दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने एनएच-44 पर लेजर स्पीड गन का किया ट्रायल, 151 चालान; क्या है प्लान?
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने एनएच-44 पर नई हैंडहेल्ड लेजर स्पीड गन का सफल ट्रायल किया है। इस दौरान 151 वाहनों के चालान काटे गए। क्या है इस ट्रायल का मकसद? जानने के लिए पढ़ें यह रिपोर्ट…

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने लिबासपुर बस स्टैंड इलाके में एनएच-44 कॉरिडोर पर हैंडहेल्ड लेजर स्पीड गन का ट्रायल किया है। अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि ट्रायल के तहत शहर भर में हाई-रिस्क और हाई-स्पीड कॉरिडोर पर नियमों के अनुपालन को मजबूत करने के लिए शुक्रवार को 5 हैंडहेल्ड लेजर स्पीड कैमरों का टेस्ट किया गया। इस दौरान ओवरस्पीडिंग के लिए 151 चालान काटे गए। ये आधुनिक डिवाइस संवेदनशील क्षेत्रों में नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने में मदद करेंगे।
ओवर स्पीडिंग पर कंट्रोल की तैयारी
अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि ये नए डिवाइस तय स्पीड लिमिट से तेज चलने वाली गाड़ियों का सही पता लगाने में मदद करेंगे। संवेदनशील जगहों, खासकर इंडस्ट्रियल और अधिक ट्रैफिक वाले जोन में नियमों के अनुपालन को मजबूत करेंगे।
ओवरस्पीडिंग पर लगेगी लगाम
अधिकारियों के अनुसार, एनएच-44 जैसे दुर्घटना संभावित हिस्सों पर मौतों को कम करने के लिए जागरूकता पहलों और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार के साथ-साथ स्पीड कंट्रोल पर ध्यान देना जरूरी है। चूंकि इस जोन में ओवरस्पीडिंग और लेन पालन नहीं करने से दुर्घटनाएं देखी जाती हैं। ऐसे में इन गन का इस्तेमाल ओवरस्पीडिंग पर लगाम लगाने के लिए किया जा सकता है।
हादसे वाला जोन
लिबासपुर बस स्टैंड इलाका एक इंडस्ट्रियल जोन में है। इस जोन में ट्रकों और कॉमर्शियल गाड़ियों की भारी आवाजाही होती है। इस जोन में काफी सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि 2018 और 2023 के बीच लिबासपुर इलाके में 68 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 28 जानलेवा हादसे शामिल हैं।
दान में मिले हैं कैमरे
अधिकारियों ने बताया कि ये लेजर स्पीड कैमरे दान किए गए थे। इन्हें ग्लोबल रोड सेफ्टी पार्टनरशिप (GRSP) की ओर से ब्लूमबर्ग फिलैंथ्रोपीज इनिशिएटिव फॉर ग्लोबल रोड सेफ्टी (BIGRS) के तहत मुहैया कराया गया था।
ग्लोबल रोड सेफ्टी पार्टनरशिप एशिया पैसिफिक मैनेजर ब्रेट हरमन ने कहा कि प्रभावी स्पीड कंट्रोल से सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है। यह ओवर स्पीडिंग से होने वाली मौतों और चोटों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने सुरक्षित यातायात और प्रूफ बेस्ड सुरक्षा उपायों को बढ़ावा देने के लिए BIGRS फ्रेमवर्क के तहत दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के साथ लगातार सहयोग का स्वागत किया।




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