...तो नहीं हो सकेगी पानी की सप्लाई, फरीदाबाद में भूजल 80 मीटर तक नीचे पहुंचा
फरीदाबाद के लोगों के लिए सावधान करने वाली खबर है। शहर के कई इलाके में भूजल का स्तर 60 मीटर तक नीचे पहुंच गया है। वैकल्पिक इंतजाम नहीं किए गए तो जिले में जल संकट गहरा सकता है। भूजल का दोहन ऐसे ही होता रहा तो जिले में भूजल के दम पर पानी की आपूर्ति नहीं हो सकेगी।

फरीदाबाद के लोगों के लिए सावधान करने वाली खबर है। शहर के कई इलाके में भूजल का स्तर 60 मीटर तक नीचे पहुंच गया है। वैकल्पिक इंतजाम नहीं किए गए तो जिले में जल संकट गहरा सकता है। भूजल का दोहन ऐसे ही होता रहा तो जिले में भूजल के दम पर पानी की आपूर्ति नहीं हो सकेगी।
फरीदाबाद जिले में दिल्ली-आगरा हाईवे के आस-पास के इलाके में जलस्तर सबसे ज्यादा नीचे गिरा है। यहां 60 मीटर नीचे तक जलस्तर पहुंच गया है। पिछले 44 वर्ष का आकलन किया जाए तो हर वर्ष करीब सवा मीटर नीचे जलस्तर गिर रहा है। वैकल्पिक इंतजाम न हुए तो जिले में जल संकट गहरा सकता है। वर्ष 1982 में अधिकतम भूजल का स्तर अलग-अलग हिस्सों में 15 से 20 मीटर था। बीते 44 साल में भूजल दोहन और लगातार बढ़ती जनसंख्या की वजह से यहां भूजल का अधिकतम स्तर 80 मीटर नीचे तक पहुंच गया है।
भूजल के दम पर आपूर्ति नहीं हो सकेगी
एनआईटी-चार में यह 65 मीटर तक है। भूजल का दोहन ऐसे ही होता रहा तो 40 लाख की जनसंख्या होने पर जिले में भूजल के दम पर पानी की आपूर्ति नहीं हो सकेगी। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, मौजूदा समय में शहर की जनसंख्या करीब 26 लाख से ज्यादा हो चुकी है।
सभी के लिए खतरे की घंटी
यह सभी के लिए खतरे की घंटी है। यदि जल बचाने के लिए बड़े पैमाने पर आंदोलन नहीं चलाया गया तो भविष्य में पेयजल के लिए हाहाकार मच सकता है। अभी भी लोग पानी की गुणवत्ता खराब होने के कारण बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर हैं। लेकिन, आने वाले समय में नहाने और घरेलू कार्यों के लिए भी पानी नहीं बच सकेगा।
फरीदाबाद पूरी तरह से भूजल पर निर्भर
मानव रचना शिक्षण संस्थान के सेंटर फॉर वाटर टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट के निदेशक एवं पूर्व वैज्ञानिक अनुरांगशु मुखर्जी बताते हैं कि फरीदाबाद पूरी तरह से भूजल पर निर्भर रहने वाला शहर है। यहां हाईवे के आस-पास के इलाके में जलस्तर काफी नीचे चला गया है।
नया गलियारा बनाया जाना चाहिए
हाईवे के आस-पास 60 मीटर तक नीचे तक चला गया है। जलस्तर बढ़ाने के लिए बुढ़िया नाले के साथ-साथ 10 किलोमीटर एरिया में नया गलियारा बनाया जाना चाहिए। वहीं, पार्क और पौधों के लिए भूजल के बजाय शोधित जल का प्रयोग किया जाना चाहिए। साथ ही बारिश के दौरान पानी का संचयन कर इसे बचाने से ही जल संकट दूर हो सकेगा।
पानी को बचाने के उपाय
● टपका सिंचाई प्रणाली को अपनाकर 40 प्रतिशत भूजल की बचत कर सकते हैं
● बदल-बदलकर फसल उगाने से 20 प्रतिशत तक भूजल की बचत
● खेतों को समतल करवाकर सिंचाई करने से पानी की बचत होती है
● धान की रौपाई खेत में पानी भरकर न की जाए
● वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाने और तालाबों की खुदाई करवाकर
भूजल ऐसे कम हो रहा
● ट्यूबवेल से खेत में खुला पानी छोड़कर सिंचाई करने से
● धान जैसी ज्यादा पानी की खपत वाली फसलें उगाने से
● घरों में आरओ, समर्सिबल लगाने सहित कई अन्य वजह से पानी की बर्बादी होने से
● बारिश के पानी की निकासी की उचित व्यवस्था न होने से
एसटीपी की जरूरत
भूजल की गुणवत्ता बचाने के लिए एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) की जरूरत हैं। मौजूदा समय में फरीदाबाद में बेहतर हालात नहीं हैं। यहां अधिकांश औद्योगिक क्षेत्र का अधिकतर सीवर बिना शोधित किए नहरों और यमुना में डाला जा रहा है।




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