गाजियाबाद में हमले और धमकी के आरोपी को 22 साल बाद अदालत ने किया दोषमुक्त
अदालत से मिली जानकारी के अनुसार यह मामला 15 दिसंबर 2003 का है। वादी मुख्तार अहमद सिद्दीकी ने पुलिस को दी, तहरीर में बताया था कि उसका बेटा इफतखार सुबह करीब साढ़े आठ बजे घर से काम पर हिंडन विहार जा रहा था।

अदालत से मिली जानकारी के अनुसार यह मामला 15 दिसंबर 2003 का है। वादी मुख्तार अहमद सिद्दीकी ने पुलिस को दी, तहरीर में बताया था कि उसका बेटा इफतखार सुबह करीब साढ़े आठ बजे घर से काम पर हिंडन विहार जा रहा था। जब वह जीटी रोड पर साईं उपवन के सामने पहुंचा, तभी एक मारुति कार से सलाउद्दीन अपने तीन साथियों के साथ उतरा।
आरोप था कि सलाउद्दीन ने यह कहते हुए कि इफतखार उसके भाई रहीमुद्दीन के खिलाफ गवाही दे रहा है, उस पर उस्तरे से हमला कर दिया। हमले में इफतखार के बाएं हाथ और सिर में चोट आई। आरोप यह भी था कि आरोपियों ने फायरिंग की, जिसमें गोली उसके कान के पास से निकल गई। घायल इफतखार किसी तरह भागकर नए बस अड्डे की पुलिस चौकी पहुंचा और वहां से कोतवाली थाने ले जाया गया।
पुलिस ने खतरनाक हथियार से चोट पहुंचाने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में मामला दर्ज कर विवेचना की और आरोपी सलाउद्दीन के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से वादी मुख्तार अहमद सिद्दीकी, कथित घायल इफतखार, विवेचक और एफआईआर लेखक समेत चार गवाह पेश किए गए।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित नहीं कर पाया। आपराधिक मामलों में आरोप सिद्ध करने का भार अभियोजन पर होता है, जो इस प्रकरण में पूरा नहीं हुआ। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी सलाउद्दीन को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।




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