Hindu organizations two members in Ghaziabad were targets of suspects linked to jaish e mohammed जैश से जुड़े संदिग्धों के निशाने पर थे गाजियाबाद में हिंदू संगठनों के 2 लोग, वीडियो से लेते थे ट्रेनिंग, Ncr Hindi News - Hindustan
More

जैश से जुड़े संदिग्धों के निशाने पर थे गाजियाबाद में हिंदू संगठनों के 2 लोग, वीडियो से लेते थे ट्रेनिंग

यूपी पुलिस ने देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त ग्रुप का पर्दाफाश करते हुए गुरुवार को छह संदिग्धों को गिरफ्तार किया। आरोप है कि ये आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और अन्य प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े थे।  

Fri, 13 March 2026 09:13 AMPraveen Sharma हिन्दुस्तान, गाजियाबाद
share
जैश से जुड़े संदिग्धों के निशाने पर थे गाजियाबाद में हिंदू संगठनों के 2 लोग, वीडियो से लेते थे ट्रेनिंग

यूपी पुलिस ने देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त ग्रुप का पर्दाफाश करते हुए गुरुवार को छह संदिग्धों को गिरफ्तार किया। आरोप है कि ये आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और अन्य प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े थे। पूछताछ में सामने आया है कि विदेश में बैठे आकाओं के कहने पर आरोपी सावेज हिंदू संगठन से जुड़े गाजियाबाद के दो लोगों को निशाना बनाने की योजना बना रहा था। हालांकि, पुलिस ने दोनों लाेगों के नाम का खुलासा नहीं किया है।

बताया जा रहा है कि आतंकी ट्रेनिंग लेने के बाद वह अपने साथियों के साथ मिलकर इन दोनों की हत्या की साजिश रच रहा था, लेकिन खुफिया एजेंसियों ने साजिश को नाकाम कर दिया। लोनी इलाके में कुछ समय पहले यूट्यूबर सलीम वास्तिक पर हुए जानलेवा हमले के बाद पुलिस ने इंटरनेट और सोशल मीडिया पर निगरानी बढ़ा दी थी। इसी दौरान कुछ संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भड़काऊ और आपत्तिजनक सामग्री मिलने के बाद जांच शुरू की गई। जांच में पता चला कि सावेज और उसके साथियों ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर ग्रुप बना रखे थे, जिनमें कट्टरपंथी मैसेज और देश विरोधी सामग्री शेयर की जा रही थी। इन ग्रुप में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई शहरों के युवक जुड़े थे।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:मारो @#% को मारो... यूट्यूबर सलीम वास्तिक को मारने का खौफनाक वीडियो आया सामने

सावेज समेत ये 6 लोग गिरफ्तार

डीसीपी ग्रामीण सुरेंद्र नाथ तिवारी ने बताया कि गुरुवार को सावेज को नाहल गांव के पास से गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद मसूरी थाने में गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत केस दर्ज कर नाहल गांव के ही जुनैद, फरदीन, इकराम अली, फजरू और मोहम्मद जावेद को भी गिरफ्तार कर लिया गया। डीसीपी के मुताबिक सभी आरोपी जैश-ए-मोहम्मद की सदस्यता ले चुके हैं। ग्रुप का मुख्य सदस्य सावेज है, जो सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर जैश-ए-मोहम्मद के अलावा फरातुल्ला गौरी ग्रुप और अन्य प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े वीडियो देखता था और अपने साथियों को भी दिखाता था।

वीडियो देखकर ट्रेनिंग लेते थे

आरोपियों ने बताया कि वह जैश-ए-मोहम्मद समेत अन्य प्रतिबंधित संगठनों से संबंधित वीडियो देखकर ट्रेनिंग लेते थे और अपने समुदाय को लेकर चर्चा करते थे और कट्टरता फैलाते थे। जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों के मोबाइल से कई आपत्तिजनक चैट भी मिली हैं।

एक चैट में लिखा मिला, हां भाईजान वो बच तो गया। भाईजान आप पहले मुनाफिकों को मरवाना चाहते हैं या कुफ्रों को। यह बातचीत लोनी में सलीम वास्तिक पर हुए हमले के संदर्भ में बताई जा रही है। धार्मिक शब्दों का इस्तेमाल भी इन चैट में किया गया है। इस्लाम के जानकारों के अनुसार मुनाफिक शब्द का अर्थ ऐसे व्यक्ति से है जो ऊपर से मुसलमान होने का दिखावा करता है लेकिन भीतर से आस्था नहीं रखता, जबकि कुफ्र का अर्थ इस्लाम में पैगंबरों या धर्म की मूल शिक्षाओं को न मानना या अस्वीकार करना होता है। वहीं, एक अन्य चैट में लिखा मिला कि आपके लिए बात हो गई है। इन चैट्स को पुलिस जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रही है और इनके आधार पर नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:EX मुस्लिम सलीम वास्तिक के खून से सनकर भागते हुए जीशान और गुलफाम का वीडियो

