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पहले फंसाते, फिर ब्लैकमेल करके लूटते; दिल्ली में 'स्टिकर गैंग' की मदद करने वाले 2 पुलिसकर्मी गिरफ्तार

क्राइम ब्रांच ने लंबे समय से चल रहे स्टिकर के नाम पर उगाही करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में दो पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों की तैनाती दक्षिणी दिल्ली में तैनात एएसआई जितेंद्र और उत्तर पश्चिमी जिले के आदर्श नगर में तैनात सिपाही प्रवीण के रूप में हुई है।

Tue, 7 April 2026 03:11 PMRatan Gupta लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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पहले फंसाते, फिर ब्लैकमेल करके लूटते; दिल्ली में 'स्टिकर गैंग' की मदद करने वाले 2 पुलिसकर्मी गिरफ्तार

क्राइम ब्रांच ने लंबे समय से चल रहे स्टिकर के नाम पर उगाही करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में दो पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों की तैनाती दक्षिणी दिल्ली में तैनात एएसआई जितेंद्र और उत्तर पश्चिमी जिले के आदर्श नगर में तैनात सिपाही प्रवीण के रूप में हुई है।

पहले रिश्वत लेने के लिए उकसाते

जांच में खुलासा हुआ है कि दोनों आरोपी इस रैकेट में मिडिलमैन और फिक्सर की भूमिका निभा रहे थे। पुलिस ने बताया कि यह गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को निशाना बनाता था। गैंग के सदस्य पहले पुलिसकर्मियों को रिश्वत लेने के लिए उकसाते फिर बातचीत व हरकतों को छिपे कैमरों में रिकॉर्ड कर लेते थे।

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वीडियो एडिटिंग के जरिए करते ब्लैकमेल

इसके बाद इन वीडियो को एडिट कर ऐसा बनाया जाता था, जिससे पुलिसकर्मी भ्रष्टाचार में लिप्त नजर आएं। इसके बाद शुरू होता था ब्लैकमेलिंग का खेल। आरोपियों द्वारा पुलिसकर्मियों को धमकी दी जाती थी कि यदि मोटी रकम नहीं दी गई तो वीडियो सोशल मीडिया और विभाग में वायरल कर दिए जाएंगे। नौकरी और प्रतिष्ठा बचाने के दबाव में कई पुलिसकर्मी इस जाल में फंसकर पैसे देने को मजबूर हो जाते थे। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार एएसआई और कॉन्स्टेबल गैंग को ऐसे पुलिसकर्मियों की जानकारी देते थे जो दबाव में आ सकते थे या जिनके खिलाफ पहले से शिकायतें थीं।

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प्रतिबंध के बीच वाहनों के प्रवेश से जुड़ा है मामला

यह गिरोह बड़े सुनियोजित ढंग से काम करता था। गिरोह ट्रांसपोर्टरों को अवैध एंट्री स्टिकर बेचता था। जिनके जरिए वाहनों को दिल्ली में बिना रोक-टोक प्रवेश का झांसा दिया जाता था, चाहे नो-एंट्री नियम हों या प्रदूषण संबंधी प्रतिबंध। इस गिरोह ने इलाके के हिसाब से स्टिकर तय कर रखे थे। इसमें कई पुलिसकर्मियों से सांठगांठ भी की गई थी। वहीं, कई पुलिसकर्मियों को गिरोह फर्जी वीडियो का डर दिखाकर मोटी रकम वसूलता था। दूसरी ओर ट्रांसपोर्टरों से भी रकम वसूली जाती थी।

गिरोह से जुड़े 10 आरोपी अब तक पकड़े जा चुके

क्राइम ब्रांच की मानें तो इस मामले में अब तक कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें तीन प्रमुख गैंग लीडर राजू मीणा, जीशान अली और रिंकू राणा शामिल हैं। ये तीनों ही अलग-अलग गैंग चलाते थे, लेकिन उनका तरीका एक जैसा ही था। इनके नेटवर्क में फील्ड ऑपरेटिव, डिजिटल माध्यम से संपर्क बनाए रखने वाले शामिल थे।

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