shalimar bagh demolition drive after deadline end heavy police force deployed दिल्ली के शालीमार बाग में बड़ा बुलडोजर एक्शन, भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कई बहुमंजिला अवैध इमारतें ध्वस्त, Delhi Hindi News - Hindustan
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दिल्ली के शालीमार बाग में बड़ा बुलडोजर एक्शन, भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कई बहुमंजिला अवैध इमारतें ध्वस्त

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई तब तक जारी रहेगी, जब तक निर्धारित क्षेत्र में स्थित सभी अवैध संरचनाओं (स्ट्रक्चरों) को हटाकर सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए भूमि उपलब्ध नहीं करा दी जाती।

Sun, 31 May 2026 05:48 PMMohit हिन्दुस्तान, राहुल मानव, नई दिल्ली
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दिल्ली के शालीमार बाग में बड़ा बुलडोजर एक्शन, भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कई बहुमंजिला अवैध इमारतें ध्वस्त

दिल्ली के शालीमार बाग गांव में रविवार को भारी पुलिस व सुरक्षा बलों की मौजूदगी में अवैध इमारतों को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया। इस दौरान पुरे शालीमार बांग गांव के आसपास के क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया। आगे की इमारतों के हिस्सों की बिजली को काट दिया गया। शालीमार बाग गांव के आने-जाने के दोनों सड़क मार्गों को प्रशासन व दिल्ली पुलिस ने आम ट्रैफिक के लिए बंद कर दिया। इस दौरान दिन भर ड्रोन के जरिए भी पूरे क्षेत्र की सर्विलांस की गई। इस बीच पीड़ित लोगों ने इस कार्रवाई पर रोष प्रकट किया। दिल्ली पुलिस के सिपाही व सुरक्षा बल शालीमार बाग गांव की गलियों में दिन भर मौजूद रहे। प्रशासन ने रविवार सुबह छह व सात बजे से कार्रवाई शुरू की, जो शाम तक जारी रही। इस मामले प्रशासन ने 143 अवैध इमारतों को ध्वस्त किया। दर्जनों बुलडोजर के जरिए अवैध इमारतों व अवैध निर्माण को ध्वस्त किया गया।

इस मामले पर स्थानीय प्रशासन ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखने के बाद रविवार सुबह से शालीमार बाग स्थित गांव हैदरपुर क्षेत्र में रोड नंबर-320 के निर्धारित राइट ऑफ वे के भीतर बने अवैध निर्माणों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई तब तक जारी रहेगी, जब तक निर्धारित क्षेत्र में स्थित सभी अवैध संरचनाओं (स्ट्रक्चरों) को हटाकर सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए भूमि उपलब्ध नहीं करा दी जाती।

पीड़ित अपने सामान लेकर जाते दिखे

कई पीड़ित परिवार प्रशासन की कार्रवाई के बीच अपने कीमती सामानों को ले जाते हुए नजर आए। कई पीड़ित परिवार व लोगों ने कार्रवाई पर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया कि 50 वर्षों से अधिक समय तक रहने के बाद संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों के होने के बाद और बिजली-पानी कनेक्शन, आधार कार्ड व वोटर कार्ड होते हुए भी यह कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए थी। पीड़ित लोगों ने आरोप लगाया कि देश में अब प्रशासन, सरकार व सरकारें आम नागरिकों को किफायती दरों पर मकान व घर उपलब्ध कराने में विफल रही हैं। वे न ही मकान दे सकते हैं और न ही बेहतर रोजगार के अवसर नागरिकों को प्रदान कर सकते हैं।

न्यायालय के आदेशों के अनुपालन के तहत कार्रवाई हुई

इस संबंध में मध्य-उत्तर जिला के जिलाधिकारी (डीएम) एस.एस. परिहार ने बताया कि यह कार्रवाई न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में की गई। संबंधित भूमि अधिग्रहित सरकारी भूमि है, जो दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के मास्टर प्लान में सार्वजनिक सड़क के रूप में चिन्हित है। यह रोड नंबर-320 के निर्धारित राइट ऑफ वे का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि यह सड़क शालीमार बाग रेलवे अंडर ब्रिज (आरयूबी) को आउटर रिंग रोड से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण यातायात गलियारे का हिस्सा है। यह मार्ग रिंग रोड, आजादपुर, शालीमार बाग तथा आसपास के बड़े आवासीय, व्यावसायिक और संस्थागत क्षेत्रों को जोड़ता है। इसके माध्यम से अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों और विकसित हो रहे प्रशासनिक परिसरों तक पहुंच सुनिश्चित होती है। उन्होंने कहा कि सड़क की वर्तमान चौड़ाई अतिक्रमणों के कारण गंभीर रूप से प्रभावित हुई है, जिससे नियमित यातायात जाम की स्थिति उत्पन्न होती है और एम्बुलेंस, अग्निशमन वाहनों और अन्य आपातकालीन सेवाओं को आवागमन में कठिनाई का सामना करना पड़ता है।

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मुआवजा प्रक्रिया पहले पूरी हो गई थी

