्या पीएम-यूडीएवाई केस आईडी मौजूद है (हां/नहीं)।
●यदि नहीं तो पीएम-उदय पोर्टल पर भेजा जाएगा।
●यदि हां तो केस आईडी दर्ज करें।
●सीडी/एएस जारी है तो आवेदन पत्र खुल जाएगा।
●जारी नहीं किया तो पीएम-उदय पोर्टल पर भेजा जाएगा।
●राजस्व विभाग द्वारा डीडीए के सहयोग से आवेदनों की प्रक्रिया और सीडी/एएस जारी करना।
●सीडी/एएस को स्वगम के माध्यम से एमसीडी को भेजा जाएगा।
(सीडी का मतलब निर्मित संपत्तियों के लिए हस्तांतरण का विलेख हैं। संपत्तियों के लिए अधिकार पर्ची को एएस कहा जाता है।)




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