शराब नीति मामला: 'जज बदलने' वाली अर्जी पर HC ने CBI से मांगा जवाब, केजरीवाल क्या बोले?
सोमवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने केजरीवाल के आवेदन पर सीबीआई को नोटिस जारी किया। वहीं सीबीआई का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि आवेदन में लगाए गए आरोप बेबुनियाद, परेशान करने वाले और अवमाननापूर्ण हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा दायर एक आवेदन पर सीबीआई से जवाब मांगा है। केजरीवाल ने आवेदन में दिल्ली आबकारी नीति मामले में ट्रायल कोर्ट के उन्हें और 22 अन्य को बरी करने के आदेश के खिलाफ एजेंसी की अपील की सुनवाई से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के हटने (रिक्यूजल) की मांग की है।
सोमवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने केजरीवाल के आवेदन पर सीबीआई को नोटिस जारी किया। वहीं सीबीआई का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि आवेदन में लगाए गए आरोप बेबुनियाद, परेशान करने वाले और अवमाननापूर्ण हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि राजधानी में यह घटनाक्रम बहुत गंभीर प्रकृति का है। मेहता ने दलील दी कि कोर्ट नौटंकी का मंच नहीं है और अगर केजरीवाल मामले में व्यक्तिगत रूप से पेश होना चाहते हैं, तो उन्हें अपने वकील को हटा देना चाहिए।
केजरीवाल ने खुद अपनी दलीलें दीं
वहीं सुनवाई के दौरान केजरीवाल व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहे और खुद ही अपनी दलीलें भी पेश कीं। उन्होंने कहा कि वह आवेदन पर खुद बहस करेंगे और उन्होंने हाई कोर्ट को यह भी बताया कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अपनी वह याचिका वापस ले ली है, जिसमें उन्होंने इस मामले को जस्टिस शर्मा की बेंच से किसी दूसरे जज के पास भेजने की मांग की थी। अब इस अर्जी पर अगली सुनवाई 13 अप्रैल को होगी।
कोर्ट से बाहर निकलकर क्या बोले केजरीवाल?
सुनवाई के बाद कोर्ट परिसर में केजरीवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ‘मामला विचाराधीन है। यह एक संवेदनशील मुद्दा है। मैं इस मामले पर मीडिया में कुछ नहीं बोलूंगा। अगली सुनवाई सोमवार को दोपहर 2:30 बजे होगी। मैं अपना पक्ष रखूंगा।’
लोअर कोर्ट से मिली थी राहत
आपको बता दें कि सीबीआई को फटकार लगाते हुए लोअर कोर्ट ने 27 फरवरी को केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था। कोर्ट ने फैसले में कहा था कि सीबीआई के आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद साबित हुए हैं और केस न्यायिक कसौटी पर खरा ही नहीं उतर सका। इसके बाद लोअर कोर्ट के फैसले के खिलाफ सीबीआई ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की। मामले में केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य आरोपियों ने 11 मार्च को अर्जी दायर कर कहा था कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के समक्ष मामले की सुनवाई निष्पक्ष और तटस्थ नहीं होगी।
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