'एक साल में विकसित दिल्ली की नींव रखी, बेहतर परिवहन से प्रदूषण नियंत्रित करेंगे : रेखा गुप्ता
दिल्ली में कोई भी जानलेवा हादसा होता है तो उसकी जवाबदेही सरकार की है। मैं पिछली सरकारों की तरह यह नहीं कहूंगी कि यह लापरवाही उनकी नहीं, दूसरों की है। जनकपुरी में हुआ हादसा बेहद दुखद है। ऐसे हादसे भविष्य में न हों, इसके लिए प्रशासन को ज्यादा सावधानी बरतनी होगी।

दिल्ली में सरकार बनने के साथ भाजपा ने विकसित दिल्ली बनाने का संकल्प लिया था। इसे पूरा करने के लिए दिल्ली सरकार ने अलग-अलग मोर्चों पर एक साल में तेजी से काम किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दावा किया कि उनकी सरकार ने पुरानी सरकार की ओर से फैलाई अव्यवस्था को ठीक करने के साथ विकसित दिल्ली के लिए नींव रखी है। पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, इन्फ्रास्ट्रक्चर, यमुना की सफाई, जनता की सुनवाई आदि के लिए बेहतर व्यवस्था तैयार हो चुकी है। आने वाले वर्षों में दिल्ली के विकास की रफ्तार बढ़ेगी। मुख्यमंत्री ने ‘हिन्दुस्तान’ के मेट्रो एडिटर गौरव त्यागी और प्रमुख संवाददाता अमित झा से लंबी बातचीत की। प्रस्तुत हैं प्रमुख अंश…
● भाजपा सरकार बने एक वर्ष होने जा रहा है। एक वर्ष के काम को कैसे देखती हैं?
हमने राजधानी के इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, यमुना की सफाई से लेकर अपनी चुनावी घोषणाओं को पूरा करने का प्रयास किया है। पिछली सरकार से हमें अव्यवस्था मिली। उन्हें दूर कर रहे हैं। पर्यावरण बेहतर करने और सार्वजनिक परिवहन सुधारने पर काम किया है। अब दिल्ली तेजी से विकास पथ पर दौड़ेगी। आने वाले समय में हम दिल्ली को तेजी से विकसित होते हुए देखेंगे।
● यमुना की स्वच्छता भाजपा का बड़ा संकल्प है। एक साल में सरकार ने क्या कदम उठाए हैं। कब यमुना को हम पुराने स्वरूप में पूरी तरह स्वच्छ देख सकते हैं?
यमुना में प्रदूषण बड़ी चुनौती है। शहर के भीतर मात्र 22 किलोमीटर गुजरने के बावजूद यह खंड नदी के कुल प्रदूषण भार में 70 फीसदी से अधिक का योगदान देता है। दिल्ली जल बोर्ड यमुना की सफाई पर मिशन मोड में काम कर रहा है। इस समय कार्यरत 37 एसटीपी (जल उपचार संयंत्र) में से 28 को सीपीसीबी/डीपीसीसी के नवीनतम मानकों के अनुरूप उन्नत किया गया है। इनकी कुल क्षमता 735.4 एमजीडी है। बाकी नौ को भी उन्नत कर रहे हैं। दिसंबर 2027 तक कुल सीवेज उपचार क्षमता 1038 एमजीडी होगी, जिसे दिसंबर 2028 तक 1500 एमजीडी करने की योजना है। यमुना में गिरने वाली 22 में से 10 ड्रेन टैप हो चुके हैं। महारानी बाग ड्रेन को जोड़ने का काम जारी है। बाकी आठ नालों के मुहाने पर एसटीपी की योजना है। नजफगढ़ और शाहदरा नालों को जोड़ने के लिए उनके एसटीपी बनाने की योजना है। डेयरियों, गौशालाओं और धोबी घाटों से उत्पन्न कचरे के प्रबंधन के लिए डीएसआईआईडीसी, एमसीडी, डीडीए काम कर रहे हैं। यमुना को साफ करना लंबी समय अवधि का काम है और इसमें कई प्रदेशों को योगदान देना है। हम आने वाले तीन वर्षों में सभी विभागों के प्रयास से इसके पैरामीटर एनजीटी के मानकों के अंदर लाने का लक्ष्य ले कर कार्य कर रहे हैं।
● आपने जिलों की संख्या बढ़ाकर 13 कर दी है। क्या विभिन्न विभागों की सीमा को एक करने से तालमेल बढ़ेगा। मिनी सचिवालय की जो योजना है, उससे लोगों को किस तरह का लाभ होगा?
