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दिल्ली को मिलने जा रहा पहला महिला थाना, SHO से लेकर सभी स्टाफ महिलाएं होंगी

दिल्ली पुलिस राजधानी में शहर का पहला महिला थाना खोलने जा रही है। यह एक प्रायोगिक परियोजना होगी और अगले कुछ हफ्तों में इसके खुलने की संभावना है। इस थाने में महिलाओं के खिलाफ सभी अपराधों से निपटा जाएगा। यह महिलाओं के लिए समर्पित थाने के रूप में कार्य करेगा।

Wed, 8 April 2026 08:25 AMSubodh Kumar Mishra हिन्दुस्तान टाइम्स, नई दिल्ली
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दिल्ली को मिलने जा रहा पहला महिला थाना, SHO से लेकर सभी स्टाफ महिलाएं होंगी

दिल्ली पुलिस राजधानी में शहर का पहला महिला थाना खोलने जा रही है। यह एक प्रायोगिक परियोजना होगी और अगले कुछ हफ्तों में इसके खुलने की संभावना है। इस थाने में महिलाओं के खिलाफ सभी अपराधों से निपटा जाएगा। यह महिलाओं के लिए समर्पित थाने के रूप में कार्य करेगा।

दिल्ली पुलिस उत्तरी दिल्ली के सब्जी मंडी पुलिस स्टेशन परिसर में महिलाओं के खिलाफ सभी अपराधों से निपटने के लिए शहर का पहला महिला थाना खोलने जा रही है। इससे अवगत तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने एचटी को यह जानकारी दी। एक अधिकारी ने बताया कि पिछले कुछ हफ्तों से इस पर काम चल रहा है। हाल ही में यह निर्णय लिया गया कि पहला ऐसा पुलिस थाना उत्तरी जिले में स्थापित किया जाएगा। इसकी प्रक्रिया पर काम जारी है।

समर्पित थाने के रूप में कार्य करेगा

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अगर सब्जी मंडी स्थित पुलिस स्टेशन में कोई समस्या आती है तो वे दूसरे विकल्प के तौर पर दिल्ली कैंट पुसमर्पित थाने के रूप में कार्य करेगालिस स्टेशन पर भी विचार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह एक , जहां महिलाओं से संबंधित सभी अपराध दर्ज किए जाएंगे और उनकी जांच की जाएगी। उम्मीद है कि इसे सब्जी मंडी स्थित महिला अपराध प्रकोष्ठ (सीएडब्ल्यू) के मौजूदा परिसर में ही स्थापित किया जाएगा।

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शिकायतों के जल्दी निपटारे की उम्मीद

अधिकारियों ने कहा कि ऐसे मामलों के पंजीकरण और जांच को एक समर्पित थाने में केंद्रीकृत करके प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने, जवाबदेही बढ़ाने और शिकायतों का त्वरित निपटान सुनिश्चित करने की उम्मीद करते हैं। वर्तमान में महिलाओं के खिलाफ अपराधों से संबंधित शिकायतों का निपटारा स्थानीय थानों और सीएडब्ल्यू प्रकोष्ठों द्वारा किया जाता है।

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मामले दर्ज और जांच किए जाएंगे

सीएडब्ल्यू इकाइयां केवल दहेज के आरोपों पर दर्ज मामलों की जांच कर सकती हैं और वैवाहिक विवादों से संबंधित शिकायतों का निपटारा कर सकती हैं। वे औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कर सकतीं। दूसरी ओर, महिला थाना एक मानक पुलिस स्टेशन की तरह काम करेगा, जहां मामले दर्ज और जांच किए जाएंगे। नए मॉडल के थाने में मारपीट, पीछा करना और उत्पीड़न जैसे गंभीर अपराधों की जांच भी की जाएगी।

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एक तीसरे अधिकारी ने बताया कि रेप, छेड़छाड़ और नाबालिग लड़कियों से जुड़े पोक्सो मामलों और महिलाओं के खिलाफ सभी गंभीर अपराधों की सुनवाई इसी थाने में की जाएगी। उन्होंने कहा कि अभी इस बात पर विचार चल रहा है कि महिला हत्या और महिला पीड़ित के खिलाफ साइबर अपराध की जांच यहां की जाएगी या नहीं।

नियमित थाने की तरह काम करेगा

वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस थाने में पूरी तरह से महिला कर्मचारी होंगी और इसकी प्रमुख भी एक महिला अधिकारी ही होंगी। यह एक नियमित थाने की तरह काम करेगा और टीम का नेतृत्व करने के लिए एक स्टेशन हाउस ऑफिसर नियुक्त किया जाएगा। इसका उद्देश्य महिला शिकायतकर्ताओं के लिए एक विशेष, संवेदनशील और सुलभ स्थान बनाना है, जहां अपराधों की रिपोर्ट करना और सहायता मांगना भयभीत करने वाला न हो।

बाद में इसे अन्य जिलों में भी खुलेगा

अधिकारियों ने बताया कि यह कदम दिल्ली पुलिस द्वारा महिलाओं के खिलाफ अपराधों के प्रति अपनी प्रतिक्रिया को मजबूत करने के प्रयासों का हिस्सा है। इस पहल को पायलट आधार पर उत्तरी दिल्ली में शुरू किया जाएगा और बाद में इसे अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि यह साइबर थाना मॉडल के समान है, जिसे पहले कुछ चुनिंदा जिलों में शुरू किया गया था और बाद में इसका विस्तार किया गया।

देश के कई राज्यों में ऐसा मॉडल

देश के कई राज्यों ने पहले ही इस तरह के मॉडल आजमाए हैं। तेलंगाना की महिला टीम और समर्पित महिला थानों को रिपोर्टिंग और प्रतिक्रिया समय में सुधार लाने का श्रेय दिया जाता है। तमिलनाडु में भी लंबे समय से सभी जिलों में महिला थाना संचालित हैं। राजस्थान और उत्तर प्रदेश ने भी लिंग आधारित अपराधों से निपटने के लिए थानों के भीतर महिला-विशेष इकाइयां शुरू की हैं। दिल्ली पुलिस ने भी पिंक बूथ शुरू किए थे, लेकिन ड्यूटी पर तैनात महिलाओं को पर्याप्त अधिकार न होने के कारण यह पहल सफल नहीं हो पाई।

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