दिल्ली पुलिस के सिपाही का होगा प्रमोशन? एक अंक की कानूनी लड़ाई में 18 साल बाद बनी कमेटी
दिल्ली पुलिस का एक सिपाही परीक्षा में एक अंक पाने के लिए अपने विभाग के खिलाफ 18 वर्षों से कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। परीक्षा में पूछे गए एक सवाल को गलत बताते हुए उसने इसके लिए अंक मांगा है। कैट ने सवाल के सही या गलत होने का पता लगाने के लिए कमेटी गठित कर दी है।

दिल्ली पुलिस का एक सिपाही परीक्षा में एक अंक पाने के लिए अपने विभाग के खिलाफ 18 वर्षों से कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। परीक्षा में पूछे गए एक सवाल को गलत बताते हुए उसने इसके लिए अंक मांगा है। केंद्रीय प्रशासनिक पंचाट (कैट) ने वर्ष 2007 में हुई परीक्षा में पूछे गए सवाल के सही या गलत होने का पता लगाने के लिए कमेटी गठित कर दी है। इसके साथ ही यह भी कहा है कि अगर सवाल गलत है तो उसे इसका एक नबंर दिया जाए, ताकि उसे वर्ष 2007 से पदोन्नति मिल सके।
जानकारी के अनुसार, गजेन्द्र सिंह वर्ष 1989 में दिल्ली पुलिस में सिपाही पद पर भर्ती हुए थे। वर्ष 2007 में विभाग ने पदोन्नति के लिए परीक्षा ली, जिसमें उन्होंने भी हिस्सा लिया था। परीक्षा में उन्हें सफल नहीं माना गया। वर्ष 2008 में आरटीआई से उन्होंने जवाब मांगा तो बताया गया कि 125 अंक वालों को पदोन्नति मिली है, जबकि उन्हें 124 अंक मिले हैं। गजेन्द्र ने विभाग से कहा कि परीक्षा में कुछ सवाल सिलेबस के बाहर से आए थे। इसके अलावा सीआरपीसी की धारा 164 को लेकर पूछा गया सवाल ही गलत था। ऐसे में उन्हें एक नंबर अतिरिक्त मिलना चाहिए। विभाग ने जब उनकी कोई सुनवाई नहीं की तो उन्होंने कैट का दरवाजा खटखटाया।
इस प्रश्न को सिपाही ने गलत बताया
कैट के समक्ष गजेन्द्र के वकील अनिल सिंघल ने बताया कि परीक्षा में सवाल संख्या 53 में पूछा गया था कि सीआरपीसी की धारा 164 के तहत आरोपी की तलाशी कहां ली जाती है, जबकि इस धारा के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज होते हैं। यह सवाल ही गलत पूछा गया था, इसलिए उसे एक अंक गलत सवाल पर मिलना चाहिए।
तीन महीने में कमेटी को रिपोर्ट देने के निर्देश
कैट ने मामले की सुनवाई करते हुए वकील डॉ. भूषण तिलक कौल की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी परीक्षा में पूछे गए सवाल को देखेगी कि वह सही है या नहीं। इसके अलावा सिलेबस के बाहर से कोई सवाल आया था या नहीं। कमेटी को तीन महीने में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए।
एक महीने में दिल्ली पुलिस फैसला लेगी
कैट ने अपने आदेश में कहा है कि इस कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर दिल्ली पुलिस को एक माह के भीतर निर्णय लेना होगा। अगर कमेटी की रिपोर्ट में गजेन्द्र को एक अतिरिक्त अंक गलत सवाल होने पर मिलता है तो उसे परीक्षा परिणाम के समय से यानी 2007 से पदोन्नति मिल जाएगी।
चार अहम बातें
● गजेन्द्र सिंह वर्ष 1989 में दिल्ली पुलिस में भर्ती हुए थे
● सिपाही ने सीआरपीसी की धारा 164 से संबंधित प्रश्न संख्या 53 को गलत बताया
● कैट ने प्रश्न की सही-गलत स्थिति जांचने के लिए विशेष कमेटी गठित की जो तीन महीने में रिपोर्ट देगी
● सिपाही को अतिरिक्त अंक मिलने पर उन्हें 2007 से पदोन्नति का लाभ दिया जाएगा




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