दिल्ली में जिलों की संख्या 13 करना और अलग-अलग विभागों की सीमाओं को एक जैसा करना, मुख्य रूप से प्रशासन को सरल और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाने की दिशा में कदम है। पहले विभागों की अलग-अलग सीमाओं के कारण लोगों को यह समझने में परेशानी होती थी कि किस काम के लिए कहां जाना है। अब यह भ्रम काफी हद तक खत्म होगा। मिनी सचिवालय की व्यवस्था से जिला स्तर पर सभी प्रमुख विभाग एक ही परिसर में काम करेंगे। इससे लोगों को एक ही जगह पर अधिकतर सरकारी सेवाएं मिलेंगी, शिकायतें सीधे जिला मजिस्ट्रेट तक पहुंचेंगी और विभागों के बीच तालमेल भी बेहतर होगा। कुल मिलाकर, यह कदम बेहतर तालमेल, बेहतर सुविधा और बेहतर सुशासन की दिशा में उठाया गया है।
● चुनाव से पहले दो बड़े वादे थे। मुफ्त सिलेंडर का वादा आपने पूरा करने की घोषणा कर दी है, लेकिन महिलाओं को 2500 रुपये देने पर बनाई कमेटी कहां तक पहुंची है और कब तक महिलाओं को यह राशि उनके बैंक खाते में मिलेगी?
भाजपा ने चुनावी संकल्प पत्र में महिलाओं को 2500 रुपये प्रतिमाह देने का वादा किया था। सरकार इस पर काम कर रही है। दिल्ली में यह राशि किन महिलाओं को मिलनी चाहिए, देखा जा रहा है। सरकार नहीं चाहती कि कोई भी ऐसी महिला वंचित रहे, जिसका यह अधिकार है। इसके साथ ही हम यह भी सुनिश्चित करना चाहते हैं कि योजना बीच में बाधित न हो। सरकार इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए तैयारी में जुटी हुई है और काम पूरा होते ही दिल्ली की महिलाओं के बैंक खाते में 2500 रुपये की मासिक सहायता राशि भेजना शुरू किया जाएगा। योजना की सभी आवश्यकताओं के अनुसार पूर्णतया डिजिटल (एंड-टू-एंड) क्रियान्वयन के लिए एनआईसी एक पोर्टल बना रहा है। पोर्टल तैयार होने के पश्चात योजना के लिए पंजीकरण प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ की जाएगी।
● प्रदूषण और जलभराव ऐसी समस्याएं हैं जो हर साल आती हैं। बारिश के दौरान दिल्ली के कई इलाके जलभराव से प्रभावित होते हैं जबकि सर्दी बढ़ते ही प्रदूषण दिल्लीवासियों का सांस लेना मुश्किल कर देता है। इन दोनों ही परेशानियों से क्या निजात मिलेगी?
हम इस पर लगातार काम कर रहे हैं। जलभराव की समस्या से निपटने के लिए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने अपना मॉनसून एक्शन प्लान लागू कर दिया है। योजना के तहत बड़े और छोटे नालों की डी-सिल्टिंग कार्य निर्धारित समयसीमा के तहत किया जा रहा है। वर्ष 2026 में 2.33 लाख मीट्रिक टन गाद निकालने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से जनवरी से अब तक 16,900 मीट्रिक टन से अधिक गाद निकाली जा चुकी है। बारिश के दौरान जल निकासी के लिए 79 स्थायी और 465 अस्थायी पंपों की चौबीसों घंटे तैनाती सुनिश्चित की गई है। जलभराव की स्थिति से त्वरित निपटारे के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीम, नोडल अधिकारी, जोनल कंट्रोल रूम और वार्ड स्तर की टीमें सक्रिय रहेंगी तथा सभी अधिकारियों को वर्षा के दौरान तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिये जाएंगे।
इसी तरह दिल्ली में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए मैनुअल सफाई के साथ मैकेनिकल मशीनें लगी हैं। रोज 150 टन धूल एकत्र करके वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित की जाती है। धूल नियंत्रण को और प्रभावी बनाने के लिए 167 वाटर स्प्रिंकलर और 28 मोबाइल एंटी-स्मॉग गन तैनात की गई हैं। अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 तक 366 किलोमीटर सड़कों की मरम्मत की गई है और 27,578 गड्ढ़ों को भरा गया है। ऊंची इमारतों पर एंटी-स्मॉग गन लगाई हैं। विंटर एक्शन प्लान के तहत 1,385 अधिकारियों वाली 356 निगरानी टीमें खुले में कचरा जलाने, अवैध डंपिंग एवं धूल प्रदूषण की सतत जांच कर रही हैं, जिनके जरिए उल्लंघनकर्ताओं पर कार्रवाई की जाती है।
● अब गर्मियों का मौसम शुरू होने वाला है। अलग-अलग इलाकों में हर साल पानी की किल्लत देखने को मिलती है। क्या इस बार पानी की कमी दूर होगी?
