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यमुना सफाई के लिए दिल्ली का मेगा प्लान, सभी कच्ची कॉलोनियों में बिछेंगी सीवर लाइन

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यमुना को साफ करने के लिए 1799 कच्ची कॉलोनियों को सीवर से जोड़ने और एसटीपी क्षमता बढ़ाकर 1500 एमजीडी करने का निर्देश दिया है, जिसे दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

Thu, 22 Jan 2026 05:46 AMAnubhav Shakya हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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यमुना सफाई के लिए दिल्ली का मेगा प्लान, सभी कच्ची कॉलोनियों में बिछेंगी सीवर लाइन

यमुना को साफ करने के लिए राजधानी की सभी 1799 कच्ची कॉलोनियों को सीवर लाइन से जोड़ा जाएगा। फैसले की वजह गंदे पानी को सीधे यमुना में पहुंचने से रोकना है। इसके साथ ही सीवरेज ट्रीटमेंट की क्षमता 814 से बढ़ाकर 1500 एमजीडी की जाएगी। यह फैसला बुधवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में लिया गया।

मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों को यमुना की सफाई के लिए मिशन मोड में एक्शन प्लान लागू करने के निर्देश दिए। यमुना की सफाई के लिए हरियाणा और यूपी सरकार से समन्वय करने की भी बात कही।

यमुना की हालत और सीवेज ट्रीटमेंट पर चर्चा

दिल्ली के सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश साहिब सिंह की मौजूदगी में हुई बैठक में यमुना की मौजूदा हालत, सीवेज ट्रीटमेंट, नालों की सफाई और कच्ची कॉलोनियों में सीवर लाइन बिछाने की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार वैज्ञानिक योजनाओं, तय समयसीमा और पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर यमुना को साफ और जीवंत बनाने का काम कर रही है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में अभी 37 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) मिलकर रोजाना 814 मिलियन गैलन प्रतिदिन (एमजीडी) गंदा पानी साफ कर रहे हैं, जो मौजूदा जरूरत के हिसाब से काफी है। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इनकी क्षमता बढ़ाकर 1500 एमजीडी की जाएगी। इसके लिए पुरानी मशीनों को सुधारकर दिसंबर 2027 तक 56 एमजीडी और 35 नए छोटे डी-सेन्ट्रलाइज्ड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (डीएसटीपी) लगाकर 170 एमजीडी की अतिरिक्त क्षमता बढ़ाई जाएगी।

नालों के पास नए बड़े प्लांट लगाकर दिसंबर 2028 तक 460 एमजीडी क्षमता और बढ़ाई जाएगी, ताकि दिल्ली के सीवेज मैनेजमेंट को और बेहतर किया जा सके। इससे गंदा पानी अब यमुना में नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यमुना को निर्मल करने के लिए पड़ोसी राज्यों से भी समन्वय बनाना होगा। बैठक में बताया गया कि नजफगढ़ ड्रेन में हरियाणा राज्य के छह नाले आकर मिलते हैं, जो कुल दूषित पानी का 33 प्रतिशत है। इसके अलावा शाहदरा ड्रेन में गाजियाबाद से चार बड़े नाले आकर गिरते हैं, जो कुल दूषित पानी का करीब 40 प्रतिशत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मसले को लेकर वह दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री से समाधान पर बात करेंगी।

जेजे क्लस्टर्स को सीवर लाइन से जोड़ा जा रहा

मुख्यमंत्री ने बताया कि कच्ची कॉलोनियों और जेजे क्लस्टर्स में सीवर लाइन बिछाने का काम तेजी से किया जा रहा है। 675 जेजे क्लस्टर्स में से 574 में काम पूरा हो चुका है, जबकि 65 क्लस्टर्स में सीवेज इकट्ठा करने के लिए सिंगल पॉइंट कलेक्शन की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा, 1799 कच्ची कॉलोनियों में सीवर नेटवर्क का काम दिसंबर 2026 से दिसंबर 2028 तक चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। इससे गंदा पानी बिना साफ हुए यमुना में जाने से रुकेगा।

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नालों की निगरानी के लिए ड्रोन सर्वे शुरू

मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली के नालों की निगरानी के लिए पहली बार पुख्ता सिस्टम बनाया गया है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की टीमें 47 तय स्थानों पर हर महीने पानी की जांच कर रही हैं। नजफगढ़ और शाहदरा नालों से जुड़े सभी छोटे नालों की पहचान और जांच ड्रोन सर्वे के जरिए जनवरी 2026 तक पूरी कर ली जाएगी। बाकी नालों का सर्वे दिल्ली जल बोर्ड जून 2026 तक पूरा करेगा। उन्होंने बताया कि यमुना में गिरने वाले 22 बड़े नालों की ड्रोन से मैपिंग की जाएगी। इस कवायद का मकसद यह पता लगाना है कि कहां से और कितना प्रदूषण यमुना में मिल रहा है।

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‘यमुना पुनर्जीवन मिशन 2028 तक पूरा करेंगे’

बैठक में कैबिनेट मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने बताया कि वर्ष 2028 तक यमुना पुनर्जीवन मिशन के तहत दिल्ली में सभी प्रमुख नालों और सीवर से जुड़े कार्य पूरे कर लिए जाएंगे। दिल्ली सरकार और एमसीडी के सभी संबंधित विभाग एकीकृत, समयबद्ध कार्ययोजना के तहत कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि डीडीए भूमि सहित पूरे शहर में सीवर नेटवर्क के विस्तार का कार्य तेजी से कर रहा है। इस समयसीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

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विशेष कमेटी का गठन होगा

सीवर लाइन की निगरानी के लिए मुख्यमंत्री ने एक विशेष कमेटी बनाने के निर्देश दिए। इसका मकसद सीवर लाइन बिछाने के लिए सड़क काटने और फिर उसे तुरंत ठीक करने के काम में होने वाली देरी को रोकना है। वहीं, उन्होंने कहा कि नियोजित औद्योगिक क्षेत्रों में लगे अपशिष्ट उपचार संयंत्र (सीईटीपी) की लगातार जांच की जाए कि वे ठीक से काम कर रहे हैं। गैर नियोजित क्षेत्रों में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर सख्ती की जाए और उल्लंघन करने वालों को दंडित किया जाए।

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