डीएम के अनुसार संबंधित भूमि का अधिग्रहण दिल्ली के नियोजित विकास के लिए वर्ष 1959 और 1961 की अधिसूचनाओं के माध्यम से प्रारंभ किया गया था। वर्ष 1966 में भूमि अधिग्रहण की घोषणा जारी की गई और वर्ष 1980 में अवार्ड संख्याएं घोषित किए गए। जुलाई 1980 में भूमि का कब्जा लिया गया और वर्ष 1981 में शेष मुआवजा राशि भी जमा करा दी गई। इस प्रकार भूमि अधिग्रहण व मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया चार दशक से अधिक समय पहले पूरी हो चुकी थी।

भूमि का सीमांकन व संयुक्त सर्वेक्षण किया

डीएम परिहार ने कहा कि वर्ष 2025 में डीडीए, राजस्व विभाग, भूमि एवं भवन विभाग और लोक निर्माण विभाग द्वारा संयुक्त रूप से टोटल स्टेशन मेथड (टीएसएम) तकनीक से भूमि का वैज्ञानिक सीमांकन कराया गया। 10 जनवरी 2026 को किए गए संयुक्त सर्वेक्षण में पाया गया कि निर्धारित 30 मीटर राइट ऑफ वे के भीतर कुल 143 अनधिकृत पक्के निर्माण मौजूद हैं। इनमें लगभग 19.5 मीटर क्षेत्र में मौजूदा सड़क है, जबकि लगभग 10.5 मीटर क्षेत्र अतिक्रमण के कारण अवरुद्ध हैं।

न्यूनतम हस्तक्षेप का सिद्धांत अपनाया

डीएम परिहार ने बताया कि प्रशासन ने परियोजना के क्रियान्वयन में न्यूनतम हस्तक्षेप का सिद्धांत अपनाया है। हालांकि, स्वीकृत राइट ऑफ वे 30 मीटर है, फिर भी वर्तमान चरण में सिर्फ आवश्यक 10.5 मीटर क्षेत्र में ही कार्रवाई की जा रही है, ताकि अधिकतम संख्या में संरचनाओं को बचाया जा सके और जनहित और न्यूनतम विस्थापन के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।

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जनवरी में दिए गए नोटिस

डीएम ने जानकारी दी कि जनवरी 2026 में सार्वजनिक नोटिस जारी कर प्रभावित व्यक्तियों से आपत्तियां आमंत्रित की गई थीं। नोटिस प्रमुख समाचार पत्रों में भी प्रकाशित किए गए। सभी आपत्तियों पर विचार करने के बाद भूमि अधिग्रहण कलेक्टर द्वारा 20 मार्च 2026 को आदेश पारित किया गया। उन्होंने कहा कि इसके उपरांत कुछ निवासियों द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर भूमि अधिग्रहण को वर्ष 2013 के कानून की धारा 24(2) के अंतर्गत समाप्त घोषित करने और प्रशासनिक कार्रवाई को चुनौती देने का प्रयास किया गया। न्यायालय के समक्ष सरकार ने रिकॉर्ड प्रस्तुत किया कि भूमि का अधिग्रहण वैध रूप से पूरा हो चुका है, मुआवजा जमा कराया जा चुका है और कब्जा भी लिया जा चुका है।

अप्रैल में याचिका खारिज हुई

परिहार ने बताया कि 6 अप्रैल 2026 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं के पास पूर्व-अधिग्रहण स्वामित्व के वैध दस्तावेज नहीं हैं। भूमि का अधिग्रहण वैध है और सार्वजनिक महत्व की सड़क परियोजना को रोका नहीं जा सकता। इसके बाद 18 मई 2026 को पुनर्विचार याचिका भी खारिज कर दी गई। उन्होंने बताया कि इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दायर की। 29 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में मामले की सुनवाई हुई और न्यायालय ने विशेष अनुमति याचिका खारिज करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा। इसके साथ ही प्रशासन के पक्ष को अंतिम न्यायिक स्वीकृति प्राप्त हो गई।

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विशेष सहायता पैकेज घोषित किया

डीएम परिहार ने कहा कि दिल्ली सरकार ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए प्रभावित पात्र परिवारों के लिए विशेष सहायता पैकेज भी घोषित किया है। इसके मद्देनजर प्रत्येक पात्र परिवार और इकाई को 3 लाख रुपये की एकमुश्त एक्स-ग्रेशिया सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त जिन परिवारों के पास दिल्ली में कोई वैकल्पिक आवास उपलब्ध नहीं है, उन्हें सावदा घेवरा स्थित आवासीय इकाइयों में 11 माह तक लाइसेंस आधारित अस्थायी आवास सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

यातायात व्यवस्था में सुधार होगा

डीएम परिहार ने कहा कि रोड नंबर-320 का चौड़ीकरण राजधानी की एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक अवसंरचना परियोजना है, जिसके पूरा होने से यातायात व्यवस्था में सुधार, आपातकालीन सेवाओं की सुगम आवाजाही और क्षेत्र के लाखों लोगों को बेहतर आवागमन सुविधा उपलब्ध होगी।

सुरक्षा बलों की दस कंपनियां तैनात की गई

उत्तर पश्चिमी जिले की पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) आकांक्षा यादव ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनजर सिविल एजेंसियों ने शालीमार बाग गांव में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की। इसमें दिल्ली पुलिस की तरफ से कानून व्यवस्था को लेकर तैयारी की गई। इसमें दिल्ली पुलिस, सीआरपीएफ, रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की दस कंपनियों की तैनाती गई। इस दौरान पूरे क्षेत्र की ड्रोन सर्विलांस से निगरानी की गई।

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