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बचपन से बीमार, स्कूल भी नहीं गए; नई दिल्ली को संवारने वाले लुटियंस के आर्किटेक्ट बनने की कहानी

नई दिल्ली के सबसे खूबसूरत इलाके को हम लुटियंस दिल्ली के नाम से जानते हैं। इसे बनाने वाले महान ब्रिटिश आर्किटेक्ट लुटियंस अभी चर्चा में हैं, क्योंकि जिस राष्ट्रपति भवन को उन्होंने बनाया था, वहां से उनकी प्रतिमा हटा दी गई है। बचपन में गठिया बुखार के कारण वह इतना कमजोर थे कि वे स्कूल भी नहीं जा सके।

Thu, 26 Feb 2026 10:17 AMSubodh Kumar Mishra लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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बचपन से बीमार, स्कूल भी नहीं गए; नई दिल्ली को संवारने वाले लुटियंस के आर्किटेक्ट बनने की कहानी

नई दिल्ली के सबसे खूबसूरत इलाके को हम लुटियंस दिल्ली के नाम से जानते हैं। इसे बनाने वाले महान ब्रिटिश आर्किटेक्ट लुटियंस अभी चर्चा में हैं, क्योंकि जिस राष्ट्रपति भवन को उन्होंने बनाया था, वहां से उनकी प्रतिमा हटा दी गई है। की बेटी के अनुसार, बचपन में गठिया बुखार के कारण वह इतना कमजोर थे कि स्कूल भी नहीं जा सके। उनकी शिक्षा एक लेडी टीचर के पाठों और बड़े भाई से मिली कुछ शिक्षा का मिलाजुला रूप थी।

एडविन लुटियंस का जन्म 29 मार्च 1869 को हुआ था। वह अपने 13 भाई-बहनों में दसवें नंबर पर थे। उनका नाम उनके पिता के मित्र, चित्रकार-मूर्तिकार सर एडविन लैंडसियर के नाम पर एडविन रखा गया था। एडविन लुटियंस को भी आगे चलकर नाइट की उपाधि मिली और वे सर बन गए। उनका परिवार कला जगत से जुड़ा हुआ था। उनके पिता कैप्टन चार्ल्स ऑगस्टस हेनरी लुटियंस एक सैनिक और चित्रकार थे।

एडविन लुटियंस के प्रारंभिक जीवन के बारे में उनकी बेटी के लिखे लेखों से जानकारी मिलती है। लुटियंस की विरासतों को संरक्षित करने के लिए स्थापित लुटियंस ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित अपने लेखों में मैरी लुटियंस ने बताया है कि उनके पिता लंदन के ओन्सलो स्क्वायर और सरे के थर्सले में रहने वाले चार्ल्स और मैरी लुटियंस के तेरह बच्चों के परिवार में दसवें बच्चे और नौवें लड़के थे।

मैरी लुटियंस के अनुसार, उनके पिता का उपनाम नेड था। बचपन में ही गठिया बुखार के कारण वह इतना कमजोर हो गए थे कि किसी पब्लिक स्कूल या विश्वविद्यालय नहीं गए। उनकी शिक्षा एक लेडी टीचर के पाठों और बड़े भाई से मिली कुछ शिक्षा का मिलाजुला रूप थी। उनकी बेटी कहती हैं कि उनका बचपन सरे के ग्रामीण इलाकों में इमारतों को बनते हुए देखने में बीता। वह एकांत में घंटों बैठकर इमारतों को बनते देखते थे।

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उनकी बेटी लिखती हैं कि उनके पिता ने ऑस्बर्ट सिटवेल से कहा था कि उनके अंदर जो भी प्रतिभा है, वह बचपन में हुई एक लंबी बीमारी के कारण है। उसने उन्हें सोचने का समय दिया। खराब स्वास्थ्य के कारण उन्हें खेल खेलने की इजाजत नहीं थी, इसलिए उन्हें अपने मनोरंजन के लिए अपने पैरों की बजाय अपनी आंखों का उपयोग करना सीखना पड़ा।

लुटियंस औपचारिक स्कूली शिक्षा से वंचित रह गए। उन्हें चित्रकारी और गणित में विशेष रुचि थी। कहा जाता है कि उन्होंने जो कुछ देखा उसे चित्रित करने की एक अनोखी विधि विकसित की थी। वे एक छोटा सा साफ कांच का टुकड़ा, एक पेननाइफ और साबुन के टुकड़े साथ रखते थे। वे कांच के माध्यम से किसी इमारत को देखते थे और साबुन के टुकड़े के नुकीले किनारे का उपयोग करके उसके हिस्सों की रूपरेखा बनाते थे।

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हालांकि, युवा होने के बाद उन्होंने कुछ समय तक साउथ केंसिंग्टन स्कूल में पढ़ने के बाद पढ़ाई छोड़ दी और कुछ वास्तुकारों के कार्यालय में ट्रेनी के रूप में काम किया। 1888 में 19 साल की आयु में अपना खुद का व्यवसाय शुरू किया।

लुटियंस द्वारा निर्मित संरचना के कारण ही इसे 'लुटियंस की दिल्ली' कहा जाने लगा। यह लगभग 26 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र है। इसमें कम ऊंचाई और कम घनत्व वाले बंगले, वृक्षों से घिरी सड़कें और धार्मिक भवन हैं। लुटियंस और उनके सहयोगियों ने 1920 से 1940 के दशक के बीच इन भवनों की रूपरेखा तैयार की थी।

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