Delhi Assembly mysterious hanging House case Privileges Committee gives last chance to Arvind Kejriwal विधानसभा 'फांसीघर' मामला: केजरीवाल, सिसोदिया समेत 4 AAP नेताओं को अल्टीमेटम; क्या है मामला?, Delhi Hindi News - Hindustan
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विधानसभा 'फांसीघर' मामला: केजरीवाल, सिसोदिया समेत 4 AAP नेताओं को अल्टीमेटम; क्या है मामला?

विवाद की शुरुआत तब हुई जब साल 2021 में दिल्ली विधानसभा के तत्कालीन स्पीकर राम निवास गोयल ने दावा किया था कि विधानसभा परिसर में एक फांसी घर मिला है। उन्होंने दावा किया था कि वहां एक दीवार तोड़कर पहुंचा गया है।

Mon, 16 Feb 2026 07:25 PMMohit लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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विधानसभा 'फांसीघर' मामला: केजरीवाल, सिसोदिया समेत 4 AAP नेताओं को अल्टीमेटम; क्या है मामला?

दिल्ली विधानसभा परिसर में 'फांसीघर' के मामले पर एकबार फिर सियासी घमासान देखने को मिल सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, पूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, राम निवास गोयल और राखी बिरला को 'फांसी घर' मामले में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने और अपना पक्ष रखने के लिए अंतिम अवसर देने का निर्णय लिया है। सभी नेताओं को 6 मार्च 2026 को विशेषाधिकार समिति के सामने पेश होने के लिए कहा गया है। सोमवार को विशेषाधिकार समिति की बैठक में इस बात पर सहमति बनी है।

विशेषाधिकार समिति के अध्यक्ष प्रद्युम्न सिंह राजपूत ने बताया कि केजरीवाल ने अपने लिखित जवाब में 2, 3, 4, 5 या 6 मार्च में से किसी भी दिन पेश होने की बात कही थी तो अन्य तीन नेताओं ने कुछ दिनों का समय मांगा था। ऐसे में 6 मार्च की तारीख को फाइनल किया गया है ताकि जांच प्रक्रिया में और देरी न हो। समिति इस बात पर जोर दे रही है कि निष्पक्ष और व्यापक जांच को पूरा करने के लिए आप नेताओं का इस मामले में सहयोग देना अनिवार्य है।आपको बता दें कि इस मामले में केजरीवाल को आज यानी 16 फरवरी को पेश होने के लिए कहा गया था।

सोमवार को विशेषाधिकार समिति की बैठक में इस बात पर सहमति बनी है।

आपको बता दें कि इससे पहले विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट में कहा गया था कि केजरीवाल, गोयल, सिसोदिया और राखी बिरला ने 'फांसी घर' मामले में समिति के समक्ष 'जानबूझकर उपस्थित न होकर' सदन की अवमानना की है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल ये पूरा मामला दिल्ली विधानसभा की इमारत के एक कमरे के उद्घाटन को लेकर है। तत्कालीन मुख्यमंत्री केजरीवाल ने 9 अगस्त 2022 को कमरे को ब्रिटिश काल का 'फांसी घर' के रूप में पेश करते हुए इसको जेल जैसा बनाया और जेल बार, फंदे, स्वतंत्रता सेनानी की तस्वीरें आदि लगाईं।

वहीं स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने 1912 के नक्शे का हवाला देते हुए दावा किया कि इस जगह को कभी 'फांसी घर' के रूप में इस्तेमाल किए जाने का कोई रिकॉर्ड नहीं है। गुप्ता ने दावा किया कि आप सरकार ने जिसे सबके सामने 'फांसी घर' कहकर पेश किया वह असल में एक टिफिन रूम है। इसके बाद बीते साल अगस्त में इसका नाम बदलकर 'फांसी घर' से 'टिफिट रूम' कर दिया गया था।

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2021 में शुरू हुआ था विवाद

दरअसल विवाद की शुरुआत तब हुई जब साल 2021 में दिल्ली विधानसभा के तत्कालीन स्पीकर राम निवास गोयल ने दावा किया था कि विधानसभा परिसर में एक फांसी घर मिला है। उन्होंने दावा किया था कि वहां एक दीवार तोड़कर पहुंचा गया है।

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