2 दस्तावेजों से मतदाता सूची में नाम जुड़ेंगे, गाजियाबाद में इलेक्शन ऑफिस के चक्कर लगा रहे लोग
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत मतदाता सूची में नाम जोड़ने और सत्यापन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। निर्वाचन विभाग ने स्पष्ट किया है कि 2 दस्तावेजों के आधार पर ही नाम शामिल किया जाएगा। गाजियाबाद में 50 हजार से अधिक आवेदक निर्वाचन कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं।

विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत मतदाता सूची में नाम जोड़ने और सत्यापन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। निर्वाचन विभाग ने स्पष्ट किया है कि 2 दस्तावेजों के आधार पर ही नाम शामिल किया जाएगा।
वर्ष 1987 से पहले जन्मे लोगों को जन्म अथवा निवास से संबंधित एक वैध दस्तावेज देना होगा, जबकि वर्ष 2003 से पहले जन्मे आवेदकों को अपने साथ-साथ माता-पिता के दस्तावेज प्रस्तुत कर वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाया जा सकेगा। वर्ष 2003 की एसआईआर सूची को आधार बनाकर सत्यापन किया जा रहा है।
बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जिनके नाम 2003 की एसआईआर सूची में नहीं है। इनमें अधिकतर वह लोग हैं जिन्होंने बार-बार अपने पते बदले हैं। इन लोगों को नाम मतदाता सूची में अब नहीं है। जिन लोगों का नाम उस सूची में नहीं मिल रहा, उन्हें अतिरिक्त प्रमाण देने पड़ रहे हैं।
जिले में 50 हजार से अधिक आवेदक इसी समस्या को लेकर परेशान हैं और बीएलओ व निर्वाचन कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि जिन आवेदनों में दस्तावेज पूरे मिलेंगे, उन्हें नियमानुसार सूची में शामिल किया जाएगा। नोटिस पाने वाले आवेदकों की सुनवाई भी की जा रही है।
ये है नई व्यवस्था
जिन आवेदकों का जन्म 1987 से पहले हुआ है और अब उनका नाम कट गया है। साथ ही 2003 की एसआईआर लिस्ट में उनका नाम नहीं है। ऐसे लोगों को अपना नाम जुड़वाने के लिए जन्म या पते का एक वैध दस्तावेज देना होगी। इसके साथ ही 1987 के बाद और 2003 से पहले जन्मे आवेदकों को अपने साथ माता-पिता के दस्तावेज भी लगाने होंगे।
ये आ रही परेशानी
मतदाताओं से 2003 की सूची में नाम न मिलने पर अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जा रहे। कई आवेदकों का वर्तमान सूची में नाम है, लेकिन पुरानी सूची में रिकॉर्ड नहीं। पुराने दस्तावेज उपलब्ध न होने से सत्यापन अटक रहा। खासकर महिलाओं के मामले में यह समस्या ज्यादा आ रही है। महिला शादी के बाद अपने पति के घर आ गई। अब माता पिता का आधार या कोई दस्तावेज नहीं है। उन्हें नहीं पता है कि उनके माता पिता का 2003 एसआईआर लिस्ट में कहां नाम था। इस संंबंध में सहायक निर्वाचन अधिकारी सौरभ भट्ट का कहना है कि किसी पात्र मतदाता का नाम नहीं काटा जाएगा। दस्तावेज पूर्ण होने पर नाम शामिल कर लिया जाएगा।




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