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फीस विवाद मामले में दिल्ली HC से 25 छात्रों को राहत, DPS द्वारका को बिठाने का आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट ने फीस नहीं भरने पर निकाले गए डीपीएस द्वारका के 25 छात्रों को राहत देते हुए उन्हें मंगलवार से स्कूल जाने की अनुमति दी है। अदालत ने अभिभावकों को भी 17 अप्रैल तक 50 फीसदी बकाया फीस जमा करने का निर्देश दिया है।

Mon, 6 April 2026 10:11 PMKrishna Bihari Singh लाइव हिन्दुस्तान, हेमलता कौशिक, नई दिल्ली
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फीस विवाद मामले में दिल्ली HC से 25 छात्रों को राहत, DPS द्वारका को बिठाने का आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को दिल्ली पब्लिक स्कूल, द्वारका से फीस बढ़ोतरी विवाद के बीच फीस न देने पर निकाले गए 25 छात्रों को मंगलवार से कक्षा में आने की इजाजत दे दी है। उच्च न्यायालय ने कहा कि अगर माता-पिता 17 अप्रैल तक 50 फीसदी बकाया भुगतान कर देते हैं, तो स्कूल का फैसला लागू नहीं होगा।

छात्रों ने लगाई थी मदद की गुहार

उच्च न्यायालय ने यह आदेश डीपीएस द्वारका के कई छात्रों की अवमानना याचिका पर दिया। आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने उच्च न्यायालय के 16 मई 2025 के आदेश का उल्लंघन किया है, जिसमें छात्रों को बढ़ी हुई फीस न देने पर भेदभाव व उत्पीड़न से बचाया गया था।

माता-पिता को जमा करनी होगी 50 फीसदी फीस

न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने कहा कि स्कूल को निर्देश दिया जाता है कि बगैर किसी भेदभाव के माता-पिता 16 मई 2025 के आदेश के अनुसार बकाया फीस का 50 फीसदी 17 अप्रैल तक जमा करेंगे। इसके तुरंत बाद बहाली का आदेश पारित किया जाएगा। स्कूल को छात्रों को मंगलवार से कक्षा में बैठाने का आदेश दिया गया है।

स्कूल के व्यवहार पर HC ने जताई नाराजगी

स्कूल की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील ने कहा कि स्कूल प्रबंधन ने उच्च न्यायालय के पहले के आदेश के अनुसार, 2025-2026 के लिए बकाया फीस का भुगतान नहीं करने पर छात्रों को कारण बताओ नोटिस देने के बाद कार्रवाई की और उनके जवाब संतोषजनक नहीं थे। इस पर पीठ ने स्कूल के व्यवहार पर नाराजगी जताई।

सरकार से दागे सवाल

पीठ ने कहा कि स्कूल को इस मुद्दे पर पहले के आदेशों का पालन करना होगा। अदालत ने सरकारी वकील से पूछा कि स्कूल वर्ष 2015-2016 की तरह कैसे काम कर रहा है। आपने कोई मंजूरी नहीं दी है। पीठ ने कहा कि सरकार को बच्चों की पढ़ाई के स्तर को बनाए रखना होगा। प्रत्येक छात्र नवीनतम प्रौद्योगिकी चाहता है।

सरकार ही सारे विवाद की जड़

पीठ ने कहा कि अच्छी शिक्षा के लिए अच्छे शिक्षक जरूरी हैं। इसलिए सातवें वेतन आयोग के हिसाब से शिक्षकों का वेतन सुनिश्चित करें। पीठ ने यह भी कहा कि आठवां वेतन आयोग लगने वाला है। अदालत ने दिल्ली सरकार से यह भी कहा कि आप फीस बढ़ाने की इजाजत नहीं देते हैं। फिर स्कूल कैसे चलेंगे? सरकार ही सारे विवाद की जड़ है।

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स्कूल और शिक्षा निदेशालय के निदेशक को अवमानना नोटिस

पीठ ने इस मुद्दे को लेकर स्कूल के प्रधानाचार्य, प्रबंधन समिति के अध्यक्ष व शिक्षा निदेशालय के निदेशक को अवमानना नोटिस जारी किया है। इस मामले में 27 अगस्त को अगली सुनवाई होगी।

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बच्चों के लिए मांगी थी सुरक्षा

पीठ ने कहा कि अवमानना मामले में सिर्फ उन्हीं छात्रों को याचिकाकर्ता बनाया जाएगा जिन्हें स्कूल से निकाला गया था। यह आदेश 102 अभिभावकों की एक याचिका पर आया, जिसमें डीपीएस द्वारका में चल रही फीस बढ़ोतरी के मुद्दे के बीच अपने बच्चों के लिए सुरक्षा मांगी गई थी। सरकार व उपराज्यपाल से स्कूल को अपने नियंत्रण में लेने की मांग की गई थी।

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