Delhi Vivek Vihar Fire Tragedy Survivor Pranshuk Loses Parents and Brother in Devastating Blaze 9 burnt alive विवेक विहार अग्निकांड में प्रांशुक परिवार में अकेला बचा, हादसे में माता-पिता और भाई को खो दिया, Ncr Hindi News - Hindustan
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विवेक विहार अग्निकांड में प्रांशुक परिवार में अकेला बचा, हादसे में माता-पिता और भाई को खो दिया

Vivek Vihar Fire Tragedy: दिल्ली के विवेक विहार में हुए भीषण अग्निकांड में 9 लोग जिंदा जल गए। परिवार की तीन पीढ़ियां जलकर राख हो गईं। इस हादसे में सिर्फ परिवार का बेटा प्रांशुक ही बच सका। घटना के वक्त वह घर पर नहीं था।

Mon, 4 May 2026 06:00 AMGaurav Kala नई दिल्ली
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विवेक विहार अग्निकांड में प्रांशुक परिवार में अकेला बचा, हादसे में माता-पिता और भाई को खो दिया

Vivek Vihar Fire Tragedy: दिल्ली के विवेक विहार अग्निकांड में पिता नितिन जैन, मां शैली जैन और भाई सम्यक को खोने वाले प्रांशुक जैन अब परिवार में अकेले बचे हैं। घटना से पहले प्रांशुक महाकाल के दर्शन करने उज्जैन चले गए थे। उनकी गैर मौजूदगी में हुए इस भीषण हादसे में घर में मौजूद पिता नितिन जैन, मां शैली जैन और बड़े भाई सम्यक जैन की जान चली गई।

घटना के बाद रिश्तेदारों ने प्रांशुक को फोन पर सूचना दी तो वे दिल्ली लौटे। सम्यक क्रॉस रिवर मॉल में रेस्तरां चलाते थे, जबकि उनके पिता का अलग कारोबार था। उन्होंने बताया कि परिवार की सुख-शांति की कामना लेकर प्रांशुक महाकाल के दर्शन करने गए थे, जबकि उनकी दादी कुछ दिनों पहले ही अपने दूसरे बेटे के पास सूरजमल विहार चली गई थीं।

प्रांशुक को नहीं पता था कि वहां से लौटने पर वह कभी अपने माता-पिता व भाई से नहीं मिल पाएंगे। हादसे के बाद वह किसी से बात नहीं कर रहा है।

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बागपत से 50 वर्ष पहले दिल्ली आया था परिवार

विवेक विहार अग्निकांड में जान गंवाने वाले नितिन जैन का परिवार करीब 50 साल पहले बागपत के बिनौली क्षेत्र के रंछाड़ गांव को छोड़कर दिल्ली आ गया था। हादसे में नितिन जैन उनकी पत्नी शैलेय जैन व पुत्र सम्यक जैन की मौत की खबर से उनके पैतृक गांव में मातम छाया है। परिवार पिछले माह ही गांव के जैन मंदिर में धार्मिक आयोजन में शामिल हुआ था।

अस्पताल की इमरजेंसी और मॉर्चरी में रही भीड़

नई दिल्ली। अवकाश का दिन होने के बावजूद रविवार को जीटीबी अस्पताल की इमरजेंसी व मॉर्चरी में काफी व्यस्तता रही। अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि सुबह घटना की सूचना मिलने के बाद ही अस्पताल की इमरजेंसी व सभी विभागाध्यक्षों को अलर्ट कर दिया गया था। इस वजह से बर्न सहित कई विभागों के डॉक्टर इमरजेंसी में पहले ही पहुंच गए थे।

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ग्राउंड फ्लोर पर पार्किंग का स्थान

इस इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर वाहनों की पार्किंग के लिए जगह और लिफ्ट लगी हुई है। हादसे के दौरान पहली मंजिल पर दोनों ओर बने फ्लैट में रहने वाले लोग आग की चपेट में आने से बच गए और उन्हें सकुशल बचा लिया गया। दमकल की करीब 14 गाड़ियों का उपयोग किया गया आग बुझाने के लिए।

चौथी मंजिल

यहां पीछे बने फ्लैट में रहने वाले नितिन जैन, शैली और उनके बेटे सम्यक जैन ने आग लगने पर छत की ओर जाने का प्रयास किया। छत की ओर जाते वक्त सीढ़ियों का दरवाजा लॉक था, जिस कारण परिवार ऊपर नहीं जा सका और आग व धुएं की चपेट में आ गया।

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तीसरी मंजिल

यहां पीछे की ओर बने फ्लैट में मौजूद एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई। इसमें अरविंद, उनकी पत्नी अनीता जैन, बेटा निशांक जैन, बहू आंचल जैन और डेढ़ वर्षीय पोता आकाश जैन शामिल हैं। आगे बने फ्लैट के लोग बचा लिए गए।

यहां से कूदीं बेटियां

दूसरे तल पर स्थित बने फ्लैट में आग लगने पर यहां रहने वाले नवीन जैन ने अपनी दोनों बेटियों को इमारत का किनारे वाला कांच तोड़कर दूसरी मंजिल से कुदा दिया। वे पड़ोसियों की मदद से नीचे बिछाए गद्दे पर गिरीं।

दूसरी मंजिल

इस तल पर स्थित पीछे के फ्लैट से आग शुरू हुई। हादसे में नवीन जैन की पत्नी शिखा की मौत हो गई। वहीं, बेटियों और घर आए शिखा के माता-पिता अरुण और दर्शाना को बचाने के दौरान नवीन बुरी तरह झुलस गए।

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