‘रिश्ता शादी जैसा, बस कानून…’; लिव-इन रिलेशन पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश के तहत माना है कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले दो बालिग लोग एक साथ रहने के लिए स्वतंत्र हैं। उनकी निजी जिंदगी में परिवार का दखल उचित नहीं।

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश के तहत माना है कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले दो बालिग लोग एक साथ रहने के लिए स्वतंत्र हैं। उनकी निजी जिंदगी में परिवार का दखल उचित नहीं। हाईकोर्ट ने इस मामले में लिव-इन रिलेशन में रह रहे युवक-युवती को पुलिस सुरक्षा देने के आदेश दिए हैं।
जस्टिस सौरभ बनर्जी की बेंच ने अपने आदेश में दोहराया कि साथी (पार्टनर) चुनने का अधिकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 व 21 से मिलता है। बेंच ने लिव-इन रिलेशनशिप में रहे एक युवक-युवती की सुरक्षा याचिका को मंजूर कर लिया है।
इस मामले में युवती ने हाईकोर्ट से सुरक्षा की मांग करते हुए कहा था कि उसके पिता, रिश्तेदार व परिचितों की तरफ से उन्हें धमकियां मिल रही हैं। उन्हें कहा जा रहा है कि अगर वह अलग नहीं हुए तो उन्हें जान से मार दिया जाएगा। इस जोड़े का यह भी कहना था कि युवती के परिवार की तरफ से लगातार धमकियां मिल रही हैं। इसलिए उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए।
एक तरह से यह शादी का है रिश्ता
बेंच ने अपने आदेश में कहा कि जिस लिव-इन रिलेशनशिप में याचिकाकर्ता (युवक-युवती) हैं, वह रिश्ता एक तरह से शादी जैसा है। हालांकि, कानूनी तौर पर नहीं है। बेंच ने कहा कि भारत में शादी को तभी मान्यता दी जाती है, जब वह दो लोगों की सहमति से हो, चाहे उनकी जाति, पंथ, रंग, धर्म या आस्था कुछ भी हो। वास्तव में भारत का संविधान अपने अनुच्छेद 19 के रूप में मौलिक अधिकार की गारंटी देता है।
दोनों सहमति से रह रहे
याचिकाकर्ता की तरफ से पेश वकील ने कहा कि यह जोड़ा जिनका जन्म क्रमशः वर्ष 2006 व वर्ष 2007 में हुआ, अब बालिग हैं। ये दोनों वर्ष 2024 से रिलेशनशिप में हैं और अभी साथ में रह रहे हैं। बेंच को बताया गया कि इस जोड़े ने 17 फरवरी को एक लिव-इन रिलेशनशिप समझौता भी किया है। यह भी कहा गया कि युवती के पिता इस रिश्ते से खुश नहीं हैं। वह धमकियां दे रहे हैं। इस जोड़े की याचिका मंजूर करते हुए बेंच ने कहा कि दोनों बालिग हैं। वे आपसी सहमति से अपनी पसंद का पार्टनर चुन सकते हैं।
क्या होता है लिव-इन रिलेशन
बता दें कि, लिव-इन रिलेशन एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें दो वयस्क लोग (महिला और पुरुष) बिना शादी किए एक ही घर में पति-पत्नी की तरह साथ रहते हैं। यह आपसी सहमति और विश्वास पर आधारित रिश्ता है, जहां साथी एक-दूसरे की भावनात्मक और वित्तीय जिम्मेदारियों को साझा करते हैं। भारतीय कानून में भी इसे मान्यता प्राप्त है। घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के तहत, लंबे समय तक साथ रहने वाले जोड़ों को कुछ कानूनी अधिकार और सुरक्षा दी गई है, ताकि महिलाओं के हितों की रक्षा हो सके।




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