प्रधानमंत्री के आह्वान के बाद भी सरकार विभागों में नहीं किए वाहन कम
गुरुग्राम में सरकारी खर्चों में कटौती और वीआईपी कल्चर खत्म करने की प्रधानमंत्री की अपील का कोई असर नहीं हो रहा है। स्थानीय मंत्री और विधायक अपने काफिलों में गाड़ियों की संख्या कम नहीं कर रहे हैं। नगर निगम और जिला प्रशासन भी वाहन खर्चों में कटौती नहीं कर रहे हैं। सोने की कीमतों में वृद्धि से व्यापार प्रभावित हो रहा है।

गुरुग्राम, कृष्ण कुमार। देश के प्रधानमंत्री द्वारा सरकारी खर्चों में कटौती करने, वीआईपी कल्चर को खत्म करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए वाहनों का उपयोग सीमित करने की बार-बार अपील की जाती रही है। लेकिन साइबर सिटी गुरुग्राम के सरकारी महकमों और जनप्रतिनिधियों पर इस अपील का कोई असर होता दिखाई नहीं दे रहा है। सरकारी महकमों के साथ-साथ स्थानीय मंत्री और विधायक भी अपने काफीले में गाड़ियों की संख्या को कम नहीं कर रहे हैं। बता दें कि बीते काफी समय से ईरान-इजरायल-अमेरिक के बीच छीड़ी जंग के असर अब भारत में भी दिखने लगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन दिन पहले दो बार बड़ी जनसभाओं को संबोधित करते हुए पैट्रोल-डीजल के उपयोग को कम करने की सलाह दी थी। प्रधानमंत्री की इस सलाह का गुरुग्राम के जिला प्रशासन, मंत्री और विधायकों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। गुरुग्राम विधायक के काफिले में पांच से छह गाड़ियां चलती है, तो वहीं मंत्री के काफिले में इससे ज्यादा गाड़ियां चल रही है। वहीं जिला प्रशासन के अधिकारी भी अपने वाहनों के खर्चे में कोई कटौती नहीं करना चाह रहे हैं。
नगर निगम में होता है करोड़ों का खर्च
नगर निगम गुरुग्राम की बात करें तो यहां अधिकारियों और कामकाज के लिए करीब 110 वाहन लगातार सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इन वाहनों के ईंधन (पेट्रोल और डीजल) पर निगम हर साल जनता की गाढ़ी कमाई के लगभग एक करोड़ 60 लाख रुपये फूंक रहा है। इसके बावजूद वाहनों की संख्या में कोई कमी या पूलिंग जैसी कोई व्यवस्था लागू नहीं की गई है। निगम के एसडीओ से लेकर उच्च अधिकारी अपनी-अपनी गाड़ियों से चल रहे हैं। निगम कार्यालय तीन जगहों पर संचालित होता है, इस कारण जब भी कोई बैठक होती है तो अधिकारियों को निगम के सेक्टर-34 कार्यालय में अपने वाहनों से आना पड़ रहा है।
जिला प्रशासन और जीएमडीए का हाल
जिला प्रशासन का भी कमोबेश यही हाल है। विभिन्न सरकारी विभागों, एसडीएम कार्यालयों, तहसील और अन्य प्रशासनिक कार्यों में 250 से अधिक वाहन लगे हुए हैं। इसके अलावा, शहर के विकास का जिम्मा संभालने वाले गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) में भी 30 से 35 पेट्रोल-डीजल चालित वाहन अधिकारियों की सेवा में लगे हुए हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की सरकारी नीतियां भी इन विभागों में दम तोड़ती नजर आ रही हैं।
नेताओं के काफिलों में कोई कटौती नहीं:
वीआईपी कल्चर खत्म करने की प्रधानमंत्री की मुहिम को खुद उनके ही दल और गठबंधन के नेता पलीता लगा रहे हैं। स्थानीय मंत्रियों और विधायकों के काफिले में आज भी लंबी-लंबी गाड़ियों की कतारें देखी जा सकती हैं। जनप्रतिनिधियों ने अपने काफिले की गाड़ियों में कोई कटौती नहीं की है, जो सीधे तौर पर ईंधन की बर्बादी और सरकारी खजाने पर भारी बोझ है।
सोने के दामों में आग, सराफा बाजार में सन्नाटा
एक तरफ जहां सरकारी महकमे बेहिसाब खर्च कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आम जनता और व्यापारी वर्ग महंगाई की मार झेल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू कारणों के चलते हाल ही में सोने की कीमतों में 12 फीसदी की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सोने के दाम ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचने के कारण गुरुग्राम के आभूषण बाजार (ज्वैलरी मार्केट) में ग्राहकों की संख्या तेजी से घटी है। सोने के दामों में इस 12 फीसदी की वृद्धि ने सीधे तौर पर कारोबार को प्रभावित किया है, जिससे सोने की बिक्री में 15 से 20 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। अखिल भारतीय वैश्य महासम्मेलन गुरुग्राम के अध्यक्ष डॉ मनदीप किशोर गोयल ने बताया कि सोने के दामों में बढोतरी से मार्केट में इसका असर दिख रहा है। शादी-ब्याह के सीजन में भी मध्यम वर्गीय परिवार भारी और महंगे आभूषण खरीदने से कतरा रहे हैं और अपनी खरीदारी को सीमित कर रहे हैं।
हल्के आभूषणों की बढ़ी मांग
इस भारी आर्थिक मंदी और गिरते कारोबार के बीच शहर के ज्वैलर्स ने प्रधानमंत्री की उस अपील से प्रेरणा ली है जिसमें उन्होंने व्यापारियों को समय के अनुकूल खुद को ढालने और इनोवेशन करने की सलाह दी थी। भारी और ठोस सोने के गहनों की मांग घटने के बाद, ज्वैलर्स ने तुरंत अपनी रणनीति बदलते हुए लाइटवेट (हल्के) आभूषण बनाने का काम बड़े पैमाने पर शुरू कर दिया है। कारीगरों द्वारा अब ऐसी डिजाइन तैयार की जा रही हैं जो दिखने में तो भारी और आकर्षक लगती हैं, लेकिन असल में उनका वजन और सोने की मात्रा काफी कम होती है।
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