A wife without a job is not sitting idle Delhi High Court decision on alimony maintenance 'बिना नौकरी वाली पत्नी खाली नहीं बैठी होती', दिल्ली HC का मेंटेनेंस पर फैसला; जानें क्या है मामला, Delhi Hindi News - Hindustan
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'बिना नौकरी वाली पत्नी खाली नहीं बैठी होती', दिल्ली HC का मेंटेनेंस पर फैसला; जानें क्या है मामला

मजिस्ट्रेट अदालत ने महिला को अंतरिम गुजारा भत्ता देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि वह स्वस्थ और शिक्षित है, लेकिन उसने नौकरी नहीं करने का विकल्प चुना। अपीलीय अदालत ने भी उसे कोई राहत नहीं दी थी।

Mon, 23 Feb 2026 04:32 PMपीटीआई मोहित, नई दिल्ली
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'बिना नौकरी वाली पत्नी खाली नहीं बैठी होती', दिल्ली HC का मेंटेनेंस पर फैसला; जानें क्या है मामला

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा है कि बिना नौकरी वाली पत्नी खाली नहीं बैठी होती, उसके घर के कामकाज को महत्व न देना गलत है। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने कहा है कि गुजारा भत्ता तय करते समय पत्नी के घरेलू कामकाज के योगदान की अनदेखी करना 'अन्यायपूर्ण' है। बेंच ने कहा है कि पत्नी का घरेलू कामकाज कमाने जा रहे जीवनसाथी को सपोर्ट देता है। दरअसल एक मजिस्ट्रेट अदालत ने महिला को अंतरिम गुजारा भत्ता देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि वह स्वस्थ और शिक्षित है, लेकिन उसने नौकरी नहीं करने का विकल्प चुना। अपीलीय अदालत ने भी उसे कोई राहत नहीं दी थी।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल दंपति की शादी 2012 में हुई थी और आरोप था कि पति ने 2020 में पत्नी और नाबालिग बेटे को छोड़ दिया। पति का कहना है कि पत्नी 'खाली' नहीं बैठ सकती और जब वह कमाने के काबिल है तो गुजारा भत्ता नहीं मांग सकती। कोर्ट ने कहा कि 'कमाने की क्षमता' और 'वास्तविक कमाई' दोनों में फर्क है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में 16 फरवरी को फैसला सुनाया था।

कोर्ट ने कहा कि जो महिलाएं कमाना चाहती हैं उन्हें समर्थन देना चाहिए मगर गुजारा भत्ते देने के संबंध में ये धारणा गलत है कि जो कमाई कर सकती हैं उन्हें पति पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। घर की देखरेख, बच्चों को पालना, परिवार का ख्याल, जीवनसाथी के करियर के लिए खुद को ढालना भी एक काम ही है। ये जिम्मेदारी किसी बैंक खाते में नहीं दिखती मगर इन्हीं के जरिए एक परिवार चलता है।

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50,000 रुपये का गुजारा भत्ता देने का आदेश

बेंच ने कहा कि अगर किसी महिला ने पारिवारिक जिम्मेदारी या शादी के चलते नौकरी या काम से दूरी बना ली और फिर उससे उसी स्तर पर कमाई करने या नौकरी करने की उम्मीद नहीं की जा सकती। कोर्ट ने कहा कि लंबे अंतराल के बाद तुरंत नौकरी मिल जाना आसान नहीं होता। कोर्ट ने कहा कि जब तक यह साबित न हो कि वह वास्तव में पर्याप्त कमाई कर रही है तब तक उसे गुजारा भत्ता देने से इनकार नहीं किया जा सकता।

बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में 16 फरवरी को फैसला सुनाया था। बेंच ने मामले में पत्नी की वर्तमान कमाई न होने के चलते पति को 50,000 रुपये का गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया।

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