Extorting even one rupee by threatening someone is a crime of extortion: Delhi Court किसी को धमकाकर उससे एक रुपये लेना भी वसूली का अपराध : दिल्ली कोर्ट, Ncr Hindi News - Hindustan
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किसी को धमकाकर उससे एक रुपये लेना भी वसूली का अपराध : दिल्ली कोर्ट

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने जबरन वसूली से जुड़े 15 वर्ष पुराने मामले में कहा है कि किसी व्यक्ति को डरा-धमकाकर उससे एक रुपये भी लिया जाए तो वह उगाही का अपराध माना जाएगा।

Mon, 9 March 2026 06:20 AMPraveen Sharma हिन्दुस्तान, नई दिल्ली, निखिल पाठक
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किसी को धमकाकर उससे एक रुपये लेना भी वसूली का अपराध : दिल्ली कोर्ट

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने जबरन वसूली से जुड़े 15 वर्ष पुराने एक मामले में कहा है कि किसी व्यक्ति को डरा-धमकाकर उससे एक रुपये भी लिया जाए तो वह उगाही का अपराध माना जाएगा। न्यायिक मजिस्ट्रेट अंकित गर्ग की अदालत ने कहा कि जबरन वसूली का अपराध तब माना जाता है, जब किसी व्यक्ति को चोट या नुकसान का डर दिखाकर उससे पैसे या संपत्ति हासिल की जाती है। इसके लिए वसूली गई राशि का सटीक मिलान या पूरी रकम की बरामदगी अनिवार्य शर्त नहीं है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने इस मामले के दो आरोपियों को दोषी ठहराया है। साथ ही एक महिला आरोपी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है।

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मयंक मिश्रा और संजीव कुमार को दोषी ठहराया

अदालत ने कहा कि इस अपराध की गंभीरता को सिद्ध करने के लिए सबसे मौलिक और अनिवार्य प्रश्न केवल यह है कि क्या पैसे का लेन-देन आरोपी द्वारा पैदा किए गए खौफ की वजह से हुआ था और यदि पीड़ित की गवाही इस पर अडिग रहती है तो आरोपी को दोषी ठहराने के लिए वह पर्याप्त है। सभी साक्ष्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद अदालत ने मयंक मिश्रा और संजीव कुमार को दोषी ठहराया, जबकि अर्चना को बरी कर दिया।

फर्जी स्टिंग से बनाया दबाव

यह मामला दिसंबर 2011 में नारायणा थानाक्षेत्र का है। मेरा मेडिकोज मेडिकल स्टोर चलाने वाले संदीप तंवर को एक सोची-समझी साजिश के तहत शिकार बनाया गया। मामले के मुख्य आरोपी मयंक मिश्रा ने पहले एक ग्राहक बनकर दुकान से दवा खरीदी और फिर बाद में फर्जी स्टिंग की सीडी लेकर दुकान पहुंचा, जिसमें दुकान के अंदर की रिकॉर्डिंग थी। मयंक ने दावा किया कि उसके पास बिना पर्चे की दवा बेचने के सबूत हैं। इसके जरिये उसने दुकानदार को डराना शुरू कर दिया। मयंक के साथ एक अन्य आरोपी संजीव कुमार ने खुद को रसूखदार बताते हुए पीड़ित को धमकी दी कि यदि पांच लाख रुपये नहीं दिए, तो वे दुकान का लाइसेंस रद्द कराकर उसे सड़क पर ला देंगे।

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बचाव पक्ष की दलीलें खारिज

बचाव पक्ष ने दलील दी कि यह मामला लगभग 15 साल पुराना है और गवाहों को तारीखें याद नहीं हैं। साथ ही मौके पर कोई स्वतंत्र गवाह नहीं था। अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि एक दशक बाद गवाह की याददाश्त में मामूली चूक होना स्वाभाविक है और यह गवाही की विश्वसनीयता को कम नहीं करता।

दुकान बंद करवाने की धमकी दी गई थी

शिकायतकर्ता के मुताबिक, इसके बाद उसे फोन कॉल भी आए, जिनमें खुद को ममता बताने वाली महिला ने कहा कि पैसे नहीं देने पर दुकान बंद करवा दी जाएगी। लगातार धमकियों और दबाव के बीच आरोपियों ने उससे 10 हजार रुपये ले लिए और बाकी रकम लेने के लिए फिर आने की बात कही। इस बीच पीड़ित ने पुलिस को सूचना दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने जाल बिछाया और आरोपी दोबारा पैसे लेने दुकान पर पहुंचे तो उन्हें मौके से पकड़ लिया।

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