दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर: इन्फोटेनमेंट से लेकर रिक्लाइनर सीटों तक, नमो भारत में मिलेंगी ये सुविधाएं
ट्रैक की एलिवेटेड (पुल पर) लंबाई 70 किलोमीटर है तो वहीं अंडरग्राउंड 12.0 किलोमीटर है। ट्रैक का 14 किलोमीटर हिस्सा दिल्ली में बना गया है तो 68 किलोमीटर हिस्सा उत्तर प्रदेश में बना है। ट्रेनों के रखरखाव के लिए दुहाई और मोदीपुरम में दो डिपो बनाए गए हैं। प्रोजेक्ट की कुल लागत 30,274 करोड़ रुपये है।

नमो भारत हाई स्पीड ट्रेन (रैपिड रेल) के जरिए दिल्ली से मेरठ तक का सफर अब कुछ मिनटों में ही तय हो जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि नमो भारत कॉरिडोर के दिल्ली के सराय काले खां स्टेशन से लेकर मेरठ के मोदीपुरम तक पूरी तरह से तैयार हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 फरवरी को इसका उद्घाटन कर दिया।
सबसे पहले तो ये जान लीजिए कि ये पूरा ट्रैक 82.15 किलोमीटर लंबा है। इसमें से 55 किलोमीटर का हिस्सा, दिल्ली से मेरठ साउथ तक पहले ही आम जनता के लिए खोला जा चुका है। अब बाकी बचे 27 किलोमीटर यानी मेरठ साउथ से मोदीपुरम तक का संचालन शुरू होने जा रहा है। इसमें न्यू अशोक नगर से सराय काले खां के बीच 5 किलोमीटर और मेरठ साउथ से मोदीपुरम के बीच 21 किलोमीटर का सेक्शन है।

पूरे ट्रैक की लंबाई, दिल्ली-यूपी में कितना हिस्सा
ट्रैक की एलिवेटेड (पुल पर) लंबाई 70 किलोमीटर है तो वहीं अंडरग्राउंड 12 किलोमीटर है। ट्रैक का 14 किलोमीटर हिस्सा दिल्ली में है तो 68 किलोमीटर हिस्सा उत्तर प्रदेश में है। ट्रेनों के रखरखाव के लिए दुहाई और मोदीपुरम में दो डिपो बनाए गए हैं। प्रोजेक्ट की कुल लागत 30,274 करोड़ रुपये है। आपको बता दें कि नमो भारत हाई स्पीड ट्रेन की डिजाइन स्पीड 180 किलोमीटर प्रति घंटा है।
सुरक्षित और आरामदायक सफर
नमो भारत ट्रेनों में आमने-सामने की तरफ 2x2 सीटें लगाई गई हैं। खड़े होकर सफर करने वाले यात्रियों के लिए हाथ से पकड़ने वाले हैंडल और रेलिंग दी गई है। साथ ही सामान रखने के लिए ऊपरी रैक, चार्जिंग प्वाइंट भी हैं। ट्रेन में सुरक्षा के लिहाज से मजबूत और डबल कांच वाली बड़ी विंडो हैं, जिनसे बाहर का शानदार नजारा दिखता है। यात्रियों को सूचनाएं देने के लिए ट्रेन के अंदर अनाउंसमेंट सिस्टम, स्क्रीन पर रूट मैप और एंटरटेनमेंट के लिए डिस्प्ले लगे हैं। यात्रियों को अगले स्टेशन और मंजिल की जानकारी ऑडियो और वीडियो दोनों तरीके से मिलेगी।
ट्रेन के अंदर नहीं महसूस होगा बाहर का शोर
ट्रेन में हवा के दबाव और शोर को कम करने वाले खास ऑटोमैटिक दरवाजे लगे हैं। ट्रेन में सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम हैं। पूरी ट्रेन सीसीटीवी कैमरों, आग और धुएं का पता लगाने वाले सेंसर, अग्निशामक यंत्र और दरवाजों के इंडिकेटर से लैस है। दरवाजों पर 'पुश बटन' भी दिए गए हैं। इससे जिस यात्री को उतरना या चढ़ना है, वह बटन दबाकर दरवाजा खोल सकता है। इससे हर स्टेशन पर बेवजह सारे दरवाजे खोलने की जरूरत नहीं पडे़गी।
महिलाओं के लिए रिजर्व रखा
हर ट्रेन में एक 'प्रीमियम कोच' है, जिसमें ज्यादा जगह और आरामदायक रिक्लाइनर सीटें हैं। इस कोच के यात्रियों के लिए प्लेटफॉर्म पर अलग से 'लॉन्ज' की सुविधा भी है। एक कोच महिलाओं के लिए रिजर्व रखा गया है। पैसेंजर की सुरक्षा के लिए हर स्टेशन पर प्लेटफॉर्म पर स्क्रीन वाले दरवाजे लगे हैं, जो ट्रेन के दरवाजों के साथ ही खुलते और बंद होते हैं।
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