निजी स्कूलों के EWS छात्रों को वर्दी के लिए नकद मिलेगा, दिल्ली सरकार के फैसले पर HC की मुहर
दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली सरकार के उस फैसले को सही ठहराया है, जिसमें निजी स्कूलों में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के छात्रों को उनकी वर्दी खरीदने के लिए सीधे नकद देने का फैसला किया गया था।

दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली सरकार के उस फैसले को सही ठहराया है, जिसमें निजी स्कूलों में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के छात्रों को उनकी वर्दी खरीदने के लिए सीधे नकद देने का फैसला किया गया था।
हाई कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को हर छात्र के लिए अलग-अलग आदेश प्रक्रिया करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। अधिकारियों को वर्दी देने के अपने पिछले निर्देश में बदलाव करते हुए पीठ ने फैसला सुनाया कि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के जरिए सब्सिडी देने का सरकार का फैसला शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम के आदेश के खिलाफ नहीं है। हाई कोर्ट ने आगे कहा कि इस तरीके से यह पक्का होगा कि छात्रों को उनकी वर्दी समय पर मिल जाए।
मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने दिल्ली सरकार से यह पक्का करने को कहा कि छात्रों को समय पर और जल्द से जल्द सही रकम दी जाए। पिछला आदेश गैर सरकारी संगठन जस्टिस फॉर ऑल की याचिका पर आया था। संगठन की तरफ से अधिवक्ता खगेश बी झा एवं अधिवक्ता शिखा शर्मा बग्गा ने सहायता व गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के छात्रों को मुफ्त किताबें, वर्दी और दूसरी पढ़ाई की सामग्री देने की मांग की गई थी।
दिल्ली सरकार ने पीठ को बताया कि उसकी कैबिनेट का मानना था कि कार्य संबंधी दिक्कतों की वजह से वर्दी खरीदना व बांटना मुमकिन नहीं होगा। इसलिए जून 2025 में वर्दी के लिए हर छात्र को 1250 रुपए से 1700 रुपए देने की एक नई योजना का निर्णय लिया है।




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