गुरुग्राम में कृषि भूमि दिखाकर अवैध कॉलोनियों में बने मकानों की रजिस्ट्री, जांच के आदेश
गुरुग्राम जिले में कृषि भूमि दिखाकर अवैध कॉलोनियों में बने मकानों की रजिस्ट्री कराने की शिकायतें मिल रही हैं। इसके अलावा अवैध कॉलोनियों में प्रॉपर्टी एनओसी जारी करके भी निगम के राजस्व को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। यह मामला शहरी स्थानीय निकाय मंत्री तक पहुंच गया है।

गुरुग्राम जिले में कृषि भूमि दिखाकर अवैध कॉलोनियों में बने मकानों की रजिस्ट्री कराने की शिकायतें मिल रही हैं। इसके अलावा अवैध कॉलोनियों में प्रॉपर्टी एनओसी जारी करके भी निगम के राजस्व को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। यह मामला शहरी स्थानीय निकाय मंत्री तक पहुंच गया है। इसके जांच के आदेश दिए गए हैं।
बता दें कि शहर में किसी भी प्रकार के मकान या भूमि की रजिस्ट्री (पंजीकरण) करवाने से पहले उस मकान या भूमि की प्रॉपर्टी आईडी होनी जरूरी होती है। अगर किसी भूमि की प्रॉपर्टी आईडी है तो उसके लिए निगम से एनओसी लेनी होती है कि संबधित प्रॉपर्टी आईडी के मकान मालिक द्वारा नगर निगम में अपना विकास शुल्क जमा करवाया गया है या नहीं। अगर विकास शुल्क जमा करवाया हुआ होता है तो उसे निगम की तरफ से एनओसी जारी कर दी जाती है। इससे जिला राजस्व विभाग उस भूमि या मकान की रजिस्ट्री कर देता है।
इस विकास शुल्क और बकाया संपत्ति कर से बचने के लिए लोग शहरी स्थानीय निकाय विभाग के पोर्टल पर अपने आप ही अपनी प्रॉपर्टी आईडी बना लेते हैं। विभाग के पोर्टल पर कृषि भूमि का विकल्प आता है। रिहायशी कॉलोनी में भी लोगों द्वारा अपने मकान को कृषि भूमि दिखाकर प्रॉपर्टी आईडी बना ली जाती है। इस कारण उसे ना तो निगम में संपत्ति कर जमा करवाना होता है और ना ही कोई विकास शुल्क जमा करवाना होता है। निगम में फिलहाल करीब दस हजार कृषि भूमि की प्रपर्टी आईडी बनी हुई है।
सोनीपत निगम में पकड़े गए हैं ऐसे मामले : शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने सोनीपत नगर निगम में गलत तरीके से प्रॉपर्टी एनओसी जारी करने और प्रॉपर्टी आईडी में भूमि बदलाव को लेकर खुलासा हुआ था। विभागीय सूत्रों के अनुसार, यहां पर फर्जी तरीके से 50 हजार से अधिक आईडी भी बनाने का मामला सामने आया था। इसी तरह की शिकायत रोहतक और गुरुग्राम निगम से भी विभाग के पास पहुंच रही है। जांच के लिए म्यूनिसिपल कमिश्नर और टेक्निकल अधिकारियों की कमेटी बनाई जाएगी।
‘अप्रूव्ड - अनअप्रूव्ड’ का भी चल रहा खेल
आरोप है कि नगर निगम में प्रॉपर्टी आईडी बनाने और उसमें अप्रूव्ड और अनअप्रूव्ड लिखने का भी बड़ा खेल चल रहा है। दरअसल, अवैध कॉलोनियों में जिला राजस्व विभाग की तरफ से कोई भी रजिस्ट्री नहीं की जाती है, लेकिन प्रॉपर्टी माफिया लोगों से उनकी रजिस्ट्री करवाने का ठेका खुद उठा लेते हैं। आरोप है कि निगम में मिलीभगत करके एक बार अवैध कॉलोनी में बने मकान की प्रॉपर्टी आईडी में अनअप्रूव्ड को अप्रूव्ड कर दिया जाता है। इसके बाद उसे एनओसी भी जारी कर दी जाती है। इसके बाद उस मकान की रजिस्ट्री हो जाती है। इसके बाद भी काफी लोग उसी प्रॉपर्टी आईडी को रख लेते हैं और कुछ लोग उस आईडी को ही समाप्त भी करवा देते हैं।
मुख्यालय तक पहुंची जांच की आंच
इस फर्जीवाड़े की गूंज शहरी स्थानीय निकाय विभाग के मुख्यालय तक पहुंच गई है। शहरी स्थानीय निकाय मंत्रालय की ओर से इस मामले की विस्तृत जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। विभाग अब साल 2023-24 और 2024-25 के दौरान कृषि भूमि के नाम पर जारी की गई सभी प्रॉपर्टी आईडी और रजिस्ट्री के लिए दी गई एनओसी की गहन जांच करेगा। विभाग उन संपत्तियों का भौतिक सत्यापन भी कर सकता है जहां कागजों में खेत हैं, लेकिन हकीकत में आलीशान इमारतें खड़ी हैं।
राजस्व का नुकसान
जानकारों का मानना है कि यदि इस घोटाले की निष्पक्ष जांच होती है, तो यह प्रदेश का सबसे बड़ा प्रॉपर्टी आईडी घोटाला साबित हो सकता है। इससे नगर निगम को मिलने वाले राजस्व का नुकसान हुआ है। भविष्य के लिए गलत नजीर पेश की गई है।
प्रदीप दहिया, निगम आयुक्त, गुरुग्राम, ''प्रॉपर्टी आईडी बनाने और एनओसी जारी करने में गड़बड़ी की जा रही है, उसकी जांच करवाई जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार इसमें आगामी कार्रवाई की जाएगी।''




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