पाकिस्तान से मिले थे निर्देश

सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में आरोपी सावेज ने बताया कि जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आतंकियों ने ऐसे लोगों की सूची तैयार कर रखी है, जिन्हें विशेष समुदाय के बारे में आपत्तिजनक बात करने वाला बताया जाता है। पाकिस्तान में बैठे उनके आका समय-समय पर ऐसे लोगों के नाम बताते थे। बताया गया है कि जिन नामों की जानकारी उन्हें दी गई थी, उनमें हिंदू संगठनों से जुड़े गाजियाबाद के दो लोग भी शामिल थे। सावेज और उसके साथी इन दोनों को निशाना बनाने की योजना बना रहे थे।

सलीम पर हमला करने वालों के मारे जाने पर भी चर्चा

सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने अपने व्हाट्सऐप ग्रुप में सलीम वास्तिक पर हमले के आरोपियों जीशान और गुलफाम के मुठभेड़ में मारे जाने की घटना पर भी चर्चा की थी। इस चर्चा के आधार पर पुलिस उनके नेटवर्क और संपर्कों की पड़ताल कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों के मोबाइल, सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल डाटा की जांच के जरिए पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

एक आरोपी एलएलबी का छात्र, एक मौलाना रह चुका

डीसीपी ने बताया कि सावेज 12वीं पास है और परचून की दुकान पर काम करता है, जबकि आलिम की पढ़ाई करने वाला मोहम्मद जावेद पूर्व में करीब छह वर्ष तक नाहल की मस्जिद में मौलाना रह चुका है और वर्तमान में मसूरी की अजीज नगर कॉलोनी में रहकर मदरसा संचालित कर रहा है। इसके अलावा इकराम अली वकालत करता है, जबकि जुनैद एलएलबी की पढ़ाई कर रहा है। बाकी दोनों आरोपी मजदूरी करते हैं।

बांग्लादेशी कनेक्शन मिलने पर केस में धाराएं बढ़ाईं

डीसीपी के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त थे। सावेज के मोबाइल में इसके पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं। पुराना डेटा हासिल करने के लिए सावेज के मोबाइल को फोरेंसिंक जांच के लिए भेजा जाएगा। जांच में यह भी पता चला कि आरोपी इकराम अली की मां साहिदा मूलरूप से बांग्लादेश की निवासी है, जो भारतीय बनकर रह रही थी। इस संबंध में मिले साक्ष्यों के आधार पर मुकदमे में धोखाधड़ी की धाराएं बढ़ाई गई हैं। इकराम की मां को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:सलीम वास्तिक को आया होश, तीसरे साथी की तलाश; बेटों के एनकाउंटर पर क्या बोला पिता

इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा

यूएपीए धारा 18 : अगर कोई व्यक्ति आतंकवादी हमला करने, उसकी योजना बनाने, साजिश रचने या लोगों को इसके लिए उकसाने का काम करता है तो उस पर यह धारा लगती है। यह गंभीर अपराध माना जाता है और इसमें कम से कम पांच साल से उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।

यूएपीए धारा 38 : अगर कोई व्यक्ति किसी प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन का सदस्य बनता है या उससे जुड़ा रहता है, तो उस पर यह धारा लगती है। ऐसे मामलों में उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।

यूएपीए धारा 39 : अगर कोई व्यक्ति किसी आतंकी संगठन की मदद करता है, उसका समर्थन करता है, उसके लिए लोगों को जोड़ता है या बैठकें आयोजित करता है, तो यह अपराध माना जाता है। इसमें 10 साल तक की जेल या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।

बीएनएस धारा 152 : अगर कोई व्यक्ति ऐसा काम करता है जिससे देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरा हो, तो उस पर यह धारा लगती है। इसमें आजीवन कारावास या सात साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।

बीएनएस धारा 196 : अगर कोई व्यक्ति धर्म, जाति, भाषा या समुदाय के आधार पर नफरत फैलाता है, तो यह धारा लगती है। इसमें तीन साल तक की सजा और अगर यह काम किसी पूजा स्थल पर किया गया हो तो पांच साल तक की सजा हो सकती है।

बीएनएस धारा 61(2) : अगर दो या उससे ज्यादा लोग किसी अपराध को करने के लिए मिलकर साजिश रचते हैं तो इसे आपराधिक षड्यंत्र माना जाता है और इस धारा के तहत कार्रवाई होती है।

लेटेस्ट Hindi News , Delhi News , Ghaziabad News , Noida News , Gurgaon News और Faridabad News सहित पूरी NCR News पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।