हमने बीते छह माह में इस पर कार्ययोजना तैयार की है। दिल्ली में 210 नलकूप लगाए गए हैं। मार्च के अंत तक 150 अतिरिक्त नलकूप लगेंगे। यमुना बाढ़ क्षेत्र मैदान और जल समृद्ध इलाकों में 73 नलकूप लगाए गए हैं। इससे 15 से 20 एमजीडी अतिरिक्त पानी उपलब्ध होगा। गर्मियों में टैंकरों की संख्या, जितनी जरूरत होगी उतनी बढ़ाई जाएगी। सभी टैंकरों में जीपीएस लगाया गया है। इसके अतिरिक्त, बवाना जल शोधन संयंत्र में 2 एमजीडी क्षमता का एक रीसाइक्लिंग संयंत्र निर्माणाधीन है। यह अप्रैल तक पूरा हो जाएगा। द्वारका फेज-दो डब्ल्यूटीपी के लिए हरियाणा से जल लाने के प्रयास चल रहे हैं। पानी के वितरण नेटवर्क में लीकेज की पहचान और मरम्मत, पुरानी पाइप को बदलने और सभी घरों में मीटर लगा कर नॉन-रेवेन्यू वाटर में कमी लाने के कार्य चन्द्रावल डब्ल्यूटीपी क्षेत्र की नौ विधानसभाओं में इस वर्ष चालू करा दिए गए हैं। गर्मियों में दिल्लीवालों को पानी की किल्लत नहीं झेलनी पड़ेगी।
● डीटीसी में बसों की संख्या लगातार बढ़ रही है और रूट भी बदल रहे हैं। क्या एनसीआर के अन्य शहरों में भी डीटीसी बसें जल्दी चलती दिखाई देंगी?
वर्तमान में दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के पास कुल 5,809 बसें संचालित हैं। पिछले एक वर्ष के दौरान अब तक 1,881 नई बसें डीटीसी के बेड़े में जोड़ी गई हैं। हमने अंतर-राज्य बस रूटों को फिर शुरू किया है। आईएसबीटी से बड़ौत, आईएसबीटी से सोनीपत, धौलाकुआं से धारूहेड़ा और आईएसबीटी से पानीपत जैसे रूट शुरू किए गए हैं। इससे एनसीआर के बीच आना-जाना सुगम हुआ है। मेरठ-गाजियाबाद जैसे शहरों के लिए भी डीटीसी बसें चलाई जाएंगी। हमारा मानना है कि बेहतर परिवहन के लिए एनसीआर के शहरों के बीच सेवाएं होनी चाहिए। वर्ष 2029 तक दिल्ली का बस बेड़ा 14,000 तक बढ़ाया जाएगा। 31 मार्च 2026 तक 6,000 बसें, वर्ष 2027 तक 7,500, वर्ष 2028 तक 10,400 और वर्ष 2029 तक 14,000 बसें संचालित होंगी।
● लाडली योजना को बंद करके लखपति बेटी योजना शुरू करने की जरूरत क्यों पड़ी? इससे क्या लाभ होगा?
