Dowry harassment case in India after divorce in America is not acceptable : Delhi High Court अमेरिका में तलाक के बाद भारत में दहेज उत्पीड़न केस स्वीकार नहीं : दिल्ली हाईकोर्ट, Ncr Hindi News - Hindustan
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अमेरिका में तलाक के बाद भारत में दहेज उत्पीड़न केस स्वीकार नहीं : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि एक ही अपराध में दो देशों में अलग-अलग मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी एक महिला के अमेरिका में तलाक लेने के बाद दिल्ली में दर्ज कराए गए दहेज उत्पीड़न के केस को रद्द करते हुए की।  

Tue, 3 March 2026 07:03 AMPraveen Sharma हिन्दुस्तान, नई दिल्ली, हेमलता कौशिक
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अमेरिका में तलाक के बाद भारत में दहेज उत्पीड़न केस स्वीकार नहीं : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि एक ही अपराध में दो देशों में अलग-अलग मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी एक महिला के अमेरिका में तलाक लेने के बाद दिल्ली में दर्ज कराए गए दहेज उत्पीड़न के केस को रद्द करते हुए की। कोर्ट ने इसे कानून का दुरुपयोग करार दिया है।

जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की बेंच ने कहा कि महिला अमेरिका में पति से तलाक ले चुकी है। समझौते की रकम भी ले चुकी है। अब भारत लौटने पर उसने ससुरालवालों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया है। बेंच ने कहा कि पहली बात महिला पति के साथ विदेश में रह रही थी। निश्चित तौर पर घरेलू हिंसा या दहेज प्रताड़ना का अपराध भी वहीं हुआ होगा। वहां उसने इसके खिलाफ मामला दायर किया। इसी के तहत पति-पत्नी के बीच समझौता हुआ और एक तय रकम लेकर दोनों में सहमति से तलाक हो गया। दूसरी बात एक ही कथित अपराध के लिए दो देशों में कानूनी प्रक्रिया शुरू करना इसका दुरुपयोग है। बेंच ने इस मामले में दहेज प्रताड़ना के आरोपी पति व ससुराल पक्ष के खिलाफ दर्ज मुकदमे को रद्द कर दिया है।

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अमेरिकी अदालत में किए गए दावे से फंसी महिला

इस मामले में महिला वहां फंस गई जब पति की तरफ से हाईकोर्ट के समक्ष वह दस्तावेज पेश किया गया, जिसमें महिला ने पति से अमेरिका की अदालत में तलाक लेते हुए कहा था कि उनके बीच अब सबकुछ सुलझ गया है। बेंच ने कहा कि महिला उन्हीं वैवाहिक विवादों को भारत में आपराधिक मुकदमे के माध्यम से दोबारा नहीं उठा सकती।

दोनों का 2017 में दिल्ली में हुआ था विवाह

महिला का विवाह जुलाई 2017 में दिल्ली में हुआ था। इसके बाद वह पति के साथ अमेरिका चली गई थी। दो साल बाद दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया। 17 मई 2019 को पति ने अमेरिका की अदालत में तलाक याचिका दायर की। 27 मई 2019 को महिला ने जवाबी कार्रवाई में यूएस पुलिस को घरेलू हिंसा की शिकायत दी। अमेरिकी पुलिस ने जांच के बाद पति को पीड़ित पाया और पत्नी को आरोपी बनाते हुए गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, पति ने पत्नी पर कोई आरोप नहीं लगाया, इसलिए पुलिस ने उसे रिहा कर दिया। महिला ने दूसरी बार घरेलू हिंसा की शिकायत की। इस बार भी वह पति पर आरोप साबित नहीं कर सकी। इस बीच महिला ने अगस्त 2019 में दिल्ली में भी घरेलू हिंसा व दहेज प्रताड़ना की शिकायत दे दी। जनवरी 2020 में अमेरिका में पति-पत्नी ने सहमति से तलाक ले लिया। साथ ही भरण-पोषण व अन्य वैवाहिक भुगतान के तौर पर एकमुश्त रकम भी दिला दी गई।

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एक साल बाद दर्ज कराया मुकदमा

पत्नी ने दिसंबर 2020 में दिल्ली में मुकदमा दर्ज करा दिया। इस एफआईआर में पति व ससुराल पक्ष के अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया। पति ने इसके खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटया। बेंच ने तथ्यों पर गौर किया और कहा कि कोई भी पक्ष एक ही समय में समझौते का लाभ ले रहा है और दूसरी तरफ उसी कारण अथवा कथित अपराध के आधार पर आपराधिक कार्रवाई जारी रख रहा है। यह कानून की नजर में स्वीकार करने योग्य नहीं है।

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