जिले में पंपों पर डीजल-पेट्रोल की बिक्री पर असर नहीं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेट्रोल और डीजल का कम इस्तेमाल करने की अपील की है। गुरुग्राम में इस अपील का कोई खास असर नहीं दिखा। लोग पहले की तरह पेट्रोल पंपों पर भीड़ दिखा रहे हैं और अपनी जरूरत के अनुसार तेल भरवा रहे हैं। शादियों के सीजन के कारण भीड़ में कमी आने की संभावना है।

गुरुग्राम, अमर मौर्य। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेट्रोल और डीजल का कम इस्तेमाल करने की अपील की है। इस अपील का मिलेनियम सिटी में कितना असर दिख रहा है, इसे जानने के लिए शहर के अलग-अलग पेट्रोल पंपों पर पड़ताल की गई। पड़ताल में सामने आया कि फिलहाल लोगों की दिनचर्या पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ा है। पेट्रोल पंपों पर पहले की तरह ही भीड़ दिखाई दी और लोग रोज की तरह अपने वाहनों में तेल भरवाते नजर आए। पंपों पर डीजल-पेट्रोल की बिक्री पर असर नहीं है। दिल्ली-जयपुर स्थित हिन्दुस्तान पेट्रोलियम पेट्रोल पंप पर डीजल-पेट्रोल के लिए वाहन खड़े थे। इसमें बाइक, कार और अन्य वाहनों से पहुंचे लोग अपनी बारी का इंतजार करते दिखाई दिए। एक युवक ने बताया कि लोग बोल रहे है कि अब तेल नहीं मिलेगा। बाइक में पेट्रोल के लिए आया है। यहां पर कोई दिक्कत नहीं है, जिनता पेट्रोल का पैसा दिया है, उतना ही तेल बाइक में भर दिया गया है। मनोज कुमार ने कहा कि आम लोगों के लिए पेट्रोल का इस्तेमाल कम करना आसान नहीं है। प्रधानमंत्री के आग्रह का पालन करेंगे तो ड्यूटी कैसे जाएंगे। कंपनी वर्क फ्रॉम होम देगी नहीं। तो घर से ऑफिस और उसके बाद क्षेत्र में जाने के लिए गाड़ी से जाना तो पड़ेगा। लोगों का कहना था कि नौकरी और रोजमर्रा की जरूरतों के चलते लोग चाहकर भी वाहन का इस्तेमाल कम नहीं कर पा रहे हैं।
पेट्रोल-डीजल की खपत पर कोई बड़ा असर नहीं:
पुरानी दिल्ली रोड पेट्रोल पंपों पर भी लोग वाहनों में डीजल-पेट्रोल भरवाते देखे गए। यहां पर पेट्रोल और डीजल की खपत पर कोई बड़ा असर दिखाई नहीं दे रहा है। लोग अपनी जरूरत और कामकाज के चलते पहले की तरह ही वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। सुबह-शाम डीजल-पेट्रोल के लिए भीड़ अधिक होती है।
लोगों की भीड़ पिछले दिनों जैसी ही है:
पेट्रोल पंप मैनेजर प्रताप सिंह ने का कि फिलहाल बिक्री पर कोई खास असर नहीं दिख रहा है। लोगों की भीड़ पिछले दिनों जैसी ही है। शादियों का सीजन चल रहा है। माना जा रहा है कि 15 मई के बाद भीड़ में थोड़ी कटौती हो सकती है। मैनेजर ने कहा कि डीजल पांच हजार लीटर और पेट्रोल 13 हजार लीटर की बिक्री है। इससे ज्यादा बिक्री होती है।
ज्वैलरी में 25 प्रतिशत खरीदारों में कमी:
सोना-चांदी महंगा होने से 25 प्रतिशत खरीदारों की कमी आई है। सराफा बाजार में अब नकद का व्यापार और एड़वांस बुकिंग कम कर दिया है। पहले से तय कीमतों पर माल देने से दुकानदार साफ इंकार कर रहे है। बिक्री घटने से 25 फीसदी स्टाफ कम करने की तैयारी की गई। कारोबार विपिन कुमार, अजय कुमार ने कहा कि आयात महंगा होने से सर्राफा कारोबारियों की लागत बढ़ गई। इसका बोझ ग्राहकों तक पहुंचने लगगा। यानी शादी-ब्याह या निवेश के लिए सोना खरीदना अब पहले से ज्यादा खर्चीला हो सकता है। सिर्फ ज्वेलरी कारोबारी ही नहीं, बल्कि वे उद्योग भी प्रभावित होंगे, जो कीमती धातुओं का इस्तेमाल मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स या रिसाइक्लिंग में करते हैं। उनकी लागत बढ़ने से कई उत्पाद महंगे हो सकते हैं।
आयात शुल्क 15 प्रतिशत होने से सोना-चांदी महंगा:
कारोबारियों ने कहा कि केंद्र सरकार ने सोना, चांदी और अन्य कीमती धातुओं के आयात पर लगने वाली ड्यूटी में बड़ा इजाफा कर दिया है। मंगलवार को जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक नई दरें 13 मई 2026 से लागू हो गई हैं। इस फैसले के बाद सोना-चांदी की कीमतों में तेजी आ रही है। जिसका सीधा असर बाजार और ग्राहकों दोनों पर पड़ने लगा है। कारोबारियों ने कहा कि सोना पर लगने वाली कुल आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। बेसिक कस्टम ड्यूटी (बीसीडी) पांच प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत की गई है, जबकि एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस को एक प्रतिशत से बढ़ाकर प्रतिशत कर दिया गया है।
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