फरीदाबाद में कॉलोनियों के विकास शुल्क का ब्याज माफ होगा, कारोबार के लिए लाइसेंस लेना जरूरी होगा
फरीदाबाद नगर निगम सदन की बजट बैठक 28 मार्च को होगी। बजट में नियमित हुई कॉलोनियों से वसूले जाने वाले विकास शुल्क का ब्याज माफ करने की संभावना जताई जा रही है। अगर ऐसा होता है तो यह लोगों के लिए बड़ी राहत होगी। बजट में करोबारियों के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य किया जा सकता है।

फरीदाबाद नगर निगम सदन की बजट बैठक 28 मार्च को होगी। बजट में नियमित हुई कॉलोनियों से वसूले जाने वाले विकास शुल्क का ब्याज माफ करने की संभावना जताई जा रही है। अगर ऐसा होता है तो यह लोगों के लिए बड़ी राहत होगी। इसके अलावा करोबारियों के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य किया जा सकता है।
फरीदाबाद नगर निगम सदन की बजट बैठक 28 मार्च को दोपहर 12 बजे निगम सभागार में किया जाएगा। मेयर प्रवीण जोशी ने इनके आदेश जारी कर दिए हैं। बजट में नियमित हुई कॉलोनियों से वसूले जाने वाले विकास शुल्क का ब्याज माफ करने की संभावना जताई जा रही है। अगर ऐसा होता है तो यह लोगों के लिए बड़ी राहत होगी।
अनिवार्य हो सकता है लाइसेंस लेना
नगर निगम प्रशासन ने नए वित्त वर्ष के लिए करीब 2250 करोड़ रुपये का संभावित बजट तैयार किया है। जिसका करीब 60 फीसदी पैसा विकास कार्यों पर खर्च किया जाएगा। लेकिन निगम में आमदनी कम और खर्चा ज्यादा अधिकारियों के सामने चुनौती बनी हुई है।
सूत्रों के मुताबिक इसका समाधान तलाशने के लिए अधिकारियों ने कारोबारियों पर शुल्क बढ़ाने और लगाने की तैयारी की है। निगम अधिनियम 1994 के तहत कारोबारियों को लाइसेंस लेना होता है। शहर में कारोबारी ज्यादा हैं, लेकिन लाइसेंस लेने वाले कम हैं। सभी को लाइसेंस लेना अनिवार्य करना होगा और जो पुराना शुल्क है, उसमें बढ़ोतरी की संभावना है। हालांकि सदन में बजट पास होने के बाद ही इस पर फैसला लिया जाएगा।
मूल राशि वसूलने की रणनीति
नगर निगम को नियमित हुई कॉलोनियों से विकास शुल्क मिलने के रूप में आमदनी होने की उम्मीद है। निगम को यहां से करीब 150 करोड़ शुल्क मिलने की उम्मीद है। सूत्रों के मुताबिक काफी कॉलोनियों के काफी लोग विकास शुल्क नहीं अदा कर रहे हैं। इसकी वजह से लोगों पर ब्याज बढ़ता जा रहा है।
इस ब्याज को माफ करके मूल राशि वसूलने की रणनीति निगम प्रशासन बना रहा है। ताकि बकाया राशि।की रिकवरी हो सके। गौरतलब है कि अवैध कॉलोनियों को नियमित करने के बाद वहां विकास कार्य करवाने के लिए निगम लोगों से विकास शुल्क लिया जाता है। प्रति गज के हिसाब से यह वसूला जाता है।
जमीन बेचने से निगम को राजस्व मिलेगा
फायर टैक्स, तहबाजारी टैक्स, जमीन को लीज और फ्री होल्ड जमीन से भी आमदनी की उम्मीद है। हरियाणा सरकार ने नगर निगम को 20 साल से उसकी जमीन पर कब्जा करके रहने वालों को अपनी जमीन बेचने की मंजूरी दे दी है। ऐसे में नगर निगम को उम्मीद है कि जमीन बेचने से भी निगम को काफी राजस्व मिल सकता है, क्योंकि निगम की काफी जमीन पर लोगों ने कब्जा किया हुआ है।




साइन इन