दिल्ली: मरीजों के परिजनों के लिए रात में रहने की व्यवस्था, NDMC ने उठाया ये कदम
एनडीएमसी अपने उन्हीं बारात घर और कम्युनिटी हॉल को नाइट शेल्टर में तब्दील कर रही है जिनकी पहले से कोई बुकिंग नहीं है। एनडीएमसी के इस फैसले से आम लोगों को भी कोई तकलीफ नहीं होगी।

नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने बड़े सरकारी अस्पतालों के आस-पास मौजूद अपने बारात घर और कम्युनिटी हॉल को मरीजों के परिजनों के लिए नाइट शेल्टर में बदल दिया है। एनडीएमसी के उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल ने एक बयान में कहा कि यह व्यवसथा दिल्ली हाई कोर्ट के दिशा-निर्देशों और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) के सहयोग से की जा रही है।
कम्युनिटी हॉल की उपलब्धता के आधार पर यह सुविधा 15 मार्च तक उपलब्ध रहेगी। एनडीएमसी अपने उन्हीं बारात घर और कम्युनिटी हॉल को नाइट शेल्टर में तब्दील कर रही है जिनकी पहले से कोई बुकिंग नहीं है।
कोर्ट ने दिखाई थी सख्ती
आपको बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों के बाहर फुटपाथ में सोते ठिठुरते लोगों को हो रही असुविधा को लेकर सरकार और एजेंसियों पर सख्ती दिखाई थी। दरअसल कोर्ट में एम्स के आस-पास मरीजों, उनके परिजनों के सबवे में कड़ाके की ठंड में सोने से जुड़े मामले में बीते शुक्रवार को सुनवाई हुई थी। इस दौरान कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली सरकार या उसकी एजेंसियां बेघर लोगों को आश्रय देने की अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती हैं।
संसाधनों की कमी का बहाना नहीं चलेगा
कोर्ट ने कहा था कि अस्पताल आने वाले लोग मजबूरी में आते हैं और ऐसे में संसाधनों की कमी का बहाना नहीं चलेगा। कोर्ट ने कहा था कि सभी एजेंसियों को सहयोग करना होगा वर्ना जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। कोर्ट की सख्ती के बाद ही एनडीएमसी ने ये फैसला लिया है।

देशभर से आते हैं मरीज
दरअसल दिल्ली के बड़े सरकारी अस्पतालों में देशभर से लोग ईलाज करवाने के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में आर्थित तंगी के चलते उनके पास रात में ठहरने की व्यवस्था नहीं होती और न ही अस्पताल प्रशासन के पास इतने संसाधन हैं कि वे इतनी भारी संख्या में मौजूद मरीजों और उनके परिजनों के लिए रात में ठहरने की व्यवस्था कर सकें।
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