दिल्ली दंगा मामले के आरोपी सलीम मलिक को बड़ी राहत, HC ने दी जमानत; 6 साल बाद आएगा बाहर
सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले में पांच आरोपियों- को इस साल जनवरी में जमानत दी थी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने दो अन्य आरोपियों उमर खालिद और शरजील इमाम को यह राहत देने से मना कर दिया था। अदालत ने कहा कि इस मामले में सभी आरोपियों की स्थिति एक जैसी नहीं है।

दिल्ली में साल 2020 में हुए दंगा मामले के एक आरोपी सलीम मलिक के करीब छह साल बाद जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। दरअसल दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को शहर के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में फरवरी 2020 में हुए दंगों के एक इस आरोपी को राहत देते हुए उसे जमानत दे दी। मलिक पर फरवरी 2020 की हिंसा के मास्टरमाइंड में से एक होने के कारण गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया था। मलिक ने 29 जनवरी के सत्र अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें मलिक को इस मामले में जमानत देने से मना कर दिया गया था। जून 2020 में हुई गिरफ्तारी के बाद से ही मलिक जेल में है।
इस बारे में दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की पीठ ने मलिक को इस बारे में राहत दी। सुनवाई के दौरान मलिक के वकील ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट ने समान परिस्थितियों वाले सह-आरोपियों सलीम खान और शादाब अहमद को भी जमानत दी थी, ऐसे में इन मामलों को देखते हुए मलिक भी जमानत पाने का अधिकार है।
दंगे के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक होने का आरोप
फरवरी 2020 में हुए दंगों के 'मुख्य साजिशकर्ताओं' में से एक होने के आरोप में मलिक पर गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया गया था। इस दंगे में 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। यह हिंसा नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA), 2019 और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी। इसी दौरान सलीम को जून 2020 में गिरफ्तार किया गया था। सलीम पर आरोप था कि CAA/NRC के विरोध में रखी गई एक बैठक के 11 आयोजकों और वक्ताओं में से एक था, जिन पर हिंसा भड़काने का आरोप लगा था।
जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने 5 आरोपियों को दी थी जमानत
इससे पहले 5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले में पांच आरोपियों- गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दी थी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने दो अन्य आरोपियों उमर खालिद और शरजील इमाम को यह राहत देने से मना कर दिया था। अदालत ने कहा कि इस मामले में सभी आरोपियों की स्थिति एक जैसी नहीं है। वहीं 2 सितंबर, 2025 को जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शैलेंद्र कौर की बेंच ने इमाम, खालिद, हैदर और इस मामले के अन्य सह-आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया था।




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