मैं बहुत-बहुत अकेली हूं और मेरी जिंदगी...; गाजियाबाद की तीनों बहनों ने दीवारों पर भी लिखी थीं कई बातें
गाजियाबाद के साहिबाबाद इलाके में अपने नौवीं मंजिल के घर से तीन बहनों के कूदकर जान देने के एक दिन बाद इस रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स के लोग सदमे में हैं। लोग सोच रहे हैं कि लड़कियों का इतने लंबे समय तक अकेला रहना किसी की नजर में क्यों नहीं आया।

गाजियाबाद के साहिबाबाद इलाके में अपने नौवीं मंजिल के घर से तीन बहनों के कूदकर जान देने के एक दिन बाद इस रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स के लोग सदमे में हैं। लोग सोच रहे हैं कि लड़कियों का इतने लंबे समय तक अकेला रहना किसी की नजर में क्यों नहीं आया।
गुरुवार को भारत सिटी सोसाइटी के निवासी परिसर में छोटे-छोटे ग्रुप में इकट्ठा होकर इस दुखद घटना और कम उम्र के बच्चों के दिमाग पर ऑनलाइन लत के असर पर चर्चा करते दिखे। एक निवासी ईशा त्यागी ने हैरानी जताते हुए कहा कि यह बहुत चौंकाने वाला है। अगर कोई डिप्रेशन की वजह से ऐसा कदम उठाता है तो समझा जा सकता है, लेकिन तीनों बहनें एक साथ ऐसा कैसे कर सकती हैं? महिला ने बताया कि उसने लड़कियों को कभी स्कूल जाते या सोसाइटी के पार्क में दूसरे बच्चों के साथ खेलते हुए नहीं देखा था। उसने कहा कि उनका अकेलापन सालों तक किसी की नजर में नहीं आया।
पुलिस ने बताया कि शुरुआती जांच में पता चला कि लड़कियां कोरियन कंटेंट, खासकर एक कोरियन गेम से प्रभावित थीं। अपने मोबाइल फोन पर काफी समय बिताती थीं। डीसीपी निमिश पाटिल ने कहा कि लड़कियों की पढ़ाई रेगुलर नहीं थी और उनका एकेडमिक परफॉर्मेंस भी औसत से कम था। उन्होंने कहा कि यह साफ है कि लड़कियां मोबाइल फोन इस्तेमाल करने की बहुत ज्यादा आदी थीं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि परिवार करीब तीन साल से सोसाइटी में रह रहा था, लेकिन ज्रयादातर वे अपने आप में ही रहते थे। रेजिडेंशियल सोसाइटी के जॉइंट सेक्रेटरी राहुल कुमार झा ने बताया कि उन्होंने कभी-कभी लड़कियों को ट्यूशन जाते देखा था, लेकिन उन्हें उनकी स्कूलिंग के बारे में पता नहीं था। उन्होंने कहा कि वे अपना ज्यादातर समय एक ही कमरे में बंद रहकर बिताती थीं। उन्हें कभी भी बाहर खेलते या दूसरों से बात करते नहीं देखा गया।
लड़कियों के पिता के अनुसार, निशिका (16), प्राची (14) और पाखी (12) को महामारी के सालों में ऑनलाइन गेमिंग की लत लग गई थी। पिता ने बताया कि वे पिछले ढाई से तीन सालों से गेम खेल रही थीं।
एक फोरेंसिक टीम को लड़कियों के कमरे की दीवारों पर कई वाक्य लिखे हुए मिले हैं। पुलिस ने बताया कि उनमें से कुछ वाक्य थे- "मुझे दिल टूटा हुआ बना दो", "मैं बहुत-बहुत अकेली हूं" और "मेरी जिंदगी बहुत बहुत अकेली है"।
सोसाइटी की रहने वाली ज्योति कसाना ने कहा कि इस उम्र में बच्चे बहुत नाजुक होते हैं। अचानक फोन या टैबलेट छीनना उनकी मानसिक स्थिति पर गहरा असर डाल सकते हैं। सोसाइटी के वाइस-प्रेसिडेंट अजय कसाना ने पत्रकारों को बताया कि कोविड-19 महामारी के बाद से बच्चे स्कूल नहीं जा रहे थे।
तीनों बहनों ने एक चौंकाने वाला नोट छोड़ा है। इसमें लिखा था, "इस डायरी में लिखी हर बात पढ़ो, सब कुछ यहीं है।" इसके साथ एक रोने वाले चेहरे वाला इमोजी और हाथ से लिखा मैसेज था, "सॉरी पापा, मुझे सच में बहुत अफसोस है।" पुलिस ने बताया कि मामले की जांच चल रही है और लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।




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