दिल्ली लखपति बिटिया योजना की परिकल्पना एक बड़े उद्देश्य को ध्यान में रखकर की गई है। इस योजना का मकसद बालिकाओं को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
पहले चल रही दिल्ली लाडली योजना में वित्तीय लाभ केवल 12वीं कक्षा तक ही प्रदान किया जाता था। किंतु वर्तमान सरकार का मत है कि बालिकाओं को कम से कम स्नातक स्तर की शिक्षा एवं कौशल विकास के लिए तकनीकी शिक्षा प्राप्त करनी चाहिए, ताकि उनके लिए अधिक विकल्प और अवसर उपलब्ध हो सकें। नई योजना में लाभार्थियों के पंजीकरण से लेकर परिपक्वता राशि के भुगतान तक संपूर्ण प्रक्रिया के एंड-टू-एंड डिजिटलीकरण का भी प्रस्ताव है। इससे प्रक्रिया में सरलता आएगी तथा पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी। पुरानी योजना में ऐसा डिजिटल मंच उपलब्ध नहीं था। नई योजना में वित्तीय लाभ की राशि को बढ़ाया गया है।
● जनकपुरी में गढ्ढे में गिरकर युवक की मौत हो गई। इस तरह के हादसों को सरकार किस तरह रोकेगी? हादसे के जिम्मेदारों पर क्या कार्यवाही होगी?
दिल्ली में अगर कोई भी जानलेवा हादसा होता है तो उसकी जवाबदेही सरकार की है। मैं पिछली सरकारों की तरह यह नहीं कहूंगी कि यह लापरवाही उनकी नहीं, बल्कि दूसरों की है। जनकपुरी में जिस प्रकार से हादसा हुआ, वह बेहद दुखद है। ऐसे हादसे भविष्य में न हों, इसके लिए प्रशासन को ज्यादा सावधानी बरतनी होगी। इस हादसे के बाद मैंने स्वयं सभी विभागों को निर्देश जारी किए हैं कि वह किसी भी जगह गड्ढा खोदने पर पूरी सावधानी बरतें। वहां मजबूत बैरिकेड एवं रिफ्लेक्टर लगाएं, गार्ड को तैनात किया जाए और अधिकारी खुद निगरानी रखें। इसके बावजूद अगर असावधानी से कहीं हादसा होता है तो उसके लिए सीधे अधिकारी जिम्मेदार होंगे और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
● पिछली सरकार दिल्ली में कामकाज में तालमेल के अभाव का आरोप लगाती थी। आपका अनुभव कैसा रहा है?
मौजूदा दिल्ली सरकार न केवल निगम एवं उपराज्यपाल बल्कि केन्द्र सरकार के साथ बेहतर तालमेल से काम कर रही है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में दिल्ली लरकार की ओर से लगातार विकास कार्य किए जा रहे हैं। पिछली सरकार केवल इसलिए तालमेल नहीं बना पाती थी, क्योंकि वह काम नहीं करना चाहती थी। आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं ने अन्ना हजारे से तालमेल नहीं रखा, जिन्होंने उन्हें यहां तक पहुंचाया। उन्होंने अपने सभी पुराने साथियों और सरकार में कार्यरत अधिकारियों से तालमेल नहीं रखा। अधिकारी को जब घर बुलाकर हाथापाई की जाएगी तो तालमेल कैसे बनेगा। अपनी महिला साथी को उन्होंने राज्यसभा तो भेजा, लेकिन घर बुलाकर उसके साथ दुर्व्यवहार किया। ऐसे नेताओं के लिए किसी से भी तालमेल कर पाना संभव नहीं है।
● चुनावों में शीशमहल को लेकर भाजपा ने बड़ा मुद्दा बनाया था। वह बनकर तैयार है, लेकिन भवन बंद है। सरकार उसका किस तरह इस्तेमाल करने की योजना बना रही है?
