विवेक विहार अग्निकांड: जन्मदिन के जश्न से पहले जिंदा जल गईं तीन पीढ़ियां, भाई को मिलाते रह गए फोन
दिल्ली के विवेक विहार में हुए भीषण अग्निकांड में 9 लोगों की दर्दमान मौत हो गई। इनमें एक ही परिवार के पांच लोग भी शामिल है जिसे इस भयावह आग ने निगल लिया।

दिल्ली के विवेक विहार में हुए भीषण अग्निकांड में 9 लोगों की दर्दमान मौत हो गई। इनमें एक ही परिवार के पांच लोग भी शामिल है जिसे इस भयावह आग ने निगल लिया। मृतकों में बुजुर्ग दंपति, बेटे-बहू और डेढ़ साल का पोता शामिल हैं। ये पूरा परिवार रविवार को एक बच्चे का जन्मदिन मनाने रविवार को मानेसर जाने वाला था।
पूरे धूमधाम से जन्मदिन मनाने की तैयारी थी। शनिवार की रात 12 बजे वीडियो कॉल पर सभी उसे जन्मदिन की बधाई दी और केक भी कटा था। इसके साढ़े तीन घंटे बाद ही लगी भयंकर आग की चपेट में आकर 62 साल के अरविंद जैन, उनकी पत्नी अनीता जैन, 34 साल का बेटा निशांक जैन, बहू आंचल जैन और डेढ़ साल का पोता अक्षय की दर्दनाक मौत हो गई। निशांक को भी जन्मदिन में शामिल होने सपरिवार मानेसर जाना था, लेकिन तबीयत खराब होने के कारण वह नहीं गए।
रिश्तेदारों का कहना है कि नियती को शायद कुछ और ही मंजूर था तभी उन सबको रोक लिया। मृतक बुजुर्ग के रिश्तेदार संजय जैन ने भावुक होते हुए बताया कि अरविंद जैन उनके बहनोई थे। पहले उनका कारोबार था। उनका बड़ा बेटा दीपक जैन सीएस है और छोटा बेटा निशांक सीए था। उसकी पत्नी आंचल भी बैंक में प्रबंधक थी। पूरा परिवार करीब 300 वर्ग गज में बने फ्लैट में एक ही जगह रहता था। दीपक के पांच साल के बेटे अनंत का रविवार को जन्मदिन था। दीपक परिवार के साथ मानेसर गए थे। निशांक को भी सपरिवार वहां जाना था पर तबीयत खराब होने के कारण नहीं गए थे।
निशांक फोन कर भाई और अन्य मदद मांगते रहे
निशांक ने मदद के लिए बड़े भाई के अलावा कुछ अन्य लोगों को भी फोन किया था। उनके पिता अरविंद जैन के एक दोस्त मनोज जैन ने बताया कि 2 बजे उनकी अरविंद जैन ने बात हुई थी। रात ढाई बजे अपना काम करके सो गया। सुबह जगा तो फोन पर निशांक के दो मिस्ड कॉल थे। एक तड़के 3:50 बजे और दूसरा सुबह चार बजे का कॉल था। फोन साइलेंट मोड में होने के कारण फोन उठा नहीं पाया। मुझे इसका अफसोस रहेगा कि फोन नहीं उठा पाया।
यूपी पुलिस को 20 मिनट तक लगता रहा फोन
आपातकालीन मदद की कॉल उत्तर प्रदेश पुलिस के पास पहुंचने से हादसे की सूचना संबंधित एजेंसियों तक पहुंचाने में करीब 20 मिनट की देरी हुई। स्थानीय लोगों के मुताबिक, हादसे के तुरंत बाद उन्होंने पुलिस और दमकल विभाग को फोन कर सूचना देने की कोशिश की, लेकिन बार-बार कॉल उत्तर प्रदेश पुलिस के कंट्रोल रूम में लगती रही।




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