हम इस बात पर गंभीरता से चिंतन कर रहे हैं कि उस भवन का किस तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।
फीस वृद्धि रोकने का कानून जल्द लागू होगा
दिल्ली सरकार ने फीस वृद्धि रोकने के लिए कानून बनाया। अभी कुछ प्रशासनिक दिक्कतें थीं। लेकिन सरकार ने परिजनों के हित को ध्यान में रखते हुए यह कानून बनाया है। दिल्ली के 70 फीसदी से ज्यादा स्कूलों में कमेटी बन चुकी है जबकि अन्य में बनाने की प्रक्रिया चल रही है। इस कानून के बाद फीस बढ़ाने में स्कूलों की मनमानी नहीं चलेगी। यह कानून परिजनों के पास स्कूलों पर रख्ती का माध्यम है। सरकार इसे जल्द लागू करेगी।
अटल कैंटीन से मिली सबसे ज्यादा खुशी
बीते एक वर्ष में अटल कैंटीन खोलकर सबसे ज्यादा खुशी मिली। हमारा प्रयास है कि कोई भी भूखा न रहे। इसके लिए अटल कैंटीन खोली गईं हैं। लोग इससे बहुत खुश हैं। जल्द ही राजधानी में सौ अटल कैंटीन काम करना शुरू कर देंगी। दिल्ली सरकार ने अपने संकल्प पत्र में वादा किया था कि झुग्गी-झोपड़ी क्लस्टरों में अटल कैंटीन खोली जाएंगी, ताकि वहां रहने वाले जरूरतमंद लोगों को सस्ता और पौष्टिक भोजन मिल सके। हमने अपने इस वादे को धरातल पर उतारने का कार्य शुरू कर दिया है। अभी 46 अटल कैंटीन संचालित हो रही हैं, जिनमें मात्र 5 रुपये में लंच और डिनर उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक लगभग 13 लाख लोग इन कैंटीनों में भोजन कर चुके हैं। फरवरी के अंत तक 25 और अटल कैंटीनों का उद्घाटन किया जाएगा। शेष कैंटीनों को भी मार्च माह तक प्रारंभ करने का प्रयास रहेगा।
छात्रों को मेट्रो में किराये पर छूट देने की योजना
दिल्ली सरकार अपने छात्रों को बेहतर सुविधा देने के लिए प्रतिबद्ध है। छात्रों को डीटीसी में सस्ता पास दिया जाता है ताकि उनके स्कूल, कॉलेज जाने का परिवहन खर्च परिजनों पर न पड़े। दिल्ली सरकार छात्रों को मेट्रो में भी किराये में छूट देना चाहती है। लेकिन इस योजना को किस तरह से तैयार किया जाए, इसका लाभ किसे मिलना चाहिए और किस तरह इसका बेहतर इस्तेमाल हो, इसे लेकर विचार-विमर्श चल रहा है।
दिल्ली में प्रदूषण का बड़ा कारण वाहनों से निकलने वाला धुआं
रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सरकार मजबूत कर रही है। डीटीसी के बेड़े में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाई जा रही है तो मेट्रो की नई लाइनें बनाने का काम किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि बेहतर सार्वजनिक परिवहन से दिल्ली का प्रदूषण सुधरेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण का बड़ा कारण वाहनों से निकलने वाला धुआं है। यहां वाहनों का दबाव बहुत ज्यादा है, आबादी लगभग तीन करोड़ हो चुकी है। ऐसे में वाहनों के प्रदूषण को कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करना होगा। रेखा गुप्ता ने कहा कि एनसीआर को भी इलेक्ट्रिक बसों के माध्यम से जोड़ा जा रहा है। लास्ट माइल कनेक्टिविटी के लिए छोटी बसें चलाई जा रही हैं। अगले तीन वर्षों में दिल्ली में बसों का बेड़ा 14 हजार से ज्यादा होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में देश का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदूषण के लिए गाड़ियों के साथ खराब सड़कें भी जिम्मेदार हैं। दिल्ली सरकार सड़कों की गुणवत्ता सुधारने का काम कर रही है जिससे प्रदूषण में भी कमी आएगी।
छोटी गलियों से भी मिलेगी बस : मुख्यमंत्री ने बताया कि लास्ट माइल कनेक्टिविटी पर सरकार काम कर रही है। इससे छोटी गलियों से भी बसें मिलेंगी। इसके लिए नौ मीटर की 2,350 और सात मीटर की 500 बसें लगाई जा रही हैं। ये मेट्रो नेटवर्क से जुड़ेंगी। सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने वालों को घर तक पहुंचने में आसानी होगी। मेट्रो की तीन नई लाइनों को अभी सरकार ने मंजूरी